सोमवार, 7 सितंबर 2020

प्रश्नकाल की अवहेलना संसदीय प्रजातंत्र के मूल चरित्र की अवहेलना है

एल. एस. हरदेनिया

प्रश्नोत्तर काल संसदीय व्यवस्था की आत्मा होता है। प्रश्न पूछकर सांसद या विधायक सच पूछा जाए तो सरकार की मदद करते हैं।

आपातकाल के दौरान भी प्रश्नोत्तर काल सस्पेंड कर दिया गया था। सरकार के इस निर्णय के बाद हम सब पत्रकार तत्कालीन मुख्य सचिव श्री एस. सी. वर्मा से मिले थे। उन्होंने आपाताकाल के दौरान लिए गए दो  खतरनाक निर्णयों पर गंभीर चिंता प्रगट की थी। पहला निर्णय था विधानसभा के प्रश्नोत्तर काल का सस्पेंशन और दूसरा समाचारों पर सेंसर। उनका कहना था कि विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर एकत्रित करने के लिए बड़ी कवायद करनी होती है। इस कवायद के दौरान अन्य ऐसी जानकारियां भी मिल जाती हैं जिनसे आम आदमियों की समस्याओं का निराकरण हो जाता है।

इसी तरह समाचार पत्रों में प्रकशित समाचारों से मुझे दूरदराज की जगहों पर क्या हो रहा है इसका पता चल जाता है। उस समय सभी विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इन दोनों निर्णयों की कड़ी आलोचना की थी। आलोचना करने वालों में भारतीय जनता पार्टी की पूर्व अवतार भारतीय जनसंघ भी थी। आज भारतीय जनता पार्टी स्वयं वही कर रही है जिसकी उसने आलोचना की थी।

दुनिया की सबसे प्राचीन संसद ब्रिटेन की है। वहां की संसद का निचला सदन हाउस ऑफ़ कामन्स कहलाता है। इतिहास बताता है कि ब्रिटेन के लंबे संसदीय इतिहास में प्रश्नोत्तर काल केवल एक बार ही सस्पेन्ड हुआ है जो इसलिए सस्पेन्ड हुआ था क्यांेकि उस दिन वहां के संसद भवन पर बम गिरने की संभावना थी।

यद्यपि प्रश्नकाल सदन की सबसे महत्वपूर्ण कार्यवाही है इसके बावजूद कुछ अवसरों पर स्वयं विपक्षी सदस्य प्रश्नकाल को सस्पेन्ड करने की मांग करते हैं। ऐसी मांग वे इसलिए करते हैं ताकि वे एक अत्यधिक महत्वपूर्ण मुद्दा उठा सकें। इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि यदि विधायक मंत्री से कोई फेवर चाहते हैं और मंत्री उन्हें घास नहीं डालते तो विधायक कोई ऐसा प्रश्न पूछने का प्रयास करते हैं जिससे मंत्री महोदय की प्रतिष्ठा पर आंच आए।

मध्यप्रदेश विधानसभा के एक ऐसे अध्यक्ष थे जो किसी मंत्री पर दबाव बनाने के लिए किसी विधायक से एक विवादग्रस्त मुद्दा उठवाते थे। इन सब कमियों के बावजूद प्रश्न पूछना सांसदों या विधायकों के हाथ में एक जबरदस्त हथियार है जिसका उपयोग वे जनहित में कर सकते हैं।

कभी-कभी  सभी की सहमति से प्रश्नकाल सस्पेंड किया जाता है। जैसे सन् 1962 में चीनी आक्रमण के समय और आजादी की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र आदि।

हमारे प्रदेश की विधानसभा के अनेक ऐसे सदस्य रहे हैं जिन्हें प्रश्न पूछने की कला पर जबरदस्त पकड़ थी। ऐसे कुछ विधायक मुझे बरबस याद आ रहे हैं। इस तरह के विधायकों में सबसे पहले मोतीलाल वोरा याद आते हैं। वोराजी सुबह जल्दी उठकर उस स्थान पर पहुंच जाते थे जहां हाकर उनके हिस्से के समाचार पत्र एकत्रित करते थे। उस समय वह स्थान न्यू मार्केट के काफी हाउस के सामने था। वोराजी समाचार पत्र खरीदकर उनमें छपी महत्वपूर्ण खबरों के आधार पर हाथ से लिखकर प्रश्न विधानसभा सचिवालय में पहुंचा देते थे।

इस तरह वे लगभग प्रतिदिन विधानसभा की कार्यवाही पर छाए रहते थे। ऐसे अन्य विधायक बाबूलाल गौर, लक्ष्मीकांत शर्मा और बसंतराव उईके थे। प्रक्रिया के नियमों के अनुसार तारांकित प्रश्न पर पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ऐसे में कभी-कभी ऐसा होता था कि एक ही प्रश्न पर इतने पूरक प्रश्न पूछे जाते थे कि प्रष्नकाल का पूरा समय एक ही प्रश्न  पूरक प्रश्नों में निकल जाता था।

जहां प्रश्न पूछना एक कला है वहीं प्रश्न का जवाब देना मंत्री की क्षमता को मापने का आधार है। विशेषकर पूरक प्रश्न के उत्तर से मंत्री की उत्तर देने की क्षमता प्रदर्शित होती है। एक दिन बसंतराव उईके एक प्रश्न के उत्तर में इतनी जानकारी लेकर आए थे कि विधायकों ने कहा कि बस इससे ज्यादा जानकारी नहीं चाहिए। ऐसे ही एक मंत्री बाबू तख्तमल जैन थे।

कभी-कभी प्रश्न काल के दौरान ऐसा विवाद हो जाता है कि सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ती है।     

यहां एक बात का और उल्लेख करना चाहूंगा। ब्रिटेन में सप्ताह में एक दिन ऐसा होता है जिस दिन सिर्फ प्रधानमंत्री से प्रश्न पूछे जाते हैं। उसे प्राईम मिनिस्टर क्वेश्चन ऑवर कहते हैं। हाउस ऑफ़ कामन्स की तर्ज पर दिग्विजय सिंह ने भी मुख्यमंत्री प्रश्नकाल प्रारंभ किया था।

कुल मिलाकर प्रश्नकाल की अवहेलना संसदीय प्रजातंत्र के मूल चरित्र की अवहेलना है

रविवार, 6 सितंबर 2020

नए पदाधिकारियों का स्वागत हुआ

 संवाददाता
नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ ने गत दिनों बीएसईएस यमुना पावर में आऊटसोर्स के कर्मचारियों को पद देकर उन्हें पदाधिकारी घोषित किया है। यह सभी पदाधिकारी आउटसोर्सिंग स्टाफ की परेशानी को दूर करने में मदद करेंगे। उसी कड़ी में डिवीजन जीटीआर कंप्लेंट सेंटर न्यू जाफराबाद में एक स्वागत समारोह का आयोजन किया गया जिसमें डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव व आऊटसोर्स के ईस्ट दिल्ली के ज्वाइंट सेक्रेट्री अब्दुल रज्जाक का डिवीजन जीटीआर कंप्लेंट सेंटर न्यू जाफराबाद की पूरी टीम के साथ ऋषि पाल, दिनेश, सैन्तुल त्यागी, अशोक कुमार आदि ने जोरदार स्वागत किया गया।
इस मौके पर डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव ने कुछ कर्मचारियों की समस्याएं सुनी व जल्द उसे निपटाने का आश्वासन दिया। स्वागत सम्मान के बाद बिजली विभाग में कोरोना काल में भी बिना डरे अपनी सेवा दे रहे ऐसे कुछ कर्मचारियों को कोरोना योद्धा सम्मान के सर्टिफिकेट देकर  सम्मानित किया गया।
वैसे आपको बता दें डेसू मजदूर संघ बीएसईएस यमुना पावर व राजधानी में काम करने वाले मजदूरों के हक के लिए काम करती है चाहे वह कर्मचारी आउटसोर्स पर ही काम क्यों नहीं करता हो।


 

शनिवार, 5 सितंबर 2020

डेसू मजदूर संघ ने पदाधिकारी चुने

 

संवाददाता

नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ ने बीएसईएस यमुना पावर में आऊटसोर्स के कर्मचारियों को पद देकर उन्हें पदाधिकारी घोषित किया है। यह सभी पदाधिकारी आउटसोर्सिंग स्टाफ की परेशानी को दूर करने में मदद करेंगे। डेसू मजदूर संघ बीएसईएस यमुना पावर व राजधानी में काम करने वाले मजदूरों के हक के लिए काम करती है चाहे वह कर्मचारी आउटसोर्स पर ही काम क्यों नहीं करता हो।
डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव की अध्यक्षता में डेसू मज़दूर संघ के महामंत्री सुभाष ने आऊटसोर्स के कर्मचारियों के पद की घोषणा की जो इस प्रकार है: अशोक कुमार (अध्यक्ष), ऋषि पाल (महामंत्री), प्रमोद वर्मा (उपाध्यक्ष), दिनेश कुमार (सर्किल चैयरमेन), सैनतुल त्यागी (संगठन मन्त्री), दलबीर सिंह (सह संगठन मन्त्री), अजीत गुप्ता (सचिव, नोर्थ), परवीन त्यागी (सचिव, साउथ-ईस्ट), नसीरूद्दीन (सचिव, सेेंटर), अब्दुल रज़्ज़ाक (जॉइंट सेक्रेटरी), दीपक यादव (जॉइंट सेक्रेटरी), दीपक गौड़ (जॉइंट सेक्रेटरी), शक्ति सिंह (आफिस सेक्रेटरी), सतीश भाटी (ऑफिस सेक्रेटरी), निरजन धरौवर (कोषाध्यक्ष), विनोद कुमार (सह कोषाध्यक्ष)।
डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव ने इस मौके पर कहा कि हम मजदूरों के हक के लिए लड़ते हैं और लड़ते रहेंगे। आज जो पदाधिकारी हमने चुने हैं यह इस काम में हमारी मदद करेंगे ताकि हम और अच्छी तरह से मजदूरों के हक की आवाज को बुलंद कर सकें।


 

शनिवार, 29 अगस्त 2020

बुलंद मस्जिद कॉलोनी का दौरा करवाया

नई दिल्ली।  गांधी नगर विधानसभा के शास्त्री पार्क वार्ड ई-25 की बुलंद मस्जिद कॉलोनी में इतनी समस्या हैं कि ऐसा लगता है कि जैसे यहां लोग नहीं जानवर रहते हैं। यहां एक समस्या हो तो कोई बात नहीं पर यहां तो समस्याओं का अंबार हैं। यहां की मुख्य समस्याएं कालोनी की सभी नाली, गली व सड़क खराब हैं। कालोनी में लगे खम्भे की स्ट्रीट लाइट खराब हैं या हैं नहीं। कब्रिस्तान के सामने पार्क में पानी भर जाता है जिस कारण सारा पानी कब्रिस्तान में जमा होने लगता है, डिस्पेंसरी बन चुकी है पर कब चालू होगी पता नहीं, इसके आस-पास कूड़े का ढेर है। चार साल से ए-ब्लॉक में पीने के पानी की परेशानी है। काफी शिकायत के बाद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ जिस कारण लोग पानी खरीदकर या मोटर का पानी पी रहे हैं। बाकी कालोनी में भी पानी की समस्या है। शाम 5 बजे पानी बिल्कुल पीला आता है। सीसीटीवी नहीं लगवाए गए हैं जिसकी वजह से चोरी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कम से कम यहां दो कूड़े घर नए बनाए जाने चाहिए ताकि लोगों के कूड़े का निस्तारण हो सके। कालोनी में स्कूल है पर लाइब्रेरी नहीं। बैठने या टहलने के लिए पार्क तो है पर ठीक नहीं है। ऐसी कई और समस्या है। इन परेशानियों को हर स्तर पर रखा गया है पर आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

आज इन्हीं समस्याओं को लेकर नई पीढ़ी-नई सोच संस्था ने बुलंद मस्जिद कॉलोनी में ईडीएमसी में प्रतिपक्ष के नेता मनोज त्यागी व शास्त्री पार्क वार्ड ई-25 के आप से मनोनीत निगम पार्षद हसीबुल हसन का दौरा करवाया। इस मौके पर संस्था के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मो. रियाज़, संस्था के शास्त्री पार्क वार्ड ई-25 के अध्यक्ष मारूफ अली, संस्था के कई पदाधिकारी, सदस्य व आम जनता मौजूद थी।

दौरे की शुरुआत लाल बत्ती के पास मोहल्ला क्लिनिक वाली गली से होते हुए डीडीए पार्क, कब्रिस्तान, डिस्पेंसरी, स्कूल, कॉलोनी की सड़क व गलियों को दिखाया। प्रतिपक्ष के नेता मनोज त्यागी ने जब कालोनी का बुरा हाल देखा तो उन्होंने इसे निगम पार्षद रोमेश गुप्ता व विधायक अनिल बाजपेयी की नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा भाजपा वालों ने दिल्ली को नरक बना दिया है उन्ही की नाकामियों की वजह से दिल्ली 47 में से 46वें स्थान पर आई है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर भाजपा वाले ईमानदारी से काम करें तो दिल्ली को नंबर वन बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को में हाउस में रखूंगा अगर इस पर जल्द काम नहीं किया गया और जगह-जगह कूड़े के ढेर खत्म नहीं हुए तो हम इसके लिए प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

मनोनीत निगम पार्षद हसीबुल हसन ने कहा अगर यह समस्या जल्द ठीक नहीं हुई तो वो दिन दूर नहीं बुलन्द मस्जिद की कालोनी के लोगों के साथ मिलकर यही कूड़ा विधायक और निगम पार्षद के घर और कार्यालय में डाल आएंगे।

संस्था राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मो. रियाज़ ने कहा हम इस कूड़े को लेकर कोई लोगों से मिल चुके हैं पर हर जगह से आश्वाशन ही मिला है पर समस्या खत्म नहीं हुई। आज अपने व्यस्त समय में से मनोज जी ने हमारी कालोनी के लिए समय निकाला उसके लिए हम शुक्रगुजार है और उम्मीद करते हैं कि इस समस्या से हमे जल्द छुटकारा मिलेगा। 
 






 

 

 

 

 

गुरुवार, 27 अगस्त 2020

जाकिर खान को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन बनाए जाने पर मुबारकबाद दी

 संवाददाता

नई दिल्ली। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के नवनियुक्त चेयरमैन जनाब जाकिर खान साहब व सदस्य श्री कवलजीत सिंह जी की नियुक्त के बाद से बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। रोज-रोज अलग-अलग संस्थाओं से लोग उनसे मुलाकात कर रहे हैं और उन्हें मुबारकबाद दे रहे हैं। 
आज नई पीढ़ी-नई सोच संस्था पदाधिकारी व सदस्य, नियाज अहमद मंसूरी, दिल्ली प्रदेश महासचिव, जमीयतुल मंसूर व अन्य समाजसेवी संस्था के पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात कर चेयरमैन बनने की उन्हें बधाई दी। सभी को उम्मीद है कि चेयरमैन जनाब जाकिर खान साहब अल्पसंख्यकों के लिए वैसे ही काम करेंगे जैसे वह निगम पार्षद रहते हुए जनता की सेवा करते थे।
संस्था के वॉर्ड ई-25 के अध्यक्ष मारूफ अली ने कहा कि हमारी पूरी टीम एक बार फिर उन्हें चेयरमैन नियुक्त करने पर बधाई देती है।
 














 
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