गुरुवार, 8 सितंबर 2022

देश को भयावह स्थिति से बचाना जरूरी

अवधेश कुमार

जब शुरू- शुरू में मई के महीने में सिर तन से जुदा का नारा लगा तो ज्यादातर लोगों ने सोचा कि कुछ मुट्ठी भर लोगों की करतूत है। यानी आगे यह नारा दोहराया नहीं जाएगा। अब यह नारा धीरे-धीरे देशव्यापी स्वरूप ग्रहण कर चुका है। सच कहा जाए तो गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा सिर तन से जुदा जैसा खुलेआम मजहब के नाम पर हत्या की धमकी देने वाला नारा सामान्य बन चुका है। आपको हर दूसरे तीसरे दिन किसी न किसी कोने में सिर तन से जुदा की धमकी मिलती रहती है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का भयावह दृश्य कौन भुला सकता है। वहां भाजपा के विधायक ठाकुर राजा सिंह, जो अब निलंबित किए जा चुके हैं, के वक्तव्य के विरोध में आतंकित करने वाला दृश्य पैदा किया गया। उसके बाद उत्तर प्रदेश के बागपत में घटना घटी। वहां मुस्लिम परिवार के एक युवक ने हिंदू परिवार को धमकी दी कि अगर उनकी लड़की उसे नहीं मिली तो उस पूरे परिवार का सिर तन से जुदा कर देगा । इसके बाद राजस्थान के भीलवाड़ा के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर विजय अग्रवाल के यहां पत्र आया जिसमें लिखा है कि आप इस्लाम धर्म स्वीकार करो वरना हमें सिर कलम करने आता है। इसमें यह भी लिखा है कि आप सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो और हमें आपकी जरूरत है। इसमें इस्लाम धर्म कबूलने पर पांच लाख रुपया देने की बात है। ये तो कुछ उदाहरण है। धीरे-धीरे इस नारे की सार्वजनिक पुनरावृति या व्यक्तिगत स्तर पर धमकी के रूप में इसका उपयोग विस्तारित होता जा रहा है। तो इसके मायने क्या हैं?

हमारे देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो इसे कुछ सिरफिरे लोगों कि नासमझी बता कर खारिज कर देंगे। कुछ बताएंगे कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है। कुछ इसका विरोध करने वालों को ही सांप्रदायिक घोषित कर देंगे। भारत के अलावा इस तरह की प्रतिक्रिया देने वाला देश शायद ही कोई होगा। उदयपुर में कन्हैयालाल और अमरावती में प्रमोद कोल्हे की हत्या हो गई। यानी यह नारा व्यवहार में भी बदल चुका है। बावजूद हमारे देश में स्वयं को सेक्यूलर बनने वाले लोगों की आंखें नहीं खुल रही। कल्पना करिए, अगर किसी के घर आज तन से जुदा करने की धमकी भरा पत्र दे दिया जाए या फोन करके कहा जाए तो उसकी हालत क्या होगी? ऐसे अनेक परिवार हर क्षण गले काटे जाने के भय के साए में जीने को मजबूर हैं। सरेआम यह नारा लगाने वाले के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं हो रही इसलिए मजहबी उन्माद से ग्रस्त लोगों का मनोबल बढ़ता है तथा दूसरे पक्ष के अंदर भय पैदा होता है। स्थिति यहां तक हो गई है कि अखबारों, टेलीविजन आदि में इस विषय पर कुछ लिखने बोलने वाले भी डरने लगे हैं। आपको निजी बातचीत में कहते हुए मिल जाएंगे कि इस विषय पर डिबेट करने या कुछ बोलने से डर लगने लगा है।

हैदराबाद का दृश्य कोई नहीं भूल सकता। ठाकुर राजा सिंह की गिरफ्तारी के पहले पूरा दृश्य दंगों का बना दिया गया था। वह गिरफ्तार हो गए तब भी नारा लगाते हुए उन्हें फांसी देने की मांग की जाने लगी। न्यायालय की नजर में मामला इतना गंभीर नहीं था कि उन्हें जेल में रखा जाए इसलिए  जमानत दे दी गई। इधर न्यायालय ने जमानत दिया और उधर हजारों की संख्या में हैदराबाद में सड़कों पर उतर कर सिर तन से जुदा के नारे लगाए जाने लगे। कई नारे थे। मसलन, गुस्ताख ए रसूल को फांसी दो फांसी दो फांसी दो, गुस्ताखी नबी को फांसी दो फांसी दो फांसी दो  आदि। एक तरफ आप सिर तन से जुदा का नारा लगाते हैं और दूसरी ओर फांसी की मांग करते हैं। तो इसका यह अर्थ क्यों न लगाया जाए कि आप धमकी दे रहे हैं कि अगर फांसी नहीं दी गई तो हम स्वयं सिर से तन से जुदा कर देंगे? आपने देखा कि अजमेर शरीफ में एक व्यक्ति ने नूपुर शर्मा का सिर काट कर लाने वाले को अपनी संपत्ति तक देने की बात कर दी।

लेकिन तेलंगाना में जो कुछ हुआ उसकी कल्पना नहीं थी। इतनी संख्या में लोग खुलेआम सिर से जुदा के नारे लगाए और पूरे शहर को अपनी उंगलियों पर उठाने का यत्न करें तो कैसा माहौल बनेगा इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है। पुलिस की गाड़ियों पर हम हमले हुए। जरा सोचिए, ये धमकी किसे दे रहे थे? जमानत न्यायालय ने दिया था। विडंबना देखिए कि तेलंगाना सरकार इनके दबाव में आ गई। राजा सिंह को फिर पुराने मामलों में और निवारक नजरबंदी कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया। राजा सिंह के वीडियो में प्रयोग की गई भाषा अस्वीकार्य है। हालांकि उसमें मोहम्मद साहब का नाम नहीं लिया गया लेकिन संकेत साफ है। पर ठाकुर राजा सिंह के अपराधों की सजा देने की जिम्मेदारी न्यायालय की है या जबरन धमकी देकर बीएफ अपने मनमाफिक सजा दिलाई जाएगी? इसका दूसरा पक्ष यह है कि हास्य के नाम पर मुनव्वर फारुकी द्वारा हिंदू देवी -देवताओं का लगातार उपहास उड़ाया गया है। ठाकुर राजा सिंह और उनके साथियों ने इसका विरोध किया,सड़कों पर उतरे। उनकी लोकप्रियता है और जनशक्ति भी। विरोध की परवाह न करते हुए तेलंगाना सरकार ने मुनव्वर फारूकी का कार्यक्रम सरकारी सुरक्षा के तहत कराए। इसके पीछे वोट पाने की राजनीतिक सोच के अलावा कोई कारण नहीं हो सकता। इसका विरोध होना ही था और विरोध करने वाला हर व्यक्ति सभ्य भाषा में बात करें यह संभव नहीं। एक मजहब का अपमान अपमान है और दूसरे का? अभी तक हिंदुओं या अन्य गैर मुस्लिम मतावलंबियों ने इस तरह की धमकी भरी नारे के विरुद्ध आक्रामक प्रदर्शन नहीं किए हैं। लोगों के अंदर गुस्सा पैदा हो रहा है। आम धारणा यही है कि डर पैदा कर सच बोलने से रोका जा रहा है तथा दूसरी ओर हमारे धर्म का अपमान हो रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही। कानून का राज और कानून के समक्ष समानता का राजकीय व्यवहार ज्यादातर जगह नहीं दिखाई पड़ रहा।

यह खतरनाक स्थिति है। इस्लामी कट्टरवाद और उससे पैदा हुई हिंसा से पूरी दुनिया परेशान है। सिर तन से जुदा के विचार ने पाकिस्तान , अफगानिस्तान, लीबिया, सीरिया, इराक ,यमन जैसे कई इस्लामी देशों को बर्बाद कर दिया। आईएसआईएस और तालिबानों के सिर तन से जुदा के लाइव दृश्य दुनिया को दिखाए गए। हाल के महीनों में  प्रदर्शनों के दौरान हुई उग्रता और हिंसा बताता है कि भारत में भी इस्लामी कट्टरवाद नीचे तक फैल चुका है। आरंभ में जब सवाल उठाए गए तो कई मुस्लिम नेताओं और टीवी पर आने वाले चेहरों की ओर से भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयानों का हवाला दिया गया। कहा जाता था कि रसूल की शान में गुस्ताखी हुई है जिसके विरुद्ध पूरे मुस्लिम समुदाय में गुस्सा है। जब उनसे कहा जाता कि इस नारे की आलोचना करिए तो उसके जवाब में भी आरएसएस, भाजपा ,मोदी ,योगी आदि को मुस्लिम विरोधी साबित करने के कुतर्क दिए जाते थे। यह स्थिति आज भी नहीं बदली है। कई मुस्लिम नेताओं ने कहा कि इससे हम सहमत नहीं है और यह नारा नहीं लगाया जाना चाहिए लेकिन जैसा तेवर इनका दूसरों के बारे में है वैसे ही अपने समुदाय के अति वादियों के संदर्भ में नहीं। इसका अर्थ क्या है? क्या यह सार्वजनिक स्तर पर संविधान और शांति की दुहाई देना तथा अंदर ही अंदर कट्टरवाद को सही मानना नहीं है? असदुद्दीन ओवैसी ठाकुर राजा सिंह को लेकर तो पत्रकार वार्ता करते रहे लेकिन हजारों की संख्या में सिर तन से जुदा नारा लगाने वाले अति वादियों के विरुद्ध एक शब्द नहीं। वही पुराना जुमला कि हम सहमत नहीं है यह नारा नहीं लगना चाहिए। बोलने की भाषा ऐसी जैसे यह सामान्य बात हो। ये नेता लगातार लंबे समय से झूठ फैलाते रहे हैं कि भारत में मुसलमानों के साथ अन्याय हो रहा है, उनके मजहबी अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है आदि आदि। नरेंद्र मोदी, संघ भाजपा आदि को मुसलमान विरोधी साबित करने के लिए ऐसे अनेक झूठ गढ़े गए जिन्होंने मुसलमानों के एक बड़े तबके के अंदर मजहबी कट्टरता को परवान चढ़ा दिया है। स्थिति ऐसी खतरनाक दिशा में जा रही है जहां यह समझना कठिन है कि इसे कैसे रोका जाए। 

तो सभी राजनीतिक पार्टियों, गैर राजनीतिक समूहों, सांस्कृतिक -धार्मिक संगठनों, संस्थाओं आदि सबको इस कट्टरपंथ के विरुद्ध कठोर तेवर अपनाने की आवश्यकता है। उदारवादी मुसलमानों परवीन के विरोध का दायित्व है। सरकारें इनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई करें और अन्य समूह  इनका प्रखर विरोध। ऐसा नहीं हुआ तो देश भयानक स्थिति में फंस जाएगा। लगभग ऐसे ही स्थिति विभाजन के पूर्व पैदा की गई थी। देश को उस स्थिति से बचाना है तो राजनीतिक -वैचारिक मतभेद छोड़कर हर समुदाय के लोगों को इनके विरुद्ध खड़ा होना पड़ेगा। 

अवधेश कुमार,ई-30, गणेश नगर ,पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली -110092, मोबाइल- 98110 27208




ट्रक ड्राइवरों के लिए फ्री आई चेकअप कैम्प का आयोजन किया गया

नई दिल्ली। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार द्वारा फेडरेशन फॉर एजुकेशन डेवलपमेंट के सहयोग से सात दिवसीय ट्रक ड्राइवरों के लिए निशुल्क नेत्र जांच शिविर इंडियन वोटिंग प्लांट गांव बंथला लोनी (गाजियाबाद) में आयोजित किया गया।
 कार्यक्रम का आयोजन फेडरेशन फॉर एजुकेशनल डेवलपमेंट की ओर से हुआ जिसमें ट्रक चालकों की आंखों की जांच की गई और उन्हें चश्मे भी फ्री दिए गए। इस कैम्प का उद्देश्य इस बात को ध्यान में रखते हुए किया गया था कि ट्रक चालकों की आंखें पूरी तरह स्वच्छ रहेंगी तो सड़क हादसों में कमी आएगी। इसी तरीके के कैंप सरकार द्वारा जगह-जगह लगाकर जांच कराई जा रही और चश्मे भी दिए जाते हैं। संस्था के फाउंडर शकील अहमद ने कहा कि उनकी संस्था शिक्षा स्वास्थ्य के साथ-साथ अनेक विषयों पर काम करती है उनके सभी कार्य जनहित में होते हैं। इस मौके पर संस्था के फाउंडर शकील अहमद, महासचिव शाहिदा शकील, नोमान खान, इसरार, वकार सिद्दीकी, नाजिया खान, राशिद, अब्बास आदि उपस्थित रहे।


 

मंगलवार, 6 सितंबर 2022

सोमवार, 5 सितंबर 2022

आजाद बारबर एसोसिएशन ने किया मेगा ग्रैंड हेयर शो व अवार्ड समारोह का आयोजन

मो. रियाज

नई दिल्ली। आजाद बारबर एसोसिएशन के तत्वाधान में मेगा ग्रैंड हेयर शो 2022 एवं अवार्ड समारोह का आयोजन किया गया। इस मेगा ग्रैंड हेयर शो में बारबरों को नई तकनीक की जानकारी दी गई। 
यह समारोह मुख्तधारा ऑडिटोरियम बंगा संस्कृति भवन गोल मार्केट नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस समारोह में दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम मुख्य अतिथि थे व दिल्ली उर्दू अकेडमी के वाइस चेयरमैन ताज मोहम्मद अतिथि थे।
समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम मुख्य व दिल्ली उर्दू अकेडमी के वाइस चेयरमैन ताज मोहम्मद को एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. इमरान सलमानी ने स्मृति चिन्ह व गुलदस्ता देकर स्वागत किया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. इमरान सलमानी ने मंच के माध्यम से समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम को अवगत कराया कि हेयर कटिंग का काम करने वाले लोग आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक दृष्टि से पिछड़े हुए हैं। ऐसे परिवार को सरकार आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक हितों को पूर्ण संरक्षण दे। 
उन्होंने बताया कि आज हजारों परिवार सड़क के किनारे फुटपाथों पर या खुले आसमान के नीचे बेहद विपरीत परिस्थितियों में अपना काम करके आजीविका कमाते हैं। उन्होंने बताया कि आजाद बारबर एसोसिएशन अपने सदस्यों को हेयर स्टाइल के नए तरीके सिखाने के लिए फ्री सेमिनार का आयोजन समय-समय पर करती रहती है। आज भी लगभग 300 हेयर ड्रेसर (लेडीज एण्ड जैन्टस) ने इस मेगा ग्रैंड हेयर शो में भाग लिया। 
उन्होंने आगे बताया कि आजाद बारबर एसोसिएशन द्वारा प्रशिक्षित बारबर छात्रों को 2010 में दिल्ली सरकार के महिला प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने आईटीआई सीरी फोर्ट में "ब्यूटी कल्चर एण्ड हेयर ड्रेसिंग' कोर्स में तकनीकी प्रशिक्षण देकर एसेसमेंट करके उन्हें सरकारी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराए थे। 
समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आजाद बारबर एसोसिएशन को आश्वासन दिया कि मैं पहले भी आपकी मांग कैबिनेट में रख चुका हूं जिस पर माननीय मुख्यमंत्री जी ने भी रजामंदी दे दी है और जल्द ही केश कला बोर्ड का सरकार गठन करेगी। आपके लोगों ने समाज के लिए बहुत कुछ किया है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार आम लोगों की सरकार है और वह सबको बराबर मानती है।
एसोसिएशन के महासचिव जय भगवान सेन ने आए हुए सभी मेहमानों का धन्यवाद किया। इस मौके पर आजाद बारबर एसोसिएशन ने उन पूर्व छात्रों को इस समारोह में दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम से सम्मानित कराया गया। इस समारोह में सेन व सलमानी समाज के प्रतिभावान खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया । इस समारोह में आजाद बारबर एसोसिएशन के मशहूर हेयर आर्टिस्ट नाजिम अली, मशहूर हेयर आर्टिस्टिक मास्टर असलम एवं इनके अलावा अंजनी कुमार सेन, शहाबुद्दीन सलमानी, मंगल सैन, रहीस सलमानी, सरताज सलमानी, इजहार सलमानी, महिला अध्यक्ष नाजमा सलमानी, मेकअप आर्टिस्ट रीता शर्मा आदि मौजूद थे। इनके अलावा लगभग 300 हेयर ड्रेसर (लेडीज एण्ड जैन्टस) ने इस मेगा ग्राण्ड हेयर शो में भाग लिया। 




































रविवार, 4 सितंबर 2022

पृथ्वी पर अशांति फैलाते ये 'कलयुगी धर्मगुरु'

तनवीर जाफ़री 

किसी भी धर्म व समुदाय के धर्मगुरु से वैसे तो प्रायः यही उम्मीद की जाती है कि वह अपने अनुयायियों को सद्मार्ग पर चलने के लिये प्रेरित करे। उन्हें बुराइयों से दूर रहने व सत्कर्म करने के लिये प्रोत्साहित करे। उनमें मानवता का संचार करे। उन्हें दया, सहृदयता, मानवता, क्षमा, परोपकार, जनकल्याण व मानव प्रेम सिखाये। परन्तु आज के दौर में कभी कभी तो मौलवी और साधू संतों के वेश में ही ऐसी राक्षसी मानसिकता रखने वाले लोगों को देखा जाने लगा है जिससे कभी कभी तो ऐसा प्रतीत होने लगता है गोया यही 'कलयुग का उत्कर्ष काल' है। क्योंकि आम तौर पर समाज विशेषकर अपने अनुयायियों को सही राह दिखाने वाले यही कथित मौलवी-संत-साधू अब समाज में साम्प्रदायिकता फैलाने, विषवमन करने,एक दूसरे धर्म या समुदाय के लोगों के विरुद्ध नफ़रत फैलाने यहाँ तक कि अपने समर्थकों को हत्या,हिंसा,आगज़नी व तोड़फोड़ करने के लिये उकसाने जैसे काम कर रहे हैं। अफ़सोस की बात तो यह है कि धर्म की आड़ में और धर्म के नाम पर यह अधर्म प्रायः बहुसंख्य समाज के कथित मौलवियों व धर्म गुरुओं  द्वारा अल्पसंख्यक समाज के विरुद्ध किया जा रहा है। और अधर्म भी ऐसा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। जिसे देख व सुनकर इंसानी रूह काँप उठे, राक्षसी कृत्य भी जिसके आगे फीके पड़ जायें। 

पाकिस्तान में गत 22 अगस्त को लाहौर से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित फ़ैसलाबाद ज़िले के चक 203 आरबी मनावाला में अहमदिया समुदाय के एक क़ब्रिस्तान में अहमदिया समुदाय के लोगों की 16 क़ब्रों को स्वयं को मुसलमान बताने का दावा करने वाले साम्प्रदायिकतावादियों ने तोड़ फोड़ कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया तथा उन क़ब्रों पर पत्थर भी बरसाये । बताया जाता है कि यह क़ब्रिस्तान 75 वर्ष पुराना है। हमलावर चरमपंथियों को शिकायत है कि अहमदिया समुदाय के लोगों द्वारा अपने मृत परिजनों की क़ब्रों के पत्थरों पर इस्लामिक चिन्हों व क़ुरआनी आयतों आदि का इस्तेमाल क्यों किया गया? इन हमलावरों को इन क़ब्रों को क्षतिग्रस्त करने के लिये इस इलाक़े में सक्रिय उन मौलवियों ने प्रेरित किया जो आते तो हैं अपने प्रवचन अल्लाह,रसूल,क़ुरआन व हदीस के नाम पर देने के लिये परन्तु इसके बजाय वे दूसरे समुदाय के लोगों के विरुद्ध अपने समर्थकों व अनुयायियों को भड़काने का काम करते हैं। परिणाम स्वरूप ग़रीबी व बेरोज़गारी से जूझ रहे लोग ऐसे कलयुगी मोलवियों व धर्मगुरुओं के बहकावे में आकर क़ब्रों को खोदने व उन्हें क्षतिग्रस्त करने जैसे अधार्मिक व अमानवीय काम करने लगते हैं। ख़बरों के अनुसार पाकिस्तान में केवल इसी वर्ष अब तक  अहमदिया लोगों की 185 क़ब्रों को  क्षतिग्रस्त किया जा चुका है।

इसी तरह की क्रूर व अमानवीय मानसिकता के लोग कभी मानव बम बनकर मस्जिदों में नमाज़ पढ़ रहे लोगों के बीच विस्फ़ोट कर नमाज़ियों की हत्यायें कर देते हैं ,कभी किसी का सर क़लम करते दिखाई दे जाते हैं,कभी अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्म ढहाते नज़र आते हैं तो कभी अल्पसंख्यकों की इबादतगाहों, मंदिरों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, दरगाहों व इमाम बारगाहों पर हमले करते व तोड़फोड़ व आगज़नी करते दिखाई दे जाते हैं। पिछले दिनों मालदीव के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं तकनीकी राज्यमंत्री अली सोलिह पर राजधानी माले के हुल्हुमाले में एक शख्स ने चाकू से हमला किया। हमलावर क़ुरान की आयतें पढ़ने के बाद हमलावर उनका गला रेतना चाहता था। कुरान की आयतें पढ़ने के बाद इस तरह की अमानवीयता व अधर्म की प्रेरणा केवल मौलवियों,मुल्लाओं व धर्मगुरुओं के उकसाने व भड़काने से ही मिल सकती है। 

तो क्या किसी धर्म या समुदाय विशेष व उनके धर्मग्रंथों में इस बात की शिक्षा दी गयी है कि जिनके सोच विचार आप के विचारों से मेल न खाते हों उनके पूर्वजों की क़ब्रें उधेड़ दी जायें ? उनके सर क़लम कर दिए जाएं ? उनकी इबादतगाहों को नुक़सान पहुँचाया जाये ? जिनके नमाज़ या पूजा अरदास आदि के तरीक़े आपकी इबादत पद्धति से मेल न खाते हों उनके धर्मस्थलों पर विस्फ़ोट कर बेगुनाह लोगों की जान ले ली जाये ? न तो मैं अहमदिया समुदाय से संबद्ध हूँ न ही उनका अनुयायी। परन्तु इस अति अल्पसंख्यक परन्तु शिक्षित मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ आये दिन होने वाले ज़ुल्म-ो-सितम की दास्ताँ सुनसुनकर मानवता के नाते इनके प्रति मेरी हमदर्दी ज़रूर बढ़ गयी है। और इनपर या इन जैसे दूसरे अल्पसंख्यकों पर ज़ुल्म ढहाने वालों के विरुद्ध नफ़रत और ग़ुस्सा। आश्चर्य है कि पाकिस्तान की संसद ने 1974 में अहमदिया समुदाय को ग़ैर -मुस्लिम घोषित कर दिया। इस समुदाय पर ख़ुद को मुस्लिम कहलवाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। यहाँ तक कि अहमदिया मुसलमानों का धार्मिक उपदेश देना और हज के लिए सऊदी अरब जाना तक प्रतिबंधित कर दिया गया। जबकि अहमदिया स्वयं को मुसलमान भी कहते हैं,क़ुरआन व रसूल पर भी अक़ीदा रखते हैं। 

सवाल यह कि आज के पाकिस्तान में जहाँ बाढ़ व मंहगाई से देश के हालात अति दयनीय बने हुये हैं, इस दौर में ख़ुदा से डरने,लोगों के दिलों की दुआयें हासिल करने,अपने आमाल सुधारने, अपने किये गये गुनाहों के लिये अल्लाह से तौबा करने के बजाये, क़ब्रें खोदने,मस्जिदों,मंदिरों व गुरद्वारों पर हमले करने जैसी अमानवीय व राक्षसीय सोच आख़िर कहाँ से आती है ? यह समझने के लिये भी हमें इस्लामी इतिहास के अतीत में ही झांकना पड़ेगा। और फिर हम यही पायेंगे कि स्वयं को मुसलमान कहने वाली यही ज़ालिम व क्रूर शक्तियां जो आज भी क़ब्रें खोदने पर आमादा हैं यह उसी मानसिकता के मुसलमान हैं जिन्होंने करबला में इमाम हुसैन के छः महीने के बच्चे अली असग़र को पहले तो तीर मारकर क़त्ल किया फिर जब इमाम हुसैन ने शहीद अली असग़र की लाश करबला की तपती धरती में दफ़्न कर दी तो इन्हीं 'स्वयंभू मुसलमानों' ने इमाम हुसैन को क़त्ल करने के बाद अली असग़र की लाश को भी क़ब्र खोद कर बाहर निकाल कर उसकी गर्दन काटी और भाले की नोक पर बुलंद कर बाज़ारों में घुमाया। नमाज़ियों पर हमले की प्रेरणा भी इन्हें करबला से ही मिलती है। 

दस मुहर्रम की सुबह जब इमाम हुसैन के साथी अपनी आख़िरी नमाज़ अदा कर रहे थे उस समय यज़ीदी सेना ने तीरों की बौछार कर नमाज़ में विघ्न पैदा किया था। आगज़नी की प्रेरणा भी इन्हें करबला से ही मिलती है क्योंकि इमाम हुसैन की शहादत के बाद इसी यज़ीदी लश्कर ने उन तंबुओं में आग लगा दी थी जिनमें इमाम हुसैन के परिवार की महिलायें व बच्चे रह रहे थे। इसी विचारधारा के लोगों ने पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद की बेटी हज़रत फ़ातिमा के घर में आग लगा कर उनकी हत्या की थी। गोया जो लोग इस्लाम के नाम पर और मुसलमानों का चोग़ा पहनकर इस्लाम के उद्भवकाल में इस्लाम व मुसलमानों के दुश्मन थे आज भी उसी मानसिकता के कलयुगी धर्मगुरु पूरी पृथ्वी पर अशांति फैलाने में लगे हुये हैं। 

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