बुधवार, 3 जून 2020

डेसू मजदूर संघ ने कर्मचारियों को दिलाया बकाया

संवाददाता

नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ के अथक प्रयासों से एमआर/बीडी, रिकवरी व फील्ड कर्मचारियों को पिछले दो महीने से मोबाइल व कनवेन्स का 1800 बकाया मिल गया।
ज्ञात हो बीवाईपीएल व बीएसईएस बिजली कम्पनी में हजारों आउटसोर्स बिजली कर्मचारी हैं जो किसी न किसी रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। इसके लिए कर्मचारियों को मेहनताना के साथ कुछ कर्मचारियों को कन्वेंश भी मिलता है।
24 मार्च से लॉकडाउन लगा हुआ था पर बीवाईपीएल व बीएसईएस बिजली कम्पनी में हजारों आउटसोर्स बिजली कर्मचारी बहादुर योद्धा की तरह लगे रहे। पर अप्रैल महीने का सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियों ने बीवाईपीएल के बहादुर योद्धा मीटर रीडर और बिल डिस्ट्रिब्यूटर कर्मचारियों को कनवेंस का पैसा नहीं दिया।
जब डेसू मजदूर संघ यूनियन के महामंत्री सुभाष चन्द और अध्यक्ष किशन यादव एवं आउटसोर्स के महामंत्री रिषि पाल सिंह को इस घटनाक्रम की जानकारी मिली तो डेसू मजदूर संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के सहयोग से मैसर्स बीएसईएस यमुना पावर लि. के उच्चस्तरीय प्रबंधकों से बातचीत करके सभी आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों का अप्रैल, 2020 महीने का 1800 रुपए कन्वेंस का पैसा सैलरी की साथ 02/06/2020 को आ गया है।
 इसके लिए सभी आउटसोर्स बिजली कर्मचारियों ने डेसू मजदूर संघ महामंत्री सुभाष चन्द और अध्यक्ष किशन यादव, शक्ति सिंह, दिनेश कुमार, अशोक कुमार, सैंतुल त्यागी, अब्दुल रज्जाक, मोहम्मद नासिर  मियां, सुुुभाष पाल(बीवाईपीएल), विजय कुमार (एस.ओ.), विनोद  कुमार आदि का धन्यवाद दिया।

रविवार, 31 मई 2020

रिषिपाल को डेसू मजदूर संघ का आउटसोर्स का महामंत्री बनाया

संवाददाता
नई दिल्ली। डेसू मजदूर संघ की एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने की व इस बैठक में कोई कर्मचारी शामिल हुए। इस बैठक में मजदूरों से संबंधित कई समस्याओं को रखा गया जिसे जल्द से जल्द निपटने की बात कही गई।
इस बैठक में कई लोगों को नई जिम्मेदारी भी सौंपी गई। डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने रिषिपाल को आउटसोर्सिंग का महामंत्री बनाया जिस पर संघ के महामंत्री सुभाष चंद, अब्दुल रज्जाक, अशोक, शक्ति, दिनेश, सभाजीत, सैन्तुल त्यागी आउटसोर्सिग कर्मचारियों आदि ने अपना समर्थन दिया।
डेसू मजदूर संघ अध्यक्ष किशन यादव ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि रिषिपाल जी का इन लोगों ने समर्थन किया है तो रिषिपाल जी सभी कर्मचारियों को एक समान देखेंगे और उनकी समस्या को जल्द से जल्द निपटाने में उनकी मदद करेंगे।
रिषिपाल ने महामंत्री बनने पर आभार प्रकट करते हुए कहा कि मैं डेसू मजदूर संघ के अध्यक्ष किशन यादव जी, महामंत्री सुभाष चंद जी और जिन लोगों ने मुझ पर भरोसा जताया और मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। मैं उनके भरोसे को टूटने नहीं दूंगा। मैं सभी
कर्मचारी भाइयों के दुख-सुख में हर समय उनके साथ खड़ा मिलूँगा और सभी भाइयों क़ा मुझे आपका बहुत प्यार मिला और में सभी भाइयों को तहेदिल से धन्यवाद करता हूं।


66 दिन तक चले निःशुल्क भोजन वितरण का समापन

संवाददाता

नई दिल्ली। 24 मार्च, 2020 से चल रहे देशव्यापी लॉकडाउन में कई समाजसेवी संस्थाओं ने देशभर में अपने स्तर पर देश की जनता को अलग-अलग सुविधा दी। किसी ने लोगों को मुफ्त राशन दिया तो किसी ने खाना तो किसी ने पानी। इस तरह पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में भी युवा एकता समाज सेवा संस्था और युवा दर्पण एनजीओ के साथ ज़िंदगी लाइफ एनजीओ ने 27 मार्च से 31 मई, 2020 तक शास्त्री पार्क के समुदाय भवन में रोजाना 800 से अधिक लोगों को सुबह और शाम दोनों समय लोगों बिना भेदभाव किये भोजन दिया।
कंटेनमेंट  ज़ोन (अनलॉक-1) के बाहर सभी गतिविधियों के गृह मंत्रालय द्वारा चरणबद्ध तरीके से खोलने के मद्देनजर युवा एकता समाज सेवा संस्था और युवा दर्पण एनजीओ के साथ ज़िंदगी लाइफ एनजीओ द्वारा कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों को ईडीएमसी कम्यूनिटी हॉल, शास्त्री पार्क, दिल्ली में 27 मार्च से 31 मई, 2020 (66 दिन) तक चले निःशुल्क भोजन वितरण का समापन किया।
इस मौके पर युवा दर्पण एनजीओ के अध्यक्ष कमल अरोड़ा ने सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया और कहा कि हमने लोगों की मदद नहीं की बल्कि ऊपर वाले ने हमें एक जरिया बनाया है। मैं अपने सभी सहयोगियों के एक बार फिर धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मेरा इस नेक काम में सहयोग दिया।
वहीं युवा एकता समाज सेवा संस्था  के उपाध्यक्ष नियाज़ मंसूरी ने भी इस नेक काम के लिए सभी सहयोगियों को धन्यवाद किया और कहा कि हम आगे भी समाज में ऐसे ही लोगों की मदद करते रहेंगे।





 

रविवार, 24 मई 2020

10 जरूरतमंद परिवरों को घर जाकर दी राशन किट

संवाददाता
नई दिल्ली। जब से लॉकडाउन लगा है तब से आजाद सोच फाउंडेशन ट्रस्ट लगातार जनता के लिए कार्य कर रही है और इस पूरे लॉकडाउन में संस्था की ओर से जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री और भोजन से वंचित न रहना पड़े इसलिए राशन किट बांटी जा रही है।
संस्था एक मुहिम मानकर इस ओर लगातार बढ़ रही इसलिए एक बार फिर से संस्था ने बुलंद मस्जिद कालोनी में 10 जरूरतमंद परिवरों को उनके घर जाकर राशन किट दी जिसमें सभी जरूरत की चीजें थीं जैसे 5 किलो आटा, 5 किलो चावल, 2 किलो चीनी, 1 किलो मसूर की दाल, 1 किलो चने की दाल, 2 किलो आलू, 2 किलो प्याज, आधा किलो बेसन, आधा किलो काले चने, आधा किलो कचरी, 1 किलो नमक, 1 किलो रिफाइंड तेल का पैकेट, 100 ग्राम मिर्च, 100 ग्राम हल्दी, 100 ग्राम धनिया, 100 ग्राम चाय पत्ती, 250 ग्राम सेवई, 1 नहाने वाले साबुन, 2 कपड़े धोने वाले साबुन, 1 सर्फ, 1 बिस्कुट।
संस्था की ओर से 10 जरूरतमंद परिवारों को घर जाकर राशन किट दी गई और लोगों को सादगी से ईद मनाने की सलाह भी दी गई।

इस मौके पर संस्था के अध्यक्ष आजाद ने बताया कि हमारी संस्था लगातार जरूरतमंद परिवारों की किसी न किसी तरह मदद कर रही है और आगे भी ऐसे ही काम करती रहेगी।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी संस्था की ओर से सभी को ईद की दिली मुबारकबाद। हम सभी से यही निवेदन करेंगे की इस ईद को सादगी के साथ मनाएं और अल्लाह से दुआ करें कि यह कोरोना वायरस जल्द इस देश से खत्म हो जाए। सभी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखें और दूसरों को भी बतायें।

इस मौके पर संस्था के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मो. रियाज,  समाजसेवी अब्दुल रज़्ज़ाक़, मोहम्मद एजाज, मोहम्मद चांद, शाहरुख, मो. गुलफाम आदि ने अपना सहयोग दिया। 
 
 
 

शुक्रवार, 22 मई 2020

भारत को विश्व के दिशादर्शक के रुप में खड़ा करने का संकल्प और आर्थिक पैकेज

अवधेश कुमार

जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संबोधन देने आए तो किसी को कल्पना नहीं थी इस बीच सरकार ने एक राष्ट्र के रुप में भारत के अभ्युदय का न केवल सपना बुना है बल्कि उसे व्यावहारिक धरातल पर उतारने की रुपरेखा भी बना ली है। अपने संबोधन में उनहोंने बिना स्पष्ट बोले यह विश्वास पैदा करने की कोशिश की कि विश्व में सिरमौर व मार्गदर्शक के रुप में वैचारिक-सांस्कृतिक-सभ्यतागत और आर्थिक रुप से एक सशक्त भारत के आविर्भाव का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। प्रधानमंत्री के संबोधन तथा पांच भागों में जारी आर्थिक पैकेज का अर्थ है कि भारत कोरोना कोविड 19 के संकट को अवसर के रुप में परिणत करने का कदम उदा लिया है। इसके पीछे एक व्यापक सोच है तथा उसे पूरा करने की संकल्पबद्धता। हमारे देश के विश्लेषकों एवं बुद्धिजीवियों के एक तबके की समस्या है कि वो बने-बनाए ढांचे-खांचे और सिद्धांतों से बाहर निकलने की कोशिश नहीं करते। उसके अंदर जब आप मूल्यांकन करते हैं तो बदलाव की धारा समझ नहीं आती। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए कह दिया कि इसका विस्तृत विवरण वित्तमंत्री क्रमिक रुप से देश के सामने रखेंगी। बस, पूरा विश्लेषण इस पर आकर टिक गया है। 

पूरे पैकेज को सरसरी तौर पर देखें तो यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सरकार कोविड 19 आपदा से संघर्ष करते हुए इससे हो रही क्षति को रोकने, जो हो चुकी उसकी भरपाई करने, पूर्व से चली आ रही आर्थिक सुस्ती और कोविड की मार से उबारने, अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों को गति देकर पटरी पर सरपट दौड़ाने, जिस वर्ग पर सबसे अधिक मार पड़ी है उसके कल्याण के लिए व्यावहारिक योजनाएं बनाने, उत्पन्न हो रहीं सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का समाधान निकालने, बड़े और साहसिक आर्थिक सुधार.......के साथ अपनी वैश्विक भूमिका पर दिन-रात काम किया है। ऐसा नहीं होता तो हर क्षेत्र को समाहित करते हुए इतना लंबा-चौड़ा पैकेज नहीं आता। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने गकोज दिनों में कुल 53 घोषणाएं कीं। इसमें अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र की कठिनाइयों का गहराई से अध्ययन कर जितना संभव है उतना सहयोग करने की कोशिश की जा रही है ताकि वे सुस्ती या ठहराव से उठकर गतिमान हो सकें। उदाहरण के लिए 45 लाख एमएसएमई यानी लघु, सूक्षम एवं मध्यम ईकाइयों के लिए 3 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया गया। इससे उद्योगों के प्रमोटरों को बैंक से कर्ज मिलेगा। इसके दायरे में ऐसे उद्योग आएंगे, जो नॉन परफॉर्मिंग असेट्स हो चुके हैं या संकट में चल रहे हैं। छोटे उद्योगों के लिए 50 हजार करोड़ रुपए का फंड बना है। एमएसएमई की परिभाषा बदली गई है। इससे ज्यादा उद्योग एमएसएमई के दायरे में आ जाएंगे। इसी तरह संकट में चल रहे छोटे उद्योगों के लिए 20 हजार करोड़ रुपए की राहत। सरकार और सरकारी उद्यम अगले 45 दिन में एमएसएमई के सभी बकाया का भुगतान कर देंगे। लौकडाउन की मार से त्रस्त एमएसएमई को उबारने तथा उसे गतिशील बनाने के लिए वर्तमान वित्तीय स्थिति में इससे ज्यादा नहीं किया जा सकता।  कर्ज देने वाली कंपनियों के लिए 30 हजार करोड़ रुपए की स्पेशल लिक्विडिटी स्कीम की शुरुआत होगी।इससे नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशंस को लाभ मिलेगा जिन्हें बाजार से पैसा जुटाने में दिक्कत होती है। कर्ज देने वाली कंपनियों के लिए 45 हजार करोड़ रुपए की आंशिक गारंटी स्कीम लाई गई है। कर्ज देने पर अगर नुकसान होता है तो उसका 20 प्रतिशत भार सरकार उठाएगी। तो वे बिना भय के उद्वमियों को कर्ज दे सकेंगे और अर्थव्यवस्था गति पकड़ेगी। 

लौकडाउन में समाज के निचले तबके को सबसे ज्यादा मार पड़ी है। दूसरे राज्यों में रहने वाले बिना राशन कार्ड वाले  8 करोड़ मजदूरों को अगले दो महीने तक मुफ्त राशन के लिए 3500 करोड़ रुपए जारी करना, एक देश-एक राशन कार्ड की व्यवस्था, श्रमिकों को कम किराए के मकान के लिए सरकार और निजी संयुक्त उद्यम में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कम किराए के मकान की योजना आदि इनके तात्कालिक एवं दूरगामी कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ऐसी उम्मीद की जा सकती है।  मनरेगा का विस्तार कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बाहर से आए श्रमिकों को इस योजना के तहत काम देने को कहा गया है। इनकी बेकारी मे सरकार के पास यही विकल्प था। इसी तरह शहरों के रेहड़ी, पटरी ठेले वालों को 10 हजार  की कर्ज के लिए 5000 करोड़ की व्यवस्था है। इनकी चर्चा इसलिए की गई, क्योंकि गांवों से शहरों तक गरीबों की आबादी के सामाजिक – आर्थिक विकास का पूरा ध्यान रखा गया है। इसके बगैर भारत आत्मनिर्भर सक्षम देश होने की कल्पना नहीं कर सकता। वैसे पैकेज में व्यापारी, उदायोगपति, किसान, सेवा क्षेत्र, ऊर्जा, रियल्टी,पर्यटन सबके लिए प्रावधान और आवंटन है। वास्तव में केन्द्र सरकार के पैकेज में समग्रता है तथा सभी क्षेत्रों व समाज के सभी श्रेणी के लोगों को लाभ पहुंचाकर देश को गतिमान बनाने का लक्ष्य रखा गया है। 

प्रधानमंत्री के संबोधन और आर्थिक पैकेज को एक साथ मिलाकर विचार करें तभी पूरी बात समझ में आ सकती है। प्रधानमंत्री ने भारत के वर्तमान और भविष्य की, बदलती हुई दुनिया की तो संभावित तस्वीर पेश की ही, उसके साथ भारत की उसमें भूमिका और इसे विश्व का सिरमौर और प्रभावी देश बनाने में समाज के हर श्रेणी और हर व्यक्ति की भूमिका होगी यह भी साफ किया है। उन्होंने कहा कि संकट अभूतपूर्व है लेकिन थकना, हारना, टूटना बिखरना मानव को मंजूर नहीं है। सतर्क रहते हुए ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए अब हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। किसी संकट में नेतृत्व को ही देशवासियों को दिशा देनी होती है। यह बात लंबे समय से सुनी जा रही है कि 21 वीं सदी एशिया की और उसमें भारत की सदी होगी। किंतु यह होगा कैसे? प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका मार्ग एक ही है आत्मनिर्भर भारत। अगर कोविड 19 आपदा संकट है तो इसमें अवसर भी निहित है। आत्मनिर्भरता के मायने क्या? आत्मनिर्भरता की जो अवधारणा चार दशक से पहले थी वो आज भूमंडलीकृत विश्व में प्रासंगिक नहीं है। भूमंडलीकरण भी तीन दशक में बदला है। अर्थकेन्द्रित की जगह मानव केन्द्रित की बात हो रही है। इसमें देश अपने को सिमटने में लगे हैं, संरक्षणवाद की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यहीं पर स्पष्ट किया ही हमारी संस्कृति का जो संस्कार है उसमें आत्मनिर्भरता की आत्मा वसुधैव कुटुम्बकम है। हम आत्मकेन्द्रित नहीं हो सकते। यानी हमारी आत्मनिर्भरता विश्व के सभी मानवों से जुड़ी होंगी। हमारे यहां कोई संरक्षणवाद नहीं होगा।

 जो लोग अभी स्वदेशी की बात करते हुए इसे सीमाओं के तहत बांध रहे हैं वह सही नही है। प्रधानमंत्री स्वयं मेक इन इंडिया की अपील कर चुके हैं। इसका अर्थ यही है कि कंपनियां हमारे यहां आकर उत्पादन करें जिनहें यहां बेचें और विश्व बाजार में भी। यह वर्तमान दौर की आत्मनिर्भरता का फलक है। इसी तरह हमारे देश की कंपनियां भी अपना वैश्विक विस्तार कर सकतीं हैं, पर पहले वह देश के लिए वस्तुओं को निर्मित कर हमें आत्मनिर्भर बनाए। वे ऐसी सामग्री बनाएं जो विश्वस्तरीय हों। उन्होंने साफ कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख, सहयोग और शांति की चिंता सामाहित है। दुनिया का कोई देश नहीं है जो अपने यहां हर प्रकार के पैदावार और उत्पादन की कोशिश नहीं करता। आवश्यकताओं के लिए जितना हम दुनिया पर निर्भर रहेंगे उतना ही हम अपनी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय भूमिका निभाने में दुर्बल होंगे। इसलिए आत्मनिर्भरता मूल मंत्र है उस भारत को फिर से सामने लाने के लिए जो था और सोने की चिड़ियां कहलाता था। हमारे मनीषियों ने स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान ऐसे भारत का सपना देखा था जो अपनी आवश्यकताओं को लेकर आत्मनिर्भर हो, जहां दुनिया के लिए सारी खिड़कियां दरवाजे बंद नहीं हो, जिसे देखकर दुनिया सीखे कि एक राष्ट्र के रुप में किस तरह विश्व और प्रकृति हित से आबद्ध रहते हुए सशक्त हुआ जा सकता है। एक ऐसे भारत की कल्पना की गई थी जिसके पास ताकत हो लेकिन सारी दुनिया उससे प्रेम करे, उसका सम्मान करे डरे नहीं। एक ऐसा भारत जो दुनिया को रास्ता दिखाने का काम करे। 

तो कुल मिलाकर प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत का अर्थ व्यापक है। इसमें सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक उत्थान व पहचान की व्यापकता है तो पुनर्जागरण का जयघोष भी।  इसमें अपने ह्दय को भारतीय चिंतन के अनुरुप सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण का विस्तार देना है तो साहसी और संकल्पवान देश के रुप में सिर उठाकर खड़ा होने की प्रेरणा भी। आर्थिक सशक्तता तो जुड़ा है ही। ऐसा देश ही कोविड 19 उपरांत आकार लेती विश्वव्यवस्था को दिशा देकर सर्वस्वीकृत दिशा दर्शक की भूमिका में आ सकता है। 

अवधेश कुमार, ईः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, मोबाइलः9811027208


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