रविवार, 13 दिसंबर 2020

हैदराबाद परीक्षण में भाजपा के सफल होने के मायने

अवधेश कुमार

भाजपा ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम में 48 सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन या एआईएमआईएम को 44 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर सिमटा देगी तथा सत्तारुढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति या टीआरएस 55 सीटों तक सीमित रहकर बहुमत से वंचित रह जाएगी इसकी उम्मीद कम ही लोगों को रही होगी। आखिर एक्ज्टि पोलों में भी टीआरएस को बहुमत मिलता दिखाया गया था। ध्यान रखिए 2016 में टीआरएस 150 में से 99 वॉर्ड जीतकर बहुमत प्राप्त किया था, जबकि एआईएमआईएम 44 सीटें तथा भाजपा को केवल चार सीटेें मिलीं थीं। चार से 48 की उछाल सामान्य नहीं है।  वोट के अनुसार भाजपा टीआरएस से केवल 0.25 प्रतिशत वोट पीछे है। अगर भाजपा को सिर्फ 8500 वोट और मिलते तो वह पहले स्थान पर होती।  2016 में टीआरएस को कुल 14,68,618 वोट मिले थे। इस बार यह घटकर 12,04,167 रह गया। तब भाजपा को केवल 3,46,253 वोट मिला था। इस उसके वोटों की संख्या है,11,95,7112016 में उसे 10.34 प्रतिशत वोट मिला था जबकि इस बार 34.56 प्रतिशत। यह असाधारण छलांग है। हालांकि ओवैसी का वोट 2016 में 15.85% से बढ़कर 18.28% हो गया है। इसका कारण मुस्लिम मतों का उसके पक्ष में ध्रुवीकरण है। वास्तव में भाजपा ने जिस तरह ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम का चुनाव लड़ा वो बहुत लोगों को हैरत में डालने वाला था। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं अमित शाह के नेतृत्व मंे हर चुनाव को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में लड़ना भाजपा का स्वभाव बन चुका है इसके पीछे उसका स्पष्ट राजनीतिक लक्ष्य होता है। इस तरह हैदराबाद नगर निगम चुनाव को वर्तमान भाजपा के स्वभाव के अनुरुप माना जा सकता है। किंतु नहीं। यहीं तक सीमित कर देने से इसका व्यापक परिप्रेक्ष्य ओझल हो जाएगा। प्रश्न है कि भाजपा के राजनीतिक लक्ष्य थे क्या?

चुनाव प्रचार के दौरान अपनाए गए तेवरों तथा परिणाम के बाद आ रहीं प्रतिक्रियाओं से इसे काफी हद तक समझा जा सकता है। सच यह है कि हैदराबाद भाजपा के लिए उसकी अपनी दृष्टि में अनेक अन्य ऐसे चुनावों से परे व्यापक राजनीतिक महत्व वाला था। चुनाव अभियानों ने इसे काफी हद तक स्पष्ट कर दिया था अब परिणामों ने उनको और पुष्ट किया है। स्वयं गृह मंत्री अमित शाह, योगी आदित्यनाथ, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर जैसे नेताओं को भाजपा ने उतारा, भूपेन्द्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया तथा दक्षिण के उभरते युवा नेता तेजस्वी सूर्या सहित अनेक नेताओं को वहां केन्द्रित कर दिया तो यह यूं ही नहीं था। महाराष्ट्र मूल के लोगों को खींचने के लिए जावडेकर के अलावा देवेंद्र फडणवीस तक को बुलाया गया। अमित शाह एवं आदित्यनाथ तक ने रोड शो किया। अगर हैदराबाद एवं तेलांगना तक सीमित होकर विचार करें तो भाजपा को भी पता था कि उसे बहुमत नहीं मिलेगा, किंतु वर्तमान प्रदर्शन उसे संतुष्ट करने वाला है तथा इससे भविष्य के लिए उम्मीद काफी बढ़ गई है। भाजपा के प्रदेश प्रमुख बी संजय कुमार ने इसे भगवा हमला कहा है। अन्य नेताओं के बयानों में भी आपको टीआरएस का विकल्प होने के दावों के साथ हिन्दुत्व के मुद्दे तथा ओवैसी का उल्लेख मिल रहा है।ं

वास्तव में भाजपा के लिए यह स्थानीय यानी हैदराबाद से लेकर तेलांगना तथा दक्षिण मंे विस्तार के साथ वैचारिक और राजनीतिक तौर पर राष्ट्रव्यापी संदेश की दृष्टि से महत्व को समझना होगा। ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम देश के सबसे बड़े नगर निगमों में से एक है। इसका सालाना बजट 6 हजार 150 करोड़ रुपए का है। इसकी आबादी तकरीबन 80 लाख है, जिसमें से 40 प्रतिशत से ज्यादा आबादी मुस्लिम है। इसमें हैदराबाद, रंगारेड्डी, मेडचल-मल्काजगिरि और संगारेड्डी समेत 4 जिलंे आते हैं। विधानसभा की 24 और लोकसभा की 5 सीट आती है। असदुद्दीन ओवैसी यहीं से लोकसभा सांसद हैं। प्रदेश की राजनीति के लिए इसका महत्व समझने में अब कठिनाई नहीं होनी चाहिए। हालांकि राजनीतिक तौर पर तेलांगना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर नरेन्द्र मोदी सरकार के साथ खड़े नजर आते हैं, संसद में सहयोग करते हैं, पर वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भाग नहीं हैं। तेलांगना में भाजपा का आधार वर्षों पुराना है। संयुक्त आंध्र का के इस इलाके से उसे सीटें मिलतीं थीं। हैदराबाद प्रदर्शन पर पार्टी का बयान है हम टीआरएस का विकल्प बनकर उभर रहे हैं। वैसे भी कांग्रेस और तेदेपा का जनाधार नेस्तनाबूद होने के बाद भाजपा के लिए स्थान बनता है। तो तय मानिए हैदराबाद नगर निगम के साथ भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव के लिए प्रयाण कर दिया है। भाजपा टीआरएस के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगी। टीआरएस कह रही है कि तेलांगना केवल हैदराबाद नहीं है, लेकिन यह मोदी और शाह की भाजपा है जो रुकना और बैठना या स्थिर रहना नहीं जानती वह हैदराबाद को प्रदेश के कोने-कोने में विस्तारित करने की योजना पर काम कर रही होगी। चुनाव प्रचार में भाजपा नेता लगातार ओवैसी और टीआरएस के बीच अंदरुनी अपवित्र गठबंधन का आरोप लगाते रहे। वे प्रश्न उठाते थे कि आखर एआईएमआईएम ने केवल 51 उम्मीदवार ही क्यों उतारे? यह प्रचार वह आगे भी जारी रखेगी। ध्यान रखिए, 2018 में तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ एक सीट और 7.1 प्रतिशत मत मिला था। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में उसने चार सीटों पर कब्जा करने के साथ 19.45 प्रतिशत मत प्राप्त किए। अभी पिछले नवंबर में दुब्बाक विधानसभा उपुचनाव में उसने अप्रत्याशित विजय प्राप्त की। उस चुनाव में भाजपा ने टीआरएस और ओवैसी की पार्टी के बीच अंदरुनी गठबंधन को प्रचार का प्रमुख हथियार बनाया था। इसका असर हुआ। कांग्रेस की दुर्दशा में हो क्या सकता है? कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में गठबंधन के कारण उसे 21 सीटें मिलीं थीं। लोकसभा चुनाव में भी उसे तीन सीटें एवं 29.48 प्रतिशत मत ले थे।

वैसे भी अगर नगर निगम के चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे तथा हिन्दुत्व का अपेक्षित असर हो सकता है तो विधानसभा में क्यों नहीं। भाजपा दक्षिण के राज्यों में जहां संभव है वहां अकेले नही ंतो दलों के गठबंधन से अपने विस्तार की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। कुछ ही समय पहले अमित शाह ने चेन्नई की यात्रा की और वहां अन्नाद्रमुक तथा कुछ अन्य दलों के साथ मिलकर मजबूती से चुनाव लड़ने का सीधा संदेश दिया। केरल में वह दिन रात एक कर रही है तथा उसका मत जिस तरह बढ़ रहा है उसमें आश्चर्य नहीं आने वाले समय में वह प्रदेश की एक सशक्त पार्टी बन जाए। इसी से भाजपा की दृष्टि में इसके राष्ट्रीय फलक की प्रतिध्वनि सुनाई देने लगती है। ओवैसी केवल एक लोकसभा सीट जीतते हैं, पर वे देश में मुसलमानों के सबसे मुखर तथा कट्टर नेता के रुप में उभर चुके हैं। ओवैसी आक्रामक मुस्लिमवाद के प्रतीक बन चुके हैं और उनके विरोधी उन्हें मोहम्मद अली जिन्ना का अवतार घोषित करते हैं। हैदराबाद के उनके गढ़ में भाजपा नेताआों द्वारा खुलेआम उनका नाम लेकर चुनौती देने का असर राष्ट्रव्यापी असर होना निश्चित है। भाजपा यह संदेश देने में सफल है कि ओवैसी और उनके समर्थकों को चुुनौती देकर काबू करने में वही सफल हो सकती है। यह संदेश वाकई निकल रहा है कि अगर आवैसी के प्रभाव विस्तार को रोकना है तो भाजपा का समर्थन करना ही होगा। योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह ओवैसी पर हमला किया, फेैजाबाद को अयोध्या तथा इलाहाबाद को प्रयागराज करने की तर्ज पर सत्ता में आने के बाद हैदराबाद को भाग्यनगर करने का वायदा किया वह भाजपा की ऐसी रणनीति है जिससे उसका जनाधार देशव्यापी मजबूत होगा। स्थानीय मुद्दों को साइड किया और राष्ट्रवाद का मुद्दा उठाया। नगर निगम के चुनाव अक्सर बिजली, पानी, सड़क, कूड़ा-करकट जैसे स्थानीय मुद्दे गौण रहे तथा राष्ट्रीय और हिन्दुत्व की ध्वनि गूंजती रही। सर्जिकल स्ट्राइक, जम्मू कश्मीर से 370 का अंत, बांग्लादेशी घुसपैठिए, रोहिंग्या सब थे। तेजस्वी सूर्या कहते थे कि ओवैसी भाइयों ने तो केवल रोहिंग्या मुसलमानों का विकास करने का काम किया है। ओवैसी को वोट भारत के खिलाफ वोट है।

 इसकी प्रतिध्वनि आपको आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव तथा आगे तमिलनाडु, केरल तक सुनाई पड़ेगी। पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए ममता बनर्जी बहुत बड़ी अवरोध हैं पर इसने प्रदेश को अपना एक किला बना देने के लिए पूरी शक्ति लगा दिया है। हैदराबाद की विजय ने भाजपा के अंदर आत्मविश्वास और उत्साह परवान चढ़ा दिया है। इसका असर उसके चुनावी व्यवहार में दिखाई देगा। हैदराबाद के नुस्खे पूरी शक्ति से बंगाल में आजमाए जाएँगे। वहां 29 प्रतिशत मुसलमानों के कारण ओवैसी भी कूद रहे हैं। तो वहां चुनाव अभियान में हैदराबाद आएगा ही। ओवैसी भाजपा के लिए बिन मांगे वरदान जैसा साबित हो रहे हैं। तो तैयार रहिए अभी से पूरे पश्चिम बंगाल में हैदराबाद की गूंज ज्यादा प्रभावी तरीके से सुनने के लिए।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कौम्प्लेक्स, दिल्ली - 110092


सोमवार, 30 नवंबर 2020

किशन यादव को सर्वसम्मति से दुबारा डेसू मजदूर संघ का प्रेसिडेंट चुना गया

संवाददाता

नई दिल्ली। भारतीय मजदूर संघ के अजमेरी गेट, नई दिल्ली के ऑफिस में किशन यादव को सर्वसम्मति से डेसू मजदूर संघ का अध्यक्ष चुना गया। भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध डेसू मजदूर संघ का पंजीकरण संख्या 1336 है।
डेसू मजदूर संघ की कार्यकारिणी की बैठक भारतीय मजदूर संघ के अजमेरी गेट, नई दिल्ली के ऑफिस में हुई जिसकी अध्यक्षता डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव ने की। इस बैठक की शुरुआत पुरानी कार्यकारिणी को भंग करके की गई और सभी कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव दुबारा चुनाव द्वारा हुआ। इसमें सर्वसम्मति से चुनाव अधिकारी के लिए भारतीय मज़दूर संघ के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह नागर का नाम रखा गया व इनके साथ ही प्रदेश महामंत्री अवनीश मिश्रा और लीगल सेल के बी एस रावत उपस्थित रहे जिनकी देखरेख में सर्वसम्मति से निम्न पदाधिकारियों का चयन किया गया।
किशन यादव (बीवाईपीएल) को प्रेसिडेंट, मुकेश कुमार भारद्वाज (बीवाईपीएल) को वर्किंग प्रेसिडेंट, विजय कुमार (बीवाईपीएल) व के.आर. मीणा (बीआरपीएल) को वाइस प्रेसिडेंट, सुभाष चंद (बीआरपीएल) को जनरल सेक्रेटरी, हंस राज (बीवाईपीएल) को सेक्रेटरी, अनिल यादव (बीवाईपीएल) व राजवंत (बीआरपीएल) को ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी, अजीत कुमार  (बीवाईपीएल) को जॉइंट सेक्रेटरी, जितेंद्र कुमार  (बीवाईपीएल) को ऑफिस सेक्रेटरी, आर. बी. भारती (बीआरपीएल) को लीगल सेक्रेटरी, अरुण बंसल (बीवाईपीएल) को प्रेस सेक्रेटरी और सुभाष पाल (बीवाईपीएल) को कोषाध्यक्ष चुना गया।
इस चुनाव के बाद बैठक में कुछ प्रस्ताव पास किये गए जैसे 1. दिल्ली की पाँचो कंपनियों में काम करने वाले सभी डे्सू मजदूर संघ यूनियन की सदस्यता ग्रहण कर सकता है  जिसमें एएमसी के कर्मचारी, आऊटसोर्स  के कर्मचारी, एचआरएमएस के कर्मचारी, एसएलए के कर्मचारी, डाइवर कर्मचारी, सफाई कर्मचारी, जीपीए कर्मचारी। 2. पांचों बिजली कंपनियों में काम करने वाले ठेका कर्मचारियों को पक्का किया जाए, इसकी पूरी कोशिश की जाएगी। 3. करूण मूलक आधार पर आश्रितों के बच्चों को नौकरी पर रखा जाए। 4. जिस कर्मचारी को मिनियम वेज नहीं मिल रहा है उस कर्मचारी को मिनियम वेज दिलाना है आदि।
इस मौके पर आउटसोर्स  जनरल बॉडी मेंबर्स डेसू मजदूर संघ आउटसोर्स  महामंत्री ऋषि पाल, आउटसोर्स संगठन मंत्री सैन्तुल त्यागी, आउटसोर्स ज्वाइंट सेक्रेट्री अब्दुल रज्जाक, सहयोगी मेंबर्स संजय शर्मा, उमेश कुमार इत्यादि भी मौजूद थे।







गुरुवार, 5 नवंबर 2020

शास्त्री पार्क में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान का जोरदार स्वागत किया

 संवाददाता

नई दिल्ली। गांधी नगर विधानसभा के शास्त्री पार्क वार्ड ई-25 के कादरी मस्जिद, शास्त्री पार्क क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की एक बैठक हुई इसमें मुख्य अतिथि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान थे व गांधीनगर विधानसभा के मनोनीत निगम पार्षद हसीबुल हसन उर्फ राजू भी मौजूद थे।
यह बैठक समाजसेवी फैजी खान उर्फ बबली भाई की दुकान के बाहर हुई। इस मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान व गांधीनगर विधानसभा के मनोनीत निगम पार्षद हसीबुल हसन उर्फ राजू  का
फूलमालाओं से स्वागत करते हुए दोनों अतिथियों का बैठक में आने के लिए शुक्रिया अदा किया। फैजी खान उर्फ बबली भाई बता कि इस बैठक को करने का मकसद सिर्फ इतना था कि आज हमारे समाज के लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं है कि हम अपने अधिकारों के लिए कहां जा सकते हैं या किससे मदद ले सकते हैं। इसलिए हमने आज चेयरमैन जाकिर खान साहब को बुलाया है जो आयोग के अंतर्गत हमारे अधिकारों से हमें जानकारी देंगे। क्षेत्र की कुछ समस्याओं के लिए हमने अपने मनोनीत निगम पार्षद हसीबुल हसन को बुलाया है। वह भी हमारी परेशानी को दूर करेंगे।
समीर मंसूरी ने कहा कि हम सभी मुख्यमंत्री केजरीवाल का शुक्रिया अदा करते हैं कि उनकी परखी नजर ही है जिन्होंने जाकिर खान जैसे जमीनी स्तर के व्यक्ति को अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया जो समाज कि हर तकलीफ को समझते हैं और उनके बीच जाकर उनका हल निकालने की कोशिश करते हैं।
समाजसेवी मारूफ अली ने बताया कि बुलंद मस्जिद कालोनी में आयोग की ओर से एक डिस्पेंसरी का काम काफी लंबे समय तक हुआ और लगभग डिस्पेंसरी तैयार है पर उसका काम बीच में ही रुक गया है। चैयरमेन साहब इस ओर ध्यान दें ताकि लोगों को इलाज के लिए कहीं ओर न जाना पड़े।
इस पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान ने कहा कि इसके बारे में मैं पता करता हूं और किस कारण यह काम रुका हुआ है। मैं कोशिश करूंगा कि यह जल्द चालू हो जाए। उन्होंने अल्पसंख्यकों के लिए आयोग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से अवगत करवाया और भरोसा दिलाया कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग आपकी हर परेशानी में आपके साथ है। उन्होंने कहा कि आप जब चाहें मेरे ऑफिस आ सकते हो या मुझे बुला सकते हो। दिल्ली सरकार की कई सारी योजना अल्पसंख्यकों के लिए बनी है उनको भी दिलावाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। उन्होंने ने आगे कहा कि मैं आपको बता दूं कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग छह अल्पसंख्यकों समुदाय के लिए काम करता है जैसे मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन ओर पारसी। इसलिए आप की परेशानी में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग आपकी पूरी मदद की जाएगी।
गांधीनगर विधानसभा के मनोनीत निगम पार्षद हसीबुल हसन उर्फ राजू ने कहा कि मुझे कुछ समस्याओं से अवगत करवाया गया है जिसे जल्द दूर कर दिया जाएगा। मैं आपकी परेशानी में आपके साथ खड़ा हूँ आपकी परेशानी मेरी परेशानी है। आप कभी भी मुझे बुलाएं या फोन कर दें आप लोगों की समस्याओं पर जल्द से जल्द कार्य शुरू होगा और कार्य पूरा होने के बाद आपको सूचित भी कर दिया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि मैं आप सभी लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि विधानसभा में जितनी भी दिक्कत आ रही है उनको भी जल्द से जल्द दूर किया जाएगा और वादा किया आयोग के साथ मिलकर काम करेंगे। सरकार से मिलने वाली सभी स्कीम घर-घर पहुंचाएंगे।
इस कार्यक्रम में समाजसेवी नियाज अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। इस बैठक में समीर मंसूरी, रिजवान बेकरी वाले, सिद्दीक भाई, मारूफ अली, दीपक जैन उर्फ दीपक हिन्दुस्तानी, शमीम कुरैशी व समाज के वरिष्ठ लोगोंं ने हिस्सा लिया।

 

 


बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

डेसू मजदूर संघ ने श्रम कानून में बदलाव के विरोध में भारतीय मजदूर संघ का समर्थन किया

संवाददाता
नई दिल्ली। नए श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए भारतीय मजदूर संघ(बीएमएस) ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से कानूनों में उचित बदलाव की मांग की। इस विरोध प्रदर्शन में भारतीय मजदूर संघ का डेसू मजदूर संघ ने समर्थन किया। भारतीय मजदूर संघ का आरोप है की सभी लेबर कोड बिल में बदलाव की जो मांग उन्होंने संसद की स्थाई समिति के सामने रखी थी, उसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया। इन विरोध प्रदर्शनों के जरिए उन्होंने सरकार को यह संदेश दिया है कि उसने श्रम सुधारों के जरिए मजदूरों के साथ अन्याय किया है। सरकार ने मजदूरों को दिए गए वायदों को तोड़ा है। 

डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव का कहना है कि यह श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन है और इस नए संशोधन द्वारा श्रमिक कानून को कमजोर बना दिया गया है।
उन्होंने कहा है कि कोरोना संकट के बीच जहां मजदूरों के लिए सरकार को काम करना चाहिए था तो वहीं नया श्रमिक कानून बना कर मजदूरों की जिंदगी को खतरे में डाला जा रहा है। लॉकडाउन के बाद वैसे ही मजदूरों की दशा पहले ही दयनीय है उसे और दुखद बनाया जा रहा है।भारतीय मजदूर संघ के दिल्ली प्रांत के महामंत्री अनीश मिश्रा ने बताया कि नए श्रम कानून में कई प्रावधान श्रमिक विरोधी हैं। पहले सौ श्रमिकों के होने के बाद किसी कंपनी को उनकी छंटनी करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़ाकर 300 तक कर दी गई है। इसका असर ये हुआ है कि लगभग सत्तर फीसदी कंपनियां अब इस दायरे से बाहर हो गई हैं और अब वे श्रमिकों के साथ मनमानी कर सकती हैं। आपको बता दें कि मानसून सत्र के आखिरी दिन संसद ने श्रम सुधार से जुड़े तीन बिलों को मंजूरी दे दी। इसके तहत कंपनियों को बंद करने के नियम में ढील दी गई है। विधेयक के प्रस्ताव के मुताबिक अधिकतम 300 कर्मचारियों वाली कंपनियों को बिना सरकार की इजाजत के लोगों को नौकरी से हटाने के अधिकार दिए गए हैं। वहीं 23 सितंबर को राज्यसभा ने कोड ऑफ ऑक्यूपेश्नल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड एंड सोशल सिक्योरिटी कोड को ध्वनिमत से पारित कर दिया। जबकि लोकसभा पहले ही मंगलवार (22 सितंबर) को इसे पारित कर चुका था। इस कानून का डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव, महामंत्री सुभाष चंद्र, अब्दुल रज्जाक, ऋषि पाल, सुभाष, शक्ति, सभाजीत पाल आदि मजदूरों ने इस कानून का विरोध किया। 





रविवार, 25 अक्टूबर 2020

किराड़ी विधानसभा में अल्पसंख्यकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की किराड़ी विधानसभा में अल्पसंख्यक समुदाय के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान थे व इस मौके पर स्थानीय विधायक ऋतुराज झा भी मौजूद थे।
इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हाजी महेंदी हसन ने किया। उन्होंने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान और किराड़ी विधानसभा के विधायक ऋतुराज का फूलमालाओं से स्वागत करते हुए दोनों अतिथियों का कार्यक्रम में आने के लिए शुक्रिया अदा किया। उन्होंने बता कि इस जागरूकता कार्यक्रम को करने का मकसद सिर्फ इतना था कि आज हमारे समाज के लोगों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं है कि हम अपने अधिकारों के लिए कहां जा सकते हैं या किससे मदद ले सकते हैं। इसलिए हमने आज के कार्यक्रम में चेयरमैन जाकिर खान साहब को बुलाया है जो आयोग के अंतर्गत हमारे अधिकारों से हमें जानकारी देंगे। क्षेत्र की कुछ समस्याओं के लिए हमने अपने विधायक जी को बुलाया है। वह भी हमारी परेशानी को दूर करेंगे।
इस पर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन जाकिर खान ने अल्पसंख्यकों के लिए आयोग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से अवगत करवाया और भरोसा दिलाया कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग आपकी हर परेशानी में आपके साथ है। उन्होंने कहा कि आप जब चाहें मेरे ऑफिस आ सकते हो या मुझे बुला सकते हो। दिल्ली सरकार की कई सारी योजना अल्पसंख्यकों के लिए बनी है उनको भी दिलावाने की हर संभव कोशिश की जाएगी। उन्होंने ने आगे कहा कि मैं आपको बता दें कि दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग छह अल्पसंख्यकों समुदाय के लिए काम करता है जैसे मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, बौद्ध, जैन ओर पारसी। इसलिए आप की परेशानी में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग आपकी पूरी मदद की जाएगी।

 किराड़ी विधानसभा के विधायक ऋतुराज ने कहा कि मुझे कुछ समस्याओं से अवगत करवाया गया है जिसे जल्द दूर कर दिया जाएगा। मैं आपकी परेशानी में आपके साथ खड़ा हूँ आपकी परेशानी मेरी परेशानी है। आप कभी भी मुझे बुलाएं या फोन कर दें आप लोगों की समस्याओं पर जल्द से जल्द कार्य शुरू होगा और कार्य पूरा होने के बाद आपको सूचित भी कर दिया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि मैं किराड़ी विधानसभा में रहने वाले सभी अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि विधानसभा में जितनी भी दिक्कत आ रही है उनको भी जल्द से जल्द दूर किया जाएगा और वादा किया आयोग के साथ मिलकर काम करेंगे। सरकार से मिलने वाली सभी स्कीम घर-घर पहुंचाएंगे।
उन्होंने मुख्यमंत्री केजरीवाल का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल जी परखी नजर ही है जिन्होंने जाकिर खान जैसे जमीनी स्तर के व्यक्ति को अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाया जो समाज कि हर तकलीफ को समझते हैं और उनके बीच जाकर उनका हल निकालने की कोशिश करते हैं।
इस कार्यक्रम में समाजसेवी नियाज अहमद उर्फ पप्पू मंसूरी ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया। इस कार्यक्रम में यासीन ख़ान, हुसैन बक्स मंसूरी, कारी समीम, हाफ़िज़ इकराम, कारी  सदरे आलम,  राकेश जैन, वाहिद सिद्दकी व समाज के वरिष्ठ लोगोंं ने हिस्सा लिया।
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