शुक्रवार, 12 मार्च 2021

ये दृश्य कांग्रेस के बुरे भविष्य की द्योतक हैं

अवधेश कुमार

कांग्रेश की दशा देखकर उसके कट्टर समर्थक भी निस्संदेह हताश हो रहे होंगे। पार्टी के लिए चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनाव कितने महत्वपूर्ण हैं यह बताने की आवश्यकता नहीं। आपने गौर किया या नहीं, केंद्रीय नेताओं में केवल  राहुल गांधी तमिलनाडु से पुडुचेरी और केरल तक के चुनाव प्रचार में दिख रहे हैं। प्रियंका वाड्रा भी असम में दिखी हैं। दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के रूप में पहचान रखने वाले कई चेहरे एक साथ जम्मू में एक मंच पर दिखे। उसके बाद अन्य कार्यक्रमों में या सोशल मीडिया से हमें उनके विचार सुनने को मिल रहा है। जिस समय संपूर्ण पार्टी को एकजुट होकर, जान-प्राण लगाकर करो या मरो की भावना से विधानसभा चुनाव अभियान चलाना चाहिए था उस समय इस तरह के परिदृश्य कांग्रेस के भविष्य को लेकर निराशा ही बढ़ाएगा। भारतीय राजनीति की त्रासदी और विडंबना दोनों है कि लंबे समय तक किसी पार्टी में काम करने वाले नेता अगर पार्टी के हित का ध्यान रखते हुए कुछ ऐसे प्रश्न उठाते हैं जो तात्कालिक नेतृत्व के थोड़ा भी विरुद्ध जाए तो उसे पार्टी विरोधी, विरोधी पार्टियों के इशारे पर काम करने वाला, विश्वासघाती और ना जाने क्या-क्या करार दिया जाता है। कांग्रेस के अंदर नेताओं के जिस तबके को जी 23 नाम दिया गया है उनमें ऐसे कौन है जिनकी पहचान एक कट्टर कांग्रेसी कि नहीं रही है? किंतु गुलाम नबी आजाद के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की जा रही है। कहा जा रहा है कि वे भाजपा में जाने वाले हैं। अलग-अलग राज्यों में दूसरे नेताओं के खिलाफ भी पार्टी का एक समूह, जो 10 जनपथ यानी सोनिया गांधी परिवार के प्रति निष्ठा रखता है उसका रवैया लगभग ऐसा ही है। राज्यसभा में पार्टी के उप नेता आनंद शर्मा ने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी जैसे सांप्रदायिक व्यक्ति और उनके संगठन इंडियन पीपुल्स फ्रंट के साथ गठबंधन को पार्टी के मूल सिद्धांतों के विपरीत क्या बताया उन पर भी हमले शुरू हो गए। अधीर रंजन चौधरी ने उन पर जिस तरह का जवाबी हमला किया, उनका उपहास उड़ाया उसे यहां दुहराने की आवश्यकता नहीं। 

कायदे से जब ऐसे वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव, संगठन में बदलाव, स्थाई अध्यक्ष आदि की मांग पत्र लिखकर सार्वजनिक तौर पर की तो उसे सकारात्मक दृष्टिकोण से लिया जाना चाहिए था। कार्यकारी अध्यक्ष का दायित्व था कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर संगठन चुनाव, महाधिवेशन आदि की तिथि तय करते। अगर ऐसा हुआ होता तो निश्चित रूप से नौबत यहां तक नहीं आती। कांग्रेस इस समय नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा से सीधे मोर्चा लेने में दुर्बल साबित हो रही है। ज्यादातर चुनावों में कांग्रेस इनका मुकाबला करने में सक्षम नहीं है। इसके कारणों की पड़ताल करते हुए नीति, रणनीति और नेतृत्व में आवश्यकतानुरूप बदलाव करने का माद्दा दिखाया जाना अपरिहार्य था और है। जब ऐसा नहीं हुआ और इसकी संभावना तक नहीं दिखी तभी नेताओं का धैर्य जवाब देने लगा। यह भी विचारणीय है कि इतने वरिष्ठ नेताओं को सोशल मीडिया के माध्यम से या फिर अन्य मंचों से अपनी बात क्यों रखनी पड़ रही है? इसका मतलब यही है कि महत्वपूर्ण चुनावों की घोषणा के बावजूद कार्यकारी अध्यक्ष ने चुनावी अभियान और रणनीति पर इन सबके साथ विचार-विमर्श तथा इनकी भूमिका तय करने की पहल नहीं की है। आखिर आजाद के मार्गदर्शन में चलने वाले ग्लोबल गांधी संगठन की जम्मू में शांति सम्मेलन की आवश्यकता क्यों पड़ी होगी? अगर वे लोग चुनाव में सक्रिय होते तो उनके पास परिणाम आने तक समय ही नहीं मिलता। इसी तरह अगर राज्यों में गठबंधनों पर पार्टी के अंदर विचार-विमर्श होता तो आनंद शर्मा को ट्विटर के माध्यम से अपनी बात रखने की आवश्यकता ही महसूस नहीं होती।

 कांग्रेस के पास लोकसभा में जो 53 सीटें हैं उनमें से 29 इन्हीं प्रदेशों से हैं। इन राज्यों में कांग्रेस के विधानसभा सदस्यों की संख्या पिछले चुनाव में 111 थी। सभी स्थानों को मिला दे तो विधानसभा सीटों के अनुसार कांग्रेस तीसरे तथा लोकसभा के अनुसार पहले नंबर की पार्टी है। दक्षिणी राज्य वैसे भी संकट के समय कांग्रेस को संभालते रहे हैं। 1977 में भले उत्तर भारत से कांग्रेस साफ हो गई लेकिन दक्षिण भारत ने इंदिरा गांधी का साथ दिया था। अगर 2004 और 2009 में कांग्रेस अपने नेतृत्व में यूपीए की सरकार बना सकी तो उसके पीछे दक्षिण के राज्यों से प्राप्त अपनी और साथी दलों की सीटों का मुख्य योगदान था। आज अगर कांग्रेस संसद में कमजोर है तो उसका कारण भी इसी में निहित है। वस्तुतः इन चुनावों में हताशा को पीछे रखकर कांग्रेस को जी जान से जुट जाना चाहिए था। यहां सोच यह है कि एकमात्र राहुल गांधी का चेहरा ही जनता और पार्टी के सामने दिखना चाहिए। इससे भविष्य में उनके नेतृत्व का समर्थन आधार मजबूत होगा। यानी इन राज्यों में कांग्रेस को अगर सफलता मिलती है तो उसका पूरा श्रेय परिवार  को मिलेगा। इसके बाद उनकी नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाने वालों की आवाजें कमजोर हो जाएंगी। 

 केरल में हमेशा लड़ाई वाम मोर्चे वाले एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच रहा है। हर चुनाव में सत्ता की अदला-बदली होती रही है। चूंकि इस समय वाममोर्चा सत्ता में है इसलिए कांग्रेसी नेतृत्व वाले मोर्चे के सत्ता में लौटने की संभावना राहुल गांधी और उनके रणनीतिकार को दिख रही होगी। लोकसभा चुनाव में केरल ने 15 सीटें कांग्रेस को दी। भाजपा अभी वहां इतनी मजबूत नहीं दिखती है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के मार्ग को बाधित कर सके। असम में भी मतदाताओं के पास दो ही विकल्प हैं। या तो वे भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ जाएं या कांग्रेस नेतृत्व वाले गठबंधन के। इसमें भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद सोनिया, राहुल और उनके रणनीतिकार कर रहे होंगे। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक गठबंधन की अलोकप्रियता का प्रमाण 2019 लोकसभा में मिल गया था। उसे एक सीट पर सीमित होना पड़ा। शेष सारी सीटें द्रमुक गठबंधन ने जीत ली। एक साथी दल होने के नाते कांग्रेस को द्रमुक के सहारे अच्छी सीट पाने की उम्मीद हो सकती है। इसमें सोनिया गांधी परिवार के समर्थक चाहते हैं कि अन्य नेताओं को परे रखकर राहुल गांधी को पूरे प्रदर्शन का श्रेय मिल जाए तो उनकी दृष्टि से यह स्वाभाविक है। उम्मीद के अनुरूप परिणाम आए तो इन सारे नेताओं पर हमले होंगे तथा सोनिया, राहुल और प्रियंका की जय - जयकार सुनाई देगी। तात्कालिक रुप से उनके लिए यह सही लगे, इसमें कांग्रेस का हित कतई निहित नहीं है। जब भी गहरे संकट में फंसे तो शांत और संतुलित होकर विचार करना चाहिए कि ऐसा हुआ क्यों? आपके अंदर समझ है और ईमानदारी से विचार करेंगे तो सारे कारण स्पष्ट हो जाएंगे। ऐसा हुआ ही नहीं। डर है कि ऐसे मंथन में नेतृत्व की क्षमता पर प्रश्न खड़ा होगा और जवाब देना कठिन हो जाएगा। कोई भी विवेकशील और संतुलित प्रश्न नागवार गुजरेगा।

आखिर आनंद शर्मा ने यही कहा है कि बंगाल में आईपीएफ या ऐसे दूसरे समूहों के साथ गठबंधन कांग्रेस की मूल विचारधारा के विपरीत है। आईपीएफ के प्रमुख पीरजादा अब्बास सिद्दीकी के अनेक वक्तव्य सामने आए हैं जिनसे साबित हो जाता है कि उनका विचार एवं व्यवहार कट्टर मजहबी सोच से निर्धारित है। असम में बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ से गठजोड़ भी इसी श्रेणी का उदाहरण है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय तरुण गोगोई ने अपने कार्यकाल में बदरुद्दीन को कभी कांग्रेस से सटने नहीं दिया। वे उनकी सांप्रदायिक एजेंडा को भली प्रकार जानते थे। किसी तरह कुछ सीटें पा लेने के लिए ऐसे समूहों से गठजोड़ करना डरावने जोखिमों से भरा है। आनंद शर्मा ने कहा है कि गठजोड़ पर विचार करने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। तरीका तो यही है। हालांकि ये नेता पहले ऐसे गठजोड़ पर प्रश्न नहीं उठाते थे। इनके रहते भी सेक्यूलरवाद की परिभाषा हमेशा सुविधाओं के अनुरूप दी गई।

बहरहालपरिणाम पिछले विधानसभा चुनावों से  बेहतर हुए तो पूरे देश में ऐसे नेताओं को हाशिए पर डालने तथा सोनिया, राहुल व प्रियंका के प्रति निष्ठा रखने वाले लोगों को प्रश्रय देने की प्रक्रिया शुरू होगी। उसमें कांग्रेस का भविष्य क्या होगा? कांग्रेस का भला नहीं होने वाला। उसका राजनीतिक भविष्य और संकटग्रस्त होगा।

अवधेश कुमार, ईरू30, गणेश नगर, पांडव नगर कौम्प्लेक्स, दिल्ली रू110092, मोबाइल रू9811027208, 8178547992


सोमवार, 8 मार्च 2021

7वीं विधानसभा के दूसरे सत्र में उपराज्यपाल महोदय का अभिभाषण

माननीय अध्यक्ष और सदस्यगण , 

1. मैं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सातवीं विधानसभा के दूसरे सत्र में आप सभी का स्वागत करता हूं । 
2. बीता साल अभूतपूर्व रहा है । कोविड -19 ने दिल्ली के नागरिकों के जीवन के हर पहलू पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है । इक्कीसवीं सदी में इस महामारी ने मानव जीवन और स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा उत्पन्न किया । मेरी सरकार ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर दिल्ली के नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिए निवारण और इलाज सुनिश्चित करने के लिए सभी संसाधन जुटाए।
3. सरकार ने दिल्ली नगर निगम तथा नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् सहित दिल्ली सरकार के सभी स्वास्थ्य संस्थानों , निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में परीक्षण की क्षमता बढ़ाई । किफायती दर पर परीक्षण की सुविधा प्रदान करने के लिए इसकी अधिकतम कीमत तय कर दी गई ।
4. क्षेत्र स्तर पर संक्रमितों और उनके संपर्को का पता लगाने का काम कड़ाई से किया गया । मोबाइल टीमों को उच्च जोखिम वाले समूहों , निगरानी समूहों , प्रवासियों तथा बेघरों की स्क्रीनिंग और परीक्षण के लिए सेवा में लगाया गया । सभी संक्रमितों , कंटेनमेंट क्षेत्रों और अन्य क्लस्टरों का Mapping GSDL द्वारा किया गया ।
5. सरकार ने कोविड -19 के प्रत्याशित प्रकोप को देखते हुए अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या में अच्छी खासी वृद्धि की । निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की सेवाएं लेना तथा इनके लिए अधिकतम मूल्य तय करना और होटलों तथा बैंक्वेट हॉल के साथ संयोजन किया गया । 
6. सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि घर पर आइसोलेट होने वाले रोगियों को उनके स्वास्थ्य की स्थिति की दैनिक निगरानी के लिए पल्स ऑक्सिमीटर उपलब्ध कराया जाये और सरकारी डॉक्टरों तथा टेली कॉलिंग के माध्यम से परामर्श प्रदान किया जाये । 
7. लगातार यह सुनिश्चित किया गया था कि कंटेनमेंट जोन में नागरिकों को आवश्यक वस्तुएं तथा दवाएं निरंतर और समय पर उपलब्ध कराई जाये । 
8. जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त में प्लाज्मा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत में पहला प्लाज्मा बैंक , Institute of Liver and Billiary Sciences में और दूसरा लोक नायक अस्पताल में स्थापित किया गया । 
9. कोविड -19 से निपटने में अपने जीवन का बलिदान देने वाले कोरोना योद्धाओं के परिजनों / आश्रितों के लिए 1 करोड़ रु . की अनुग्रह राशि देने की शुरूआत की गई ।
10. हालांकि सरकार के प्रयास कोविड प्रबंधन पर केंद्रित थे , फिर भी अन्य सभी चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई । दिल्ली सरकार ने दिल्ली में मेडिकल बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के लिए नए अस्पतालों के निर्माण और मौजूदा अस्पतालों की Remodeling के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं । बुराड़ी और अम्बेडकर नगर में अस्पताल कार्यरत हो चुके हैं ।
11. दिल्ली के नागरिकों के कल्याण के उद्देश्य से , मेरी सरकार ने नागरिकों की सहायता के लिए अनेक सार्थक कदम उठाये । लॉकडाउन के कारण आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए मेरी सरकार ने टैक्सी और ऑटो रिक्शा चालकों को वित्तीय सहायता दी । जरूरतमंदों को पका हुआ भोजन मुफ्त वितरित किया गया और आश्रय प्रदान किया गया । 
12. कोविड के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों से उत्पन्न स्थिती से निबटने के लिये सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लगभग 71 लाख लाभार्थियों को अप्रैल , 2020 के दौरान प्रति लाभार्थी 50 प्रतिशत अधिक राशन अर्थात 7.5 किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त दिया गया । 
13. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत मई और जून , 2020 का राशन भी दिल्ली सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराया गया। इसके अलावा, PR & PR-S लाभार्थियों को प्रति व्यक्ति 05 किलोग्राम खाद्यान्न और AAY लाभार्थियों को प्रति परिवार 35 किलोग्राम खाद्यान्न मुफ्त उपलब्ध कराया गया । 
14. ऐसे सभी जरूरतमंद व्यक्ति जिनके पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें सूखा राशन प्रदान करने के लिए एक विशेष खाद्य राहत पहल- मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना शुरू की गई । तदनुसार , अप्रैल और मई , 2020 के दौरान गैर PDS श्रेण के 54 लाख लोगों को 5 किलो खाद्यान E Coupon के जरिये मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया। 
15. आर्थिक तंगी को कम करने के लिए, मई 2020 के महीने के दौरान PDS और गैर PDS परिवारों को आवश्यक - वस्तु किट वितरित करने का प्रावधान भी किया गया । इस किट में आठ वस्तुएं शामिल थीं जिनसे समुचित स्वास्थ्यवर्धक भोजन तैयार किया जा सके ।
16. इसके अलावा, ऐसे सबसे कमजोर, निराश्रित और वंचित लोग , जिनके पास राशन कार्ड / आधार कार्ड नहीं थे , उनके लिए 20,000 से अधिक आपातकालीन राहत कूपन राज्य के सांसदों / विधायकों के माध्यम से गैर PDS योजना के तहत , सूखा राशन उपलब्ध कराने के लिए दिए गए । 
17. इस वित्त वर्ष के दौरान दिल्ली की अर्थव्यवस्था कोविड -19 से प्रभावित रही है । सरकार इस प्रभाव को कम करने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रही है । 
18. 2020-21 में दिल्ली के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में स्थिर कीमतों पर , 5.68 प्रतिशत कमी होने का अनुमान है । इसके बावजूद दिल्ली के नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए मेरी सरकार ने बिजली सब्सिडी , प्रत्येक घर बीस हजार लीटर मुफ्त पानी और डीटीसी बसों में विद्यार्थियों के लिये रियायती और महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की अपनी प्रतिबद्धता कायम रखी । 
19. इसी प्रकार लॉकडाउन के दौरान आई आर्थिक गिरावट के कारण रोजगार की हानि हुई है । इस कठिनाई को कम करने के लिए , सरकार ने नौकरी चाहने वालों और नियोक्ताओं के बीच संपर्क और सामंजस्य के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल - " रोजगार बाजार " शुरू किया है । इस पहल के प्रति उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया देखने को मिली है । 
20. इसके अलावा , मेरी सरकार ने Real Estate Sector को सक्रिय करने के लिए सर्कल रेट को 30/09/2021 तक 20 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय लिया है , इससे दिल्ली की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और आम आदमी पर वित्तीय बोझ और कम होगा ।
21. समावेशी विकास के लिए मेरी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र पर अपना ध्यान बनाए रखा है । शिक्षा क्षेत्र में बुनियादी ढाँचे में सुधार और नीतिगत निर्णयों के पहल के परिणामस्वरूप उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है । 
22. शैक्षणिक सत्र 2019-20 के दौरान सरकारी स्कूलों में बारहवीं कक्षा में पास होने वाले बच्चों की संख्या 97.92 प्रतिशत रही । सत्र 2019-20 के दौरान सरकारी स्कूलों का 10 वीं कक्षा में पास प्रतिशत 82.61 प्रतिशत रहा है । 
23. सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के 578 विद्यार्थियों का चयन भारत सरकार की Merit cum Means छात्रवृत्ति के लिए किया गया । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( ISRO ) द्वारा Cyber Space पर आयोजित अखिल भारतीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता में सरकारी स्कूलों के दो विद्यार्थियों ने शीर्ष दस विद्यार्थियों में स्थान हासिल किया । 
24. कोविड -19 के बावजूद , स्कूलों ने कोविड -19 Protocol का पालन करते हुए पहली से आठवीं कक्षा के लिए पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया । 
25. खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से , अशोक नगर और पश्चिम विहार में क्रमशः Synthetic Hockey Turf और Swimming Pool जैसी नई खेल सुविधाओं का निर्माण किया गया है । इसी तरह नजफगढ़ में Synthetic Track , Mini Football Field , Basketball Court 3ite कबड्डी Play Field जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं ।
26. प्रशिक्षित और रोजगार योग्य मानव संसाधनों को विकसित करने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में , दिल्ली कौशल और उद्यमियता विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है ।
27. नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का विस्तार करने के लिए , सरकार ने Ambedkar Institute of Advanced Communication Technology and Research , गीता कॉलोनी और चौ . ब्रह्म प्रकाश सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज , जाफरपुर का इसमें विलय करने का निर्णय लिया है।
28. समाज के गरीब और वंचित वर्गों के प्रति मेरी सरकार का ध्यान केन्द्रित है | विभिन्न योजनाओं के तहत सरकार संकटग्रस्त महिलाओं , गरीब विधवाओं को उनकी बेटियों के विवाह के लिए , साधनविहीन वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है । इसके अलावा , राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत वित्तीय सहायता भी दी जाती है। 
29. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों के हित में संबंधित विभाग , 08 छात्रवृत्ति योजनाएं चला रहा है। 
30. जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना के तहत SC / ST / OBC और EWS के विद्यार्थियों को Registered निजी कोचिंग संस्थानों से कोचिंग उपलब्ध करा कर UPSC , SSC इत्यादि विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं और व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए मदद करने का लक्ष्य है । इस योजना के तहत 38 और कोचिंग संस्थानों को सूची में शामिल किया गया है । 
31. मुख्यमंत्री विद्यार्थी प्रतिभा योजना नाम से एक नई योजना अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग / अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई है । इस योजना के तहत कक्षा नौ और दस के विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 5,000 हजार रूपये तथा कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 10,000 रूपये की छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाएगी । 
32. झुग्गी झोपडी बस्तियों में रहने वालों के पुर्नवास के लिए और उन्हें गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) ने बहुमंजिले रिहायशी मकानों का निर्माण शुरू किया है।
33. DUSIB झुग्गी झोपडी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए पक्के फुटपाथ तथा नालियों की सुविधा उपलब्ध करा रहा है । सामाजिक सेवाओं के एकीकृत प्रावधान के लिए झुग्गी झोपड़ी बस्तियों में DUSIB , बस्ती विकास केंद्रों का निर्माण कर रहा है । 
34. DUSIB बेघर लोगों को आश्रय भी उपलब्ध कराता है । वर्तमान में यह 193 रैनबसेरों का संचालन और प्रबंधन कर रहा है । इन रैनबसेरों में कोविड 19 से संबंधित सभी दिशा निर्देशों का पालन किया जा रहा है । 
35. मेरी सरकार दिल्ली में श्रमिकों के कल्याण के लिए 44 से अधिक श्रम कानून लागू कर रही है । दिल्ली में पारिश्रमिक की मौजूदा न्यूनतम दर देश के अन्य सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की तुलना में सबसे अधिक और A श्रेणी के शहरों में लागू केंद्र सरकार की दरों के बराबर हैं । 
36. सस्ते मूल्यों पर पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना , गरिमापूर्ण जीवन के लिए जरूरी है । इस उद्देश्य से मेरी सरकार ने 20.2.2021 को मुख्यमंत्री घर - घर राशन योजना अधिसूचित की है । इसके तहत लाभार्थियों को पारदर्शी ढंग से और आसानी से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा स्कीम का मासिक राशन मिलेगा ।
37. मेरी सरकार ने शहर में पानी की आपूर्ति सफलतापूर्वक की है । जल उत्पादन 935 MGD पर बनाए रखा गया है । अनधिकृत कालोनियों में पानी की आपूर्ति में सुधार के लिए पाईप नेटवर्क उपलब्ध कराया जा रहा है । पीने के लिए साफ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए पुरानी और जंग खा चुकी लाईनों को हटाकर नई पाईपलाइनें बिछाई जा रही हैं । 
38. यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता बढाने के लिए , प्रस्तावित नये STP , नवीनतम तकनीक के साथ लगाए जा रहे हैं ताकि चरणबद्ध रूप से उपचार गुणवत्ता प्राप्त की जा सके। STPs को स्वयं पोषित बनाने के लिए उपचारित कचरे से बिजली पैदा किये जाने के कार्य भी किये जाने की योजना है । इससे बिजली के बिल में भी बचत होगी। 
39. यमुना कार्य योजना -III के तहत , दिल्ली जल बोर्ड रिठाला , कोंडली और ओखला में STPs के पुर्नवास / पुनःनिर्माण का कार्य कर रहा है । 35 किलोमीटर लंबाई की संबंधित ट्रंक सीवर और मुख्य नालियों पर कार्य भी प्रगति पर है । 
40. माननीय सदस्यगण, दिल्ली ने 6314 मेगावाट की अधिकतम बिजली मांग को 29 जून 2020 को Zero Loadshedding के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया । दिल्ली में बिजली शुल्क पडोसी राज्यों की तुलना में सबसे कम है । 
41. दिल्ली सरकार ने दिल्ली में औद्योगिक प्रगति के लिए कई पहल किये हैं । नांगली - सकरावती औद्योगिक Cluster , उद्योग विभाग द्वारा पुर्नविकास के लिए अधिसूचित किया गया है ।
42. दिल्ली में Infrastructure विकास के लिए दिल्ली सरकार ने कई परियोजनाएं शुरू की हैं । शास्त्री पार्क और सीलमपुर में फ्लाईओवर यातायात के लिए खोल दिया गया है । 
43. प्रगति मैदान के अंदर और आसपास Integrated Transit Corridor विकास योजना का निर्माण कार्य प्रगति पर है । 
44. बारापूला नाले पर सराय काले खों से मयूर विहार फेज -3 तक Elevated सड़क का निर्माण कार्य जारी है । 
45. वजीराबाद और जगतपुर के बीच दो वाहन Underpass तथा आउटर रिंग रोड पर गांधी विहार के निकट एक पैदल पारपथ का निर्माण कार्य जारी है । यह कार्य जल्दी ही पूरा हो जाने की आशा है । 
46. आउटर रिंग रोड पर IIT से NH - 8 और इसके आसपास के क्षेत्रों में कॉरिडोर सुधार के लिए मुनिरका फ्लाई ओवर चालू हो गया है और इसके अलावा Underpass का निर्माण कार्य चल रहा है । 
47. मेरी सरकार , दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिये 1000 लो फ्लोर बसों और 1000 बिजली चालित बसों को खरीदने का काम कर रही है । 
48. दिल्ली मेट्रो का मौजूदा नेटवर्क एनसीआर सहित 348 किलोमीटर का है । मेट्रो के Phase - 3 के तहत मयूर विहार पॉकेट -1 से त्रिलोकपुरी तक का खंड मार्च 2021 तक पूरा हो जाना निर्धारित था और ढांसा बस स्टैंड तक इसके विस्तार का काम सितंबर 2021 तक पूरा कर लिया जाना है । Phase -3 के शेष दो छोटे खंडों का निर्माण कार्य और Phase -4 के स्वीकृत तीन प्राथमिकता कॉरिडोर का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है ।
49. मेरी सरकार ने दिल्ली Electric वाहन नीति अधिसूचित कर दी है । इस नीति का उद्देश्य दिल्ली में तेजी से Electric वाहनों को बढ़ावा देना है और इन वाहनों के लिए आवश्यक Charging Infrastructure स्थापित करना है । Electric वाहनों को , खरीद प्रोत्साहन , पूराने वाहन हटाने पर प्रोत्साहन, ऋण पर ब्याज में छूट , रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क से और Charging तथा Swappable Battery स्टेशनों का Network स्थापित कर, प्रोत्साहित किया जा रहा है । इस नई पहल से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी । 
50. सरकार ने शहर के पर्यावरण में सुधार और प्रदूषण की रोकथाम पर पूरा ध्यान दिया है । इसके लिए कई उपाय किए गए हैं । इनमें व्यापक कार्य योजना- CAP और Graded Response Action Plan - GRAP शामिल हैं । पर्यावरण , प्रदूषण ( रोकथाम और नियंत्रण ) प्राधिकरण – EPCA की सिफारिशों के अनुसार 15 अक्टूबर 2020 से GRAP के तहत संबंधित प्रावधान लागू किए गए हैं । 
51. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति नगर में 26 स्थलों पर Real Time Basis पर आठ वायु गुणवत्ता मानदंडों पर लगातार नजर रख रही है । 
52. किसानों द्वारा धान के खेतों में पराली जलाए जाने से होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण को रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने IRAI , पूसा के वैज्ञानिकों के साथ व्यापक प्रबंध किया है । दिल्ली में गैर बासमती धान के खेतों में दो हजार एकड़ पर , खेतों तक पराली लाकर उन पर Bio Decomposer घोल के छिड़काव की व्यवस्था की गई है ।
53. लोगों में जागरूकता लाकर यातायात Inter Section पर वाहन प्रदूषण की रोकथाम के लिए सरकार ने " रेड लाईट ऑन , गाडी ऑफ अभियान की शुरूआत की है । शुरू में यह अभियान यातायात पुलिस के साथ 2500 Civil Defence Volunteers की मदद से 21.10.2020 से 25 दिनों के लिए 100 प्रमुख Inter Section पर चलाया गया । आम लोगों की सकारात्मक और उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिलने के बाद इसे 30.11.2020 तक बढ़ा दिया गया ।
54. प्रदूषण से संबंधित किसी भी मामले को दर्ज करने के लिए आम लोगों के लिये 24 घंटे , सातों दिन प्रदूषण निगरानी तंत्र के साथ Green war Room और Green Delhi App की शुरूआत की गई । Green war Room में तैनात टीम शिकायतों पर बारीकी से नजर रखती है । संबंधित विभागों और पूरी दिल्ली में फैली 14 मोबाइल टीमों के द्वारा इन शिकायतों की जांच और उनपर कार्रवाई की जाती है । 
55. दिल्ली में कोरोना महामारी डॉक्टरों , चिकित्साकर्मियों , वैज्ञानिकों , सफाई कर्मचारियों , सुरक्षा बलों और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों के कारण नियंत्रण में है । नागरिकों ने भी निर्धारित दिशा - निर्देशों का अनुपालन कर इस महामारी का फैलाव रोकने में मदद की है । मेरी सरकार हर एक पक्ष के योगदान की सराहना करती है । उन लोगों के योगदान और समर्पण की भी सराहना आवश्यक है जिन्होंने पानी , बिजली और आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखी । 
56. मेरी सरकार प्रत्येक नागरिक से दिशा - निर्देशों के अनुरूप कोरोना वैक्सीन लेने और निर्धारित ऐहतियाती उपायों का कड़ाई से पालन करने की भी अपील करती है ताकि संक्रमण के फैलाव पर पूरी तरह अंकुश रखा जा सके । 
57. माननीय अध्यक्ष महोदय और सदन के सदस्य , मैंने आपके समक्ष संक्षेप में अपनी सरकार की कुछ गतिविधियों की चर्चा की है । उप मुख्यमंत्री / वित्तमंत्री आगे अपने बजट भाषण में इनका विस्तार से उल्लेख करेंगे ।
58. मैं सदन में सार्थक विचार - विमर्श की कामना करता हूँ और सदन के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य और आरोग्य के लिए प्रार्थना करता हूँ आप सब को बधाई । जय हिन्द ।


गुरुवार, 4 मार्च 2021

नीरव मोदी का प्रत्यर्पण आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण

अवधेश कुमार

लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को हरी झंडी मिलना कितना महत्वपूर्ण है यह बताने की आवश्यकता नहीं। निश्चित रूप से यह भारत की ओर से किए गए प्रयासों, न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए तथ्यों और तर्कों तथा सक्रिय रहकर मुकदमा लड़ने का ही परिणाम है। फैसले में न्यायाधीश ने इसका जिक्र करते हुए कहा है कि उन्होंने भारत सरकार द्वारा 16 खंडों में प्रस्तुत किए गए सबूतों, विशेषज्ञों की रिपोर्ट एवं अन्य साक्ष्यों का अवलोकन किया है। हालांकि इससे तुरंत उसके भारत लाने की संभावना नहीं बनती क्योंकि पहले तो मामला ब्रिटेन के गृह मंत्रालय में जाएगा और गृह मंत्री प्रीति पटेल को निर्णय लेना है। प्रत्यर्पण कानून 2003 के अनुसार संबंधित कैबिनेट मंत्री को सारे पहलुओं पर विचार करने के बाद वांछित व्यक्ति के प्रत्यर्पण का आदेश देने का अधिकार प्राप्त है। इस कानून के प्रावधानों के अंतर्गत विदेश मंत्री को भी विचार करना होता है कि आरोपी को मृत्युदंड दिए जाने की संभावना है या नहीं। अगर है तो फिर प्रत्यर्पण का आदेश नहीं दिया जा सकता। इस मामले में नीरज को मृत्युदंड दिए जाने की कोई संभावना नहीं है। न्यायालय के फैसले और भारत के प्रयासों को देखते हुए ब्रिटिश गृह मंत्री प्रीति पटेल इसमें किसी प्रकार का अड़ंगा नहीं डालेंगी। लेकिन नीरव मोदी के पास अभी उच्च न्यायालय जाने का भी रास्ता खुला हुआ है। गृह मंत्री के आदेश के 14 दिनों के अंदर उसे उच्च न्यायालय में अपील करनी होगी। उच्च न्यायालय जो फैसला देगा उसी पर उसके प्रत्यर्पण का भविष्य निर्भर है।

तो यह किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक न्यायिक प्रक्रिया है जिसका सामना हमें करना है। लेकिन जितनी सफलता मिल रही है उसके अनुसार नीरज को भारत लाए जाने की संभावना ज्यादा प्रबल होती जा रही है। वास्तव में न्यायालय ने 83 पृष्ठ के फैसले में प्रत्यर्पण का आदेश देते हुए उसके जिन दलीलों को खारिज किया, उसके लिए जो तर्क दिए, जो टिप्पणियां कीं वो भी न्यायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इससे उम्मीद बनती है कि ऊपरी न्यायालयों में भी भारत को विजय मिलेगी। नीरव मोदी ने अपने को निर्दाेष बताने के अलावा मुख्यतः चार तर्क दिए थे। एक, भारत में उसे निष्पक्ष न्याय मिलने की संभावना नहीं है। इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना ज्यादा है। दो, मुंबई का आर्थर रोड जेल उसके लिए उपयुक्त नहीं है। तीन, उनके स्वास्थ्य को देखते हुए वहां निजी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच नहीं हो सकती। और चार, उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उनके अंदर आत्महत्या की प्रवृत्ति है। न्यायालय ने इन सारी दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत में उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। ऑर्थर रोड जेल उनके लिए उपयुक्त होगा तथा उनकी मानसिक स्थिति ऐसी नहीं है जिससे कि आत्महत्या की प्रवृत्ति को स्वीकार किया जाए। न्यायाधीश ने फैसला में लिखा है कि नीरव मोदी को मुंबई के आर्थर रोड जेल में पर्याप्त चिकित्सा दी जाएगी और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल भी की जाएगी। इसमें साफ लिखा है कि नीरव मोदी को भारत भेजने पर आत्महत्या का कोई खतरा नहीं है क्योंकि पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराया जाएगा। भारत ने न्यायालय को आश्वस्त किया है कि हमारे यहां हिरासती और कैदियों के स्वास्थ्य की पर्याप्त देखभाल का कानूनी प्रावधान और व्यवस्था है तथा न्यायालय ही इस बारे में फैसला करती है। सरकार न्यायालय के आदेश का पालन करती है।

इसका अर्थ है कि न्यायालय ने नीरव मोदी को परोक्ष रूप से बहानेबाज और झूठा मान लिया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि आपने जो कुछ भी कहा है उसमें उन आरोपों का स्वीकारने योग्य खंडन नहीं है जो भारत की ओर से लगाए गए। आपको बहुत सारे प्रश्नों का के जवाब भारत में देने हैं। ध्यान रखने की बात है कि लंदन के न्यायालय को पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में नीरव दोषी है नहीं है इस पर अंतिम फैसला नहीं करना था। उसे  यह देखना था कि नीरव पर लगे आरोपों के संदर्भ में भारत ने जो कुछ तथ्य रखा है उनके आधार पर नीरव के प्रत्यर्पण की अनुमति दी जा सकती है या नहीं। निस्संदेह, उसमें घोटाले में नीरव की भूमिका, उसमें अब तक हुई कार्रवाई, मामले को साबित करने के लिए उससे पूछताछ की आवश्यकता आदि को रेखांकित किया गया था। जाहिर है, न्यायालय इससे सहमत हुआ तभी उसने आदेश दिया है। फैसले में न्यायाधीश ने कहा भी कि लाइन ऑफ क्रेडिट को भुनाने में बैंक के अधिकारियों समेत अन्य आरोपियों की मिलीभगत के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। इसमें स्वयं नीरव मोदी के उस पत्र का भी जिक्र किया गया जिसमें उसने पंजाब नेशनल बैंक को बकाया होने और उसे चुकता करने का वायदा किया है। यहां तक कि न्यायालय ने उसके व्यवसाय के बिल्कुल जायज होने के दावे पर भी संदेह व्यक्त किया। उच्च न्यायालय के सामने भी मामले की तह तक जाकर नीरव मोदी को अंतिम रूप में दोषी या निर्दाेष करार देने का विषय नहीं होगा। वहां भी प्रत्यर्पण का मामला है या नहीं इसी आधार पर इसका फैसला होगा। हां, वह भी फैसला देने के पहले आरोपों और उनसे जुड़े तथ्यों का अवलोकन करेगा।

जैसा हम जानते हैं भारतीय एजेंसियों की ओर से क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस या सीपीएस पैरवी कर रहा है। न्यायालय में सीपीएस के बैरिस्टर ने मामले को बिल्कुल स्पष्ट बताते हुए कहा था कि नीरव ने तीन साझेदारों वाली अपनी कंपनी एवं शेल कंपनियों के नाम से अरबों रुपए का बैंक घोटाला किया। नीरव पर मुख्य आरोप यही है कि उसने अपने मामा मेहुल चोकसी और बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में करीब 14 हजार करोड़ रुपए से भी अधिक के कर्ज की धोखाधड़ी की। उस पर सीबीआई और ईडी बैंक घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराधों के मामले दर्ज कर कार्रवाई कर रही है। वैसे उसके खिलाफ कई और मामले दर्ज हो चुके हैं। उसकी अनेक संपत्तियों को जब्त भी किया जा चुका है। उसके खिलाफ रेड कौर्नर नोटिस जारी हुआ। फोर्ब्स ने 2017 में नीरव मोदी की कुल संपत्ति 180 करोड़ डॉलर (करीब 11, 700 करोड़ रुपए) आंका था। पता नहीं इसमें कितना अंश लूट और घोटालों का था। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में जब अनेक अधिकारी - कर्मचारी नप चुके हैं तो इसके मुख्य आरोपी को किसी तरह देश के अंदर कानून के कठघरे में खड़ा करना ही होगा। भारत के पक्ष की सबलता का ही प्रमाण था कि नीरव मोदी को 19 मार्च 2019 को गिरफ्तार कर लंदन की वांड्सवर्थ जेल में डाला गया। उसने जमानत की नीचे से ऊपर तक के न्यायालयों में लगातार कोशिश की। न्यायालय से 40 लाख पाउंड की जमानत पर घर में नजरबंद करने का आग्रह किया इसे भी अस्वीकार कर दिया गया। कल्पना कीजिए अभी भी उसके पास कितनी संपत्ति है। भारत ने जमकर लड़ाई लड़ी। इसका परिणाम है कि उसे जमानत नहीं मिली।

हालाँकि यह सब आसान नहीं था। उसे बचाने की इतनी कोशिशें हुई जिनकी हम आप कल्पना भी नहीं कर सकते। उसके गवाह के तौर पर उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभय थिप्से तक पेश हुए। उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक रंग देते हुए यह साबित करने का प्रयास किया था कि सत्तारूढ़ पार्टी ने एजेंडा के तहत मीडिया में लीक कर इसे बड़ा बनाया। नीरव मोदी के साथ भारत में न्याय नहीं हो सकता इसे साबित करने के  लिए इन दोनों पूर्व न्यायाधीशों ने भारतीय न्यायिक प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया था। वेस्टमिंस्टर न्यायाधीश ने इन दोनों पूर्व भारतीय न्यायाधीशों की कड़ी निंदा की। उन्होंने लिखा कि मैं न्यायमूर्ति काटजू की विशेषज्ञ राय को काफी कम तवज्जो देता हूं। वे अपने पूर्व वरिष्ठ न्यायिक सहकर्मियों के प्रति असंतोष से भरे थे। उनकी गवाही के कुछ हिस्से हैरान करने वाले, अनुचित और पूरी तरह और असंवेदनशील हैं। उनकी बातचीत में निजी एजेंडा झलक रहा था। थिप्से के बारे में न्यायाधीश ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद वे कांग्रेस से संबद्ध हो गए जिसके कारण उनकी आलोचना भी हुई। कल्पना की जा सकती है कि भारतीय एजेंसियों को कितनी चुनौतियां मिली होंगी। ये सब अभी भी नीरव के भारत के उच्च वर्ग में व्याप्त प्रभाव का साक्षात प्रमाण है। किन्तु अंततः यह सब भारत के पक्ष में जाता है। न्यायालय ने यह भी माना है कि नीरव मोदी ने सबूतों को नष्ट करने और गवाहों को डराने की साजिश रची। यह किसी भी आरोपी की अपराध में संलिप्तता के संदेहों को पुख्ता करता है। आरोपी को जेल में रखने का भी यह सबसे बड़ा आधार होता है। हर ईमानदार भारतीय चाहता है कि नीरव और उसके जैसे विदेश भागे घोटालेबाजों को भारत लाकर सजा दिलाई जाए। भारत की दृढ़ता तथा योजनापूर्वक मुकदमा लड़ने से धीरे-धीरे ज्यादातर भगोड़ों को भारत लाए जाने की संभावना प्रबल हो रही है। एंटीगुआ से प्रत्यर्पण संधि न होने के बावजूद मेहुल चौकसी पर शिकंजा कस चुका है। विजय माल्या का मामला काफी आगे बढ़ चुका है। संदेसरा बंधुओं से लेकर वीडियोकॉन के कोचर आदि भी भारत के कानूनी लड़ाई में पस्त हो रहे हैं।

अवधेश कुमार, ईरू30, गणेश नगर, पांडव नगर कौम्प्लेक्स, दिल्ली रू110092, मोबाइल रू9811027208, 8178547992


शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2021

चीन का कबूलनामा हमारे लिए सबक

अवधेश कुमार

तो चीन ने भी सार्वजनिक तौर पर यह कबूल कर लिया है कि पिछले साल 15-16 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान में हुए संघर्ष में उसके जवानों की भी मौत हुई थी।  न केवल वहां के सरकारी समाचार पत्रों बल्कि चीनी सेना के पत्र में भी इसका जिक्र किया गया है। पीपुल्स डेली और ग्लोबल टाइम्स में इसकी चर्चा करते हुए इन जवानों को मरणोपरांत पदक देने की खबर छपी है । इनके अनुसार केंद्रीय सैन्य आयोग ने काराकोरम पर्वत पर तैनात रहे पांच चीनी सैनिकों के बलिदान को याद किया है और सम्मानित भी किया है। मारे गए चीनी सैनिकों का नामा भी सार्वजनिक किया गया है। ये हैं-  पीएलए शिनजियांग मिलिट्री कमांड के रेजीमेंटल कमांडर क्यूई फबाओ, चेन होंगुन, जियानगॉन्ग, जिओ सियुआन और वांग ज़ुओरन। ग्लोबल टाइम्स ने पीएलए यानी सेना की डेली रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि गलवान खूनी संघर्ष में उसके चार सैनिक मारे गए थे, जबकि एक की मौत गलवान के खूनी झड़प में बचाव कार्रवाई के समय नदी में बहने से हुई थी।

उस संघर्ष में भारतीय सेना के एक कर्नल समेत 20 जवान शहीद हो गए। भारत ने इसे स्वीकार करने में कभी हिचक नहीं दिखाई। चीन ने देर से अपने सैनिकों के मारे जाने की बात कबूल की लेकिन अब भी वह सच बोलने के लिए तैयार नहीं है। केवल भारत नहीं, दूसरे देशों से आई रिपोर्टों में भी चीनी सैनिकों के ज्यादा संख्या में हताहत होने की बात थी। भारत ने अपनी सेना से प्राप्त जानकारी के आधार पर माना था कि चीन के 40 से अधिक सैनिक गलवान संघर्ष में मारे गए थे।  हाल ही में रूसी सामाचार एजेंसी तास ने भी बताया कि गलवान घाटी झड़प में कम से कम 45 चीनी सैनिक मारे गए थे। तब अमेरिका ने भी अपनी जानकारी के आधार पर यह कहा था  कि भारतीय सैनिकों के साथ झड़प में चीन के भी 40 से ज्यादा जवान मारे गए। और भी कई रिपोर्ट में इसी के आसपास संख्या दी गई थी। जो लोग भारत के लिए एकतरफ़ा जन क्षति की बात कर रहे थे वे अब इतना अवश्य मानेंगे कि हमारे निहत्थे जवानों ने अदम्य वीरता और शौर्य का परिचय दिया। अपनी जानें दी, पर चीनियों को भी छोड़ा नहीं।

हमारे देश में गलवान की खूनी झड़प के बाद से ही एक बड़ा तबका  भारत की रक्षा नीति और चीन से निपटने के तौर तरीकों पर सवाल उठाता रहा है। इनमें चीन का विरोध करने की जगह भारत सरकार की आलोचना ज्यादा है। यह बात अलग है कि परोक्ष रूप से यह आलोचना सरकार की बजाय सेना की हो जाती है। आखिर सेना ही तो सीमा पर मुकाबला  करती है। चीन ने अपने सैनिकों की लड़ाई की चर्चा करते हुए जो कुछ कहा है उन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसमें चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग ने अपने अनुसार गलवान झड़प की कहानी बताई है। आयोग ने सभी दिवंगतों को हीरो का दर्जा दिया है। इनमें शिनजियांग मिलिट्री कमांड के रेजिमेंटल कमांडर क्यूई फेबाओ को हीरो रेजिमेंटल कमांडर फॉर डिफेंडिंग द बॉर्डर, चेन होंगजुन को हीरो टु डिफेंड द बॉर्डर, तथा चेन जियानग्रॉन्ग, जियाओ सियुआन और वांग जुओरन को फर्स्ट क्लास मेरिट का दर्जा दिया गया है। इनको पुरस्कृत करते हुए गलवान की कहानी में कहा गया कि नियंत्रण रेखा पर भारत ने ही बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया था। यह भी कहा गया कि भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों को पीछे हटाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान चीनी सैनिकों ने स्टील ट्यूब, लाठियों और पत्थरों के हमलों के बीच देश की संप्रभुता की रक्षा की। तो चीनी सेना उस खूनी झड़प के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा रहा है। उसने कहा कि अप्रैल 2020 के बाद से विदेशी सेना यानी भारतीय सेना ने पिछले समझौते का उल्लंघन किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा का उल्लघंन कर सड़क और पुलों का निर्माण किया। जानबूझकर सीमा पर अपनी स्थिति को बदलते हुए संवाद के लिए भेजे गए चीनी सैनिकों पर हिंसक हमला किया। उसे अपनी सेना का महिमामंडन करना है। तो उसने कहा कि मई 2020 में भारतीय सेना के उकसावे का सामना करते हुए चेन जियानग्रॉन्ग और दूसरे चीनी सैनिकों ने संघर्ष किया और उन्हें लौटने के लिए मजबूर किया। इसमें चेन डायरी का एक अंश भी उद्धृत किया गया है। इसके अनुसार जब दुश्मनों ने हमारा सामना किया, तो हममें से कोई भी नहीं भागा। उनके पत्थर के हमलों के बीच, हमने उन्हें दूर तक धका दिया।


हालांकि यह सफेद झूठ है। जैसा हम जानते हैं गलवन घाटी में झड़प उस वक्त हुई थी जब नियंत्रण रेखा पर उपस्थिति की निर्धारित, मान्य और परंपरागत जगह से चीनी सेना के आगे आ जाने के बाद भारतीय सेना उनको पीछे हटने के लिए कहने गई थी। इसी दौरान चीनी सैनिकों ने कंटीले तार लगी हुई लोहे की रॉड, पत्थरों आदि से भारतीय सैनिकों पर हमला बोल दिया था। यह आमने-सामने की अत्यंत ही भयानक लड़ाई थी। इसमें हमारे कर्नल संतोष बाबू सहित 20 जवान शहीद हो गए थे। वहां से जीवित वापस लौटे जवानों ने इसकी पूरी कहानी बयान की।  कैसे चीनी सैनिकों ने धोखा देकर बर्बर और वहशी तरीके से उन पर हमला किया.... इन लोगों ने किस तरह से उसका जवाब दिया... कैसे उनको पीछे हटने को भागने को मजबूर किया और कैसे उनके सैनिक भी हताहत हुए इनकी सारी कहानी जवानों ने बताई। इनका महत्व होते हुए भी भारतीय के नाते मुख्य बात दूसरी भी है। हम अपने ही देश पर आरोप लगा रहे थे कि चीन दुस्साहस करके अपने क्षेत्र से आगे बढ़ता रहा, समझौते का उल्लंघन करता रहा और हमने उसको रोकने और पीछे धकेलने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। चीनी सेना द्वारा अपने सैनिकों के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में जो विवरण दिया गया है वह ठीक दूसरी बात करता है। वह कहता है कि भारत ने ही ऐसा किया। यही महत्वपूर्ण बात है। चीन पहले यह मानने को ही तैयार नहीं था कि उसके सैनिक भी मारे गए हैं। इसके आधार पूरी तस्वीर ऐसी बनाई गई मानो चीन बेरोकटोक हमारी सीमा में घुस गया, हमारे सैनिकों पर हमला कर दिया, उनको मारा और उसे जवाब नहीं मिला। अब जब समझौते के साथ चीन की सेना और लाव लश्कर मई 2020 की स्थिति में जा रही है तथा प्रक्रिया जारी रहने के बीच जो कुछ सच आ गया है उनसे साफ है कि भारत ने हर स्तर पर चीन को कई बार आगे बढ़ कर करारा जवाब दिया। इन जवाबों का ही परिणाम है कि योजनाबध्द धोखेबाजी की रणनीति की विफलता के बाद चीन पीछे हटने को मजबूर हुआ है।

चीन चाहे आर्थिक और सैन्य स्तर पर जितना शक्तिशाली हो जाए विश्व में उसकी साख और विश्वसनीयता भारत के समक्ष अत्यंत निचले पायदान पर है। भले चीन के विरुद्ध कोई देश खुलकर भारत के साथ खड़ा न हो  विश्व के अधिकतर देशों ने भारत की बातों पर विश्वास किया। जब चीन आज पांच सैनिकों के मारे जाने की बात कर रहा है तब भी विश्व समुदाय का प्रश्न यही है कि आपने इतनी देर क्यों की? चीन के इस खुलासे को संपूर्ण सच मानने के लिए दुनिया तैयार नहीं है। हम भारत के लोगों के लिए यह एक सबक है। यानी अपने देश, अपनी सेना की ताकत पर विश्वास करें... आत्महीनता से ग्रसित नहीं हो । चीन जैसे देशों से हमारा टकराव आज का नहीं है और ना यह आसानी से खत्म होने वाला है। उससे निपटने के लिए जिस बात की सबसे ज्यादा जरूरत है वह है अपने देश पर विश्वास और आपसी एकजुटता। हम तात्कालिक घटनाओं के एकपक्षीय आकलन पर विश्वास कर अपने देश, अपनी सरकार अपनी सेना को कटघरे में खड़ा करने की होड़ मचाने से बचें। अगर थोड़ा धैर्य रखें तो परिणाम वैसा ही आएगा जैसा हम चाहते हैं। आज चीनी सैनिक ज्यादातर स्थानों से अपने पूर्व स्थान तक वापस जा चुके हैं, जहां हैं वहां से वापस जा रहे हैं और यह मान रहे हैं कि उनके सैनिक भी मारे गए। भले ही कम संख्या बताकर इसे उन्होंने कबूल कर लिया है। भारत की सही रणनीति की सफलता का इससे बेहतर प्रमाण और कुछ नहीं हो सकता है।

अवधेश कुमार, ईरू30, गणेश नगर, पांडव नगर कौम्प्लेक्स, दिल्लीरू110092, मोबाइलरू9811027208, 8178547992


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