मंगलवार, 4 फ़रवरी 2020

मंगलवार, 28 जनवरी 2020

(12.38) 28-01-2020 To 03-02-2020

इस अंक में क्या है?
-जनसंख्या नियंत्रण कानून समय की मांग, पर इसे भी कुछ लोग विवादित बनाने में लगे
-कोबी ब्रायंट की मौत पर रो रही है पूरी दुनिया
-आंदोलन कुचलने के ये नए ‘लांछन शस्त्र’
-शाहीन बाग में दुकानें बंद होने से धंधा चैपट
-देखो हंस मत देना
-अमित शाह और दूसरे मंत्री शाहीन बाग जाएं और बातचीत कर रास्ता खुलवाएंः केजरीवाल
-शाह दिल्ली जैसा कोई सरकारी स्कूल भाजपा शासित राज्य में दिखाएंः सिसोदिया
-दिल्ली के विकास को अगले स्तर तक ले जाने में मेरी मदद करें: केजरीवाल
-सातवीं बार मैदान में हैं शोएब इकबाल
-164 उम्मीदवार करोड़पति, 13 कैंडिडेट के पास 50 करोड़ से अधिक की संपत्ति
-दिल्ली में 672 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे 1.47 करोड़ मतदाता
-बिना अधिसूचना के क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा का कदम खराब होगाः हाई कोर्ट
-15 साल की गौ-सेवा का परिणाम है पद्मश्री पुरस्कारः रमजान खान
-पटना के महिला कॉलेज ने बुर्के पर पाबंदी वापस ली
-7 मार्च को अयोध्या जाएंगे उद्धव ठाकरे
-डायमंड बुक्स ने प्रस्तुत की मुख्तार अब्बास नकवी की फिक्शन बुक ‘बलवा’
-5 महीने बाद कश्मीर में 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा बहाल, 301 वेबसाइट ही चला पाएंगे यूजर्स
-अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाले अधिकारियों को किया जाएगा जबरन सेवानिवृत्तः गडकरी
-बी आनंद एनसीएम के सचिव नियुक्त
-मत करो शादी से पहले सेक्स, सरकार ने दिया आदेश
-केरल की मस्जिद में हिंदू विवाह सामाजिक एकता का सबसे बड़ा उदाहरण
-पाकिस्तानी हल्क को है परफेक्ट लड़की की तलाश
-घाना में लागू होगी मोदी सरकार की उज्जवला जैसी योजना, भारत करेगा मदद
-खेत से लेकर खाने की थाली तक होती है अन्न की बर्बादी, इसे रोकना जरूरी
-स्टाइलिश दिखने के लिए पहनें नये कलेवर के स्कार्फ और मफलर
-रहस्य, रोमांच और आश्चर्य की अनोखी दुनिया रामोजी फिल्म सिटी
-अधिक मात्रा में काजू का सेवन खराब कर सकता है स्वास्थ्य
-किंग कोहली आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में टॉप पर बरकरार
-मुंबई में होगा आईपीएल 2020 का फाइनल
-कौन फैसला करता है कि किसे अवॉर्ड मिलेगा? पद्म श्री न मिलने पर विनेश फोगाट
-फ्रेंचाइजी क्रिकेट खेलने वाली टीमों को टी20 विश्व कप में कितना होगा फायदा?
-कंगना का अगला धमाका होगी फिल्म तेजस, एयरफोर्स पायलट का निभाएंगी किरदार
-खुल गया रेखा की मांग के सिंदूर का राज
-बॉलीवुड में जोर-शोर से उठाया जाता है गे-लेस्बियन का मुद्दा
-फिटनेस मेरे लिए जीवन जीने का एक तरीका हैः अनिल कपूर











धर्मपुरा वार्ड 233 की पूर्व निगम पार्षद तुलसी गांधी आम आदमी पार्टी में शामिल

संवाददाता
पूर्वी दिल्ली। गांधी नगर विधानसभा के धर्मपुरा वार्ड 233 की पूर्व निगम पार्षद तुलसी गांधी अपने समर्थकों के साथ आम आदमी पार्टी में शामिल हो गई हैं। वह कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ी थी और भाजपा के उम्मीदवार को हराया था। उन्हें संजय सिंह ने अपने आवास पर पार्टी की टोपी और पटका पहनाकर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दिलवाई। 
संजय सिंह ने कहा केजरीवाल जी की कार्यशैली को देखकर लोग अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो रहे हैं।
 















 

शनिवार, 25 जनवरी 2020

खतरनाक विस्तार को रोकने के लिए शाहीन बाग का अंत जरुरी

 

अवधेश कुमार

राजधानी दिल्ली का शाहीन बाग इन दिनोें देश में तो सुर्खियां बना ही हुआ है, सुर्खियां बनाने वालों की कृपा से अनेक दूसरे देशों में भी यह चर्चा में है। वहां जाइए और चुपचाप घटनाक्रमों, लोगों की गतिविधियों, उनकी आपसी बातचीत सबका पर्यवक्षण करिए। आपके सामने यह साफ हो जाएगा कि पूरा धरना ही झूठ, भ्रम, गैर जानकारी, नासमझी, , पाखंड , सांप्रदायिक सोच तथा भाजपा, संघ एवं नरेन्द्र मोदी व अमित शाह के प्रति एक बड़े वर्ग के अंदर व्याप्त नफरत की सम्मिलित परिणति है। भाजपा विरोधी राजनीतिक पार्टियां और संगठन भी इस तरह की नफरत और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने मेें भूमिका निभा रहे हैं। झूठ यह है कि नागरिकता संशोधन कानून मुसलमानों के खिलाफ है। कई लोग कहते मिल जाएंगे कि मोदी और शाह मुसलमानों को बाहर निकालना चाहता है या हमें कैद में रख देगा। यह भ्रम है जिसे योजनापूर्वक फैलाया गया है। गैर जानकारी का तो साम्राज्य है। ज्यादातर को पता ही नहीं कि नागरिकता कानून, एनपीआर या एनआरसी क्या है। जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते वो बातें वहां सुनने को मिल जाएंगी। नासमझी यह है कि इसके पीछे भूमिका निभाने वाले कुछ लोग मानते हैं कि इससे मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनेगा एवं यह समय के पूर्व ही गिर जाएगी। इस लेखक को टीवी पर लगातार दिखने वाले एक मौलाना ने स्वयं कहा कि सरकार अब जाने वाली है। पाखंड यह कि इसके पीछे गंदी राजनीति है, इस पर आने वाले भारी खर्च को अदृश्य शक्तियां वहन कर रहीं हैं और कहा जा रहा है कि लोग खर्च कर रहे हैं। सांप्रदायिक सोच के बारे में तो प्रमाण देने की जरुरत ही नहीं है। आप पूरी व्यवस्था देख लीजिए, इतना भारी संसाधन बिना पूर्व योजना के आ ही नहीं सकता। इसका वित्तपोषण भी एक रहस्य बना हुआ है कि आखिर कौन इतना खर्च कर रहा है। 

इस बहुप्रचारित धरना, जिसे भारत का सबसे बड़े आंदोलन की संज्ञा दी जा रही है का यही सच है। इसमें छः श्रेणी के लोगों की भूमिका है। ऐसे लोग हैं जिनके अंदर वाकई यह भय पैदा कर दिया गया है कि मोदी सरकार पूरे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ काम कर रही है इसलिए हमको अपनी रक्षा के लिए वहां जाना चाहिए। दूसरी श्रेणी में वे लोग हैं जिनको पूरा सच मालूम है लेकिन मोदी और भाजपा से नफरत में उन्होंने यह आग लगाई है और वे वहां डटे हुए हैं ताकि आग बूझे नहीं। तीसरी श्रेणी में वे हैं जिनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं। वे या तो अपने नेता, मालिक या अन्य के कहने या फिर पैसे एवं अन्य लालच में आते हैं। चौथी श्रेणी नेताओं की हैं जो वहां इसलिए जा रहे हैं ताकि वे मुसलमानों के हमदर्द बनकर उनका वोट पा सकें। पांचवी श्रेणी उनका है जो जेएनयू से लेकर जामा मस्जिद एवं कई जगहों पर देश विरोधी नारों से लेकर उत्पात के कारण बने हैं और उनको लगता है कि इसके साथ जुड़कर वे ज्यादा ताकतवर होंगे एवं सरकार पर दबाव बढ़ेगा। छठी श्रेणी मजहबी कट्टरपंथियों का है जो देश में अपनी सोच का जेहादी माहौल पैदा करने लिए सक्रिय रहे हैं। अगर इन सबको साथ मिला दें तो सकल निष्कर्ष यह है कि हर हाल में मोदी सरकार को मुसलमान विरोधी, सांप्रदायिक, लोकतंत्र का हनन करने वाला करार देकर देश एवं दुनिया में बदनाम करना तथा इसे कमजोर कर देना है। हालांकि इसमें सफलता मिलने की संभावना इसलिए नहीं है कि ऐसे झूठ और फरेब पर आधारित प्रदर्शनों से मोदी सरकार का समर्थन ज्यादा बढ़ेगा। 

आज की स्थिति यह है कि राजधानी दिल्ली का बड़ा वर्ग जिनकी संख्या लाखों में है, वो इस धरना के कारण लगने वाले जाम से परेशान होकर इसके खिलाफ है। लोग विरोध मेें प्रदर्शन भी करने लगे हैं। मीडिया के बड़े समूह द्वारा तथ्य सामने रखने तथा अलग-अलग संगठनों द्वारा मुहल्ला सभाओं में नागरिकता कानून का सच बताने से मुस्लिम समुदाय के अंदर भी यह भाव पैदा हो रहा है कि इस कानून से हमारा तो कोई लेना-देना है नहीं। यह भाव जैसे-जैसे बढ़ रहा है मोदी विरोधी अभियानकर्ता एनपीआर एवं एनआरसी की बात करते हए बता रहे हैं कि एनपीआर में तुमसे पहचान मांगा जाएगा, तुम्हारे खानदान का विवरण मांगा जाएगा और नहीं देने पर तुम्हारे नाम के सामने सब लिख दिया जाएगा तथा एनआरसी में तुम्हारा नाम नहीं होगा। इस तरह तुम भारत के नागरिक नहीं रहोगे। यहां तक दुष्प्रचार है कि उसके बाद तुमको जिस सेंटर में रखा जाएगा वहां मोदी और शाह केवल एक शाम तुमको भोजन देगा। आप अगर शाहीन बाग नहीं गए हैं तो आपको इस पर सहसा विश्वास नहीं होगा लेकिन वहां चले जाइए तो आपको इन महान विचारों से सामना हो जाएगा। सबसे भयावह स्थिति इस तथाकथित आंदोलन में छोटे-छोटे बच्चों का दुरुपयोग है। उनके अंदर किस तरह का जहर भरा जा रहा है यह उनके बयानों एवं नारों से मिल जाएगा। एक बच्चा-बच्ची जिसे आजादी का अर्थ नहीं मालूम उसे रटवाकर नारा लगवाया जा रहा है। एक बच्ची को पूरा बयान रटा दिया गया है जिसमें वह कह रही है कि मोदी और शाह हमें मारने वाला है हम उसको मार डालेंगे। 

इस तरह बच्चों के अंदर सांप्रदायिकता और हिंसा का बीज बोने वाले आखिर देश को कहां ले जाना चाहते हैं? इन बच्चों का क्या दोष है? लेकिन यह भी रणनीति है। बच्चों और महिलाओं को आगे रखो ताकि दुनिया की मीडिया यह सुने और इन पर कोई कार्रवाई हो तो फिर हमें छाती पीटने का मौका मिल जाए कि महिलाओं और बच्चों के साथ बर्बरता की गई। इनके नेताओं के मुंह से बार-बार यही निकलता है कि महिलाएं यहां अपने अधिकारों के लिए और संविधान की रक्षा के लिए लड़ रही है तो उनके बच्चे कहां जाएंगे। वे बच्चे जो कह रहे हैं वो उन्होंने वहां देखा है उन्हें किसी ने सिखाया नहीं है। एक बच्चा नारा लगा रहा है कि जो हिटलर की चाल चलेगा और उसके साथ सब बोल रहे हैं कि वो हिटलर की मौत करेगा।  कोई बच्चा बिना सिखाएं यह नारा बोल सकता है क्या? महिलाओं को आगे रखने की रणनीति के तहत दिल्ली में ही कई जगहों पर ऐसे धरने आयोजित किए जा रहे हैं, तथा देश के कुछ दूसरे हिस्सों में भी। ये बच्चे कितने खतरनाक मानसिकता से बड़े होंगे और क्या करेंगे यह सोचकर ही भय पैदा हो जाता है। 

प्रश्न है कि यह ऐसे ही चलेगा या इस पर पूर्ण विराम लगाया जाएगा? यह कहना कि विरोध-प्रदर्शन-आंदोलन हमारा संवैधानिक अधिकार है इस खतरनाक अभियान का सरलीकरण करना है। सबसे पहले तो किसी विरोध या आंदोलन का तार्किक आधार होना चाहिए। नागरिकता कानून मुसलमानों के खिलाफ है नहीं। एनपीआर 2010 में हुआ, 2015 में उसको अद्यतन किया गया। कोई समस्या नहीं आई। वह मूल जनगणना का भाग है एवं सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए आवश्यक है। एनआरसी अभी आया नही। जब आएगा और उसमें कुछ आपत्तिजनक बातें होंगी तो उसका विरोध किया जाएगा। इस समय ऐसा कुछ है नहीं। तो जिस विरोध का कोई तार्किक आधार नहीं है, जो विरोध दूसरे के अधिकारों का हनन कर रहा है, जिसमेें बच्चों का रैडिकलाइजेशन किया जा रहा है, जिसमें एक समुदाय को भड़काने जैसे सांप्रदायिकता के तत्व साफ दिख रहे हैं, जिसका पूरा उद्देश्य ही कुत्सित राजनीति है यानी मोदी-शाह को बदनाम कर सरकार को फासीवादी साबित करो....वह संवैधानिक अधिकार के तहत नहीं आ सकता। संविधान में मौलिक अधिकार के साथ मौलिक कर्तव्य भी हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि अधिकारों के नाम पर ऐसी स्थिति पैदा कर दें जिनसे दूसरे के लिए कर्तव्य पालन कठिन हो जाए और वह भी सुनियोजित राजनीतिक साजिश के तहत। 

साफ है कि शाहीन बाग का अंत नहीं होगा तो इसका जहरीला विस्तार और जगह हो सकता है। कारण, इसमें अलग-अलग कुत्सित उद्देश्य से लगे लोग जानते हैं कि इसे जगह-जगह फैलाएं बिना वे मोदी सरकार को खलनायक बना देने में कामयाब नहीं होंगे। इसलिए ज्यादा विस्तार से पहले ही इसे रोकना होगा। इसके कारण देश के बड़े वर्ग में गुस्सा पैदा हो रहा है। तो खतरा यह है कि कहीं प्रतिक्रिया में वो वर्ग इनको चुनौती देने लगा तो फिर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी। इसलिए जरुरी है कि इसे अभी ही रोका जाए। इस बात की चिंता किए बिना कि ये क्या दुष्प्रचार करेंगे, ये आगे क्या करेंगे और राजनीतिक पार्टियां इसे किस तरह लेंगी इसका कानूनी तरीके से अंत किया जाए।

अवधेश कुमार, ईः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, मोबाइलः9811027208


मंगलवार, 21 जनवरी 2020

(12.37) 21-01-2020 To 27-01-2020

-आप, भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों के सामने हैं ये चुनौतियां? कौन मारेगा असल बाजी
-नड्डा का पटना कॉलेज से भाजपा अध्यक्ष पद तक का सफर
-न्यायप्रिय व धर्मनिरपेक्ष शासक थे ‘छत्रपति शिवाजी’
-26 जनवरी 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ था
-घोषणापत्र से पहले केजरीवाल ने जारी किया 10 कामों का गारंटी कार्ड
-दिल्ली विधानसभा में 4 सीटों पर चुनाव लड़ेगी आरजेडी
-सिसोदिया के खिलाफ खड़े भाजपा के रवींद्र नेगी की कुल संपत्ति 1.29 करोड़
-शास्त्री पार्क में सीएए के खिलाफ निकाला कैंडल मार्च
-लवली के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी गांधीनगर सीट, त्रिकोणीय मुकाबले में जीत किसकी?
-राम मंदिर निर्माण का जिम्मा नहीं मिलने पर कोर्ट जाएगा रामालय ट्रस्ट
-नेताजी के पौत्र बोले, नागरिकता के मुद्दे पर सत्तारूढ़ और विपक्ष द्वारा भय का माहौल उत्पन्न किया जा रहा
-एनपीआर का उद्देश्य जाति, विचारधारा के बारे में सूचना प्राप्त करना हैः प्रकाश आंबेडकर
-दुनिया के 130 ऊर्जावान शहरों की सूची में हैदराबाद, बेंगलुरु शीर्ष पर
-पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में येचुरी को भेजना चाहती है माकपा
-एमजे अकबर की पुस्तक में दावा, स्वतंत्रता का पहला दिन पाक में बिताना चाहते थे महात्मा गांधी
-फिल्मी अंदाज में भागे ब्राजील के 76 बेहद खतरनाक कैदी, हफ्तों से बना रहे थे सुरंग
-रोज पति देता था गाली, पत्नी ने फिर किया कुछ ऐसा...
-अकाली दल नहीं लड़ेगा दिल्ली चुनावः मनजिंदर सिरसा
-ज्वालामुखी से निकल रहा था राख और धुआं, फिर भी बेफिक्रे कपल रचा रहे थे शादी
-आरटीआई में हुआ खुलासा, जेएनयू के पास 82 विदेशी छात्रों की राष्ट्रीयता की जानकारी नही
-पूरे देश में एक जून तक लागू हो जाएगा ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ः रामविलास
-दिल्ली में नीतीश करेंगे एनडीए का प्रचार, पीके कहेंगे केजरीवाल फिर एक बार
-चंडीगढ़ को पहचान देता ‘सूफी आस्तान-ए-रामदरबार’
-सोते समय बच्चा करता है बिस्तर गीला तो अपनाएं यह उपाय
-हार्ट अटैक पड़ने पर अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज को दें यह उपचार
-आखिर क्यों प्रवीण कुमार खुद को गोली से उड़ा देना चाहता था?
-सीरीज जीत को कोहली ने बताया संतोषजनक, जानिए क्यों?
-10 साल में साईं के 24 सेंटरों से आए यौन शोषण के 45 मामले
-इस साल भी न्यूजीलैंड को पहली गेंद से दबाव में लाना चाहेंगेः कोहली
-मुशफिकुर ने किया पाक दौरे पर जाने से इनकार
-लाल बिकनी पहन कर समुद्र में कूदी दिशा पटानी, कड़ाके की ठंड में बढ़ गया तापमान
-सुपर हॉट तमन्ना भाटिया की दिलकश तस्वीरें, इन्हीं अदाओं से फैंस की उड़ा लेती हैं नींद
-नताशा दलाल से नहीं श्रद्धा कपूर को बचपन से ही प्यार करते हैं वरुण धवन
-फिर रोमांटिक बॉय बनेंगे शाहरुख खान, करण जौहर के साथ करने जा रहे हैं फिल्म
-रणबीर के साथ काम करने के लिए उत्साहित हैं श्रद्धा








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