गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

मोदी जी की जीत में भारत तिब्बत सहयोग मंच का हर सदस्य प्रयासरत : रामानन्द शर्मा

संवाददाता

नई दिल्ली। भारत तिब्बत सहयोग मंच की ओर से दिनांक 08-04-14 को यमुना विहार विभाग दिल्ली प्रांत के कार्यकर्ताओं ने उत्तर पूर्वी दिल्ली के भाजपा के प्रत्याशी श्री मनोज तिवारी का भव्य स्वागत किया। तिवारी जी के रोड शो के दौरान विभाग अध्यक्ष श्री रामानन्द शर्मा ने भजनपुरा में फूलमाला द्वारा मनोज तिवारी जी का अभिवादन किया तथा उन्हें जीत का आश्वाशन दिलाया। शर्मा जी ने क्षेत्र के लोगों से श्री मनोज तिवारी जी को जिताने का निवेदन किया। कार्यक्रम में उपस्थित अनिल गुप्ता एवं राजकु‌मार गजवानी और क्षेत्र के कई कार्यकर्ताओं द्वारा श्री नरेन्द्र मोदी जी को भारत की प्रधानमन्त्री बनाने का भरसक प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता घर घर जाकर वोटरों से वोट डालने की अपील भी करेंगे।


कम मतदान के लिए चुनाव आयोग भी जिम्मेदार

-कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुई गांधी नगर की मतदाता सूची ठीक

-चुनाव आयोग द्वारा बांटने के लिए दी गई पर्ची नहीं मिलने से लोगों में काफी रोष देखने को मिला

-यदि समय से पहले पड़ताल कर ली जाती तो लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान कर सकते थे

-सही पोलिंग बूथ की जानकारी के लिए एस.एम.एस. बना हाथियार

 

मो. रियाज

नई दिल्ली। दिल्ली में हर एक मतदाता अपना वोट डालने के लिए पूरे जोश में दिख रहा था। इसमें वह मतदाता सबसे ज्यादा जोश में दिखे जिन्होंने अपने मत का पहली बार प्रयोग किया। मतदाता जोश में क्यों न हो क्योंकि यह जोश तो चुनाव आयोग द्वारा हर जिले में जागरुकता कैम्प लगाकर जो लोग को जागरुक किया गया। इनका पूर्ण साथ दिया दिल्ली की कईं सारी संस्थाओं ने।

हर मतदान केन्द्र पर सुबह से ही भीड़ दिखनी शुरू हो गईं थी उसी के साथ देर शाम तक वोटिंग होती रही परंतु गांधी नगर विधानसभा के मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करने के लिए सुबह से शाम तक इधर से उधर चक्कर लगते रहे क्योंकि बुलन्द मस्जिद कालोनी में सभी मतदान केन्द्र की मतदाता सूची सही नहीं के कारण काफी परेशानी हुई। चुनाव आयोग द्वारा जो पर्ची बीएलओ को बांटने के लिए दी गई थी वह उन्होंने कालोनी के नेताओं को दे दी जो कि वहां बांटी ही नहीं गईं जिससे लोगों में काफी रोष भी देखने को मिला।

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने कहा कि इसकी शिकायत चुनाव आयोग सहित सभी संबंधित अधिकारियों से कई बार की गईं थी कि गांधी नगर विधानसभा की मतदाता सूची ठीक कर दी जाए नहीं तो मतदान वाले दिन मतदान कम होने की आशंका है और वही हुआ। लोग वोट तो डालना चाहते थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनको वोट किस पोलिंग बूथ में डालना है। कुछ लोगों का कहना था कि हमारे घर के वुछ वोट किसी पोलिंग बूथ में थे कुछ किसी में। यदि समय रहते इसकी सही से पड़ताल कर ली जाती तो लोग ज्यादा से ज्यादा मतदान कर सकते थे।

संस्था के उपाध्यक्ष मो. रियाज ने बताया कि हमारा पोलिंग बूथ नं. 17 (बुलंद मस्जिद) है परंतु हमारे कुछ वोट पोलिंग बूथ नं. 85 (गांधी नगर) में कर दिए गए। दोनों पोलिंग बूथ की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है। ऐसे ही कुछ और वोट थे जो अन्य पोलिंग बूथ में थे, वहां पर लोग वोट डालने नहीं जा पाए क्योंकि पोलिंग बूथ दूर था और उसकी उन्हें जानकारी नहीं थी।

इसके अलावा कुछ लोगों को अपना मतदाता पहचान पत्र भी नहीं मिला जिस कारण भी वोट कम हुए और इसके लिए कहीं न कहीं चुनाव आयोग व मतदाता पहचान पत्र केंद्र भी जिम्मेदार हैं। यदि सभी अपनी जिम्मेदारी के साथ काम करते तो मतदान और अधिक होता।

संस्था के कोषाध्यक्ष डाॅ. आर अंसारी ने बताया कि हम लोगों ने पूरे दिन लोगों को उनके सही पोलिंग बूथ की जानकारी एसएमएस से दिलवाते रहे जिससे काफी परेशानी को हमने कम किया। लोगों का कहना था कि चुनाव आयोग बड़े-बड़े दावे तो करता है परंतु जो जरूरी काम है वह नहीं करता।

साबिर हुसैन ने कहा कि हमारी संस्था के सभी पदाधिकारी व सदस्य सुबह से ही लोगों के घरों पर जा-जाकर वोट डालने के लिए कहते रहे। उन्हें उनके सही पोलिंग बूथ की जानकारी देते रहे जिससे पोलिंग ज्यादा से ज्यादा हो परंतु यह कोशिश पूर्ण रूप से सफल नहीं हो सकी। यदि मतदाता सूची सही होती तो पोलिंग 85-90 प्रतिशत तक जा सकती थी जो 60-65 के बीच में फंसकर रहे गई और यह चुनाव आयोग की कमी के कारण हुआ है।

मंगलवार, 8 अप्रैल 2014

जनसभा कर मतदाताओं को मतदान के लिए जागरुक किया

 मो. रियाज

नई दिल्ली। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख करीब आ रही है। हर कोई मतदाताओं को अपनी ओर खिंचने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं परंतु कोई भी मतदाताओं को उनके अधिकारों से अवगत नहीं करवा रहा है। पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर विधानसभा में स्थित बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क में नई पीढ़ी-नई सोच (पंजी) संस्था ने मतदाताओं को जनसभा कर उन्हें उनके अधिकारों से अवगत कराया। इस के मौके पर संस्था ने मतदाताओं को जागरुक करने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस जनसभा में लोगों मतदान करने व सही उम्मीदवार चुनने के लिए प्रेरित किया गया जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस जनसभा में आम आदमी पार्टी के गांधी नगर के पूर्व प्रत्याशी श्री अनिल कुमार वाजपेयी व आम आदमी पार्टी के कृष्णा नगर के पूर्व प्रत्याशी श्री इसरत अंसारी मुख्य अतिथि के रुप में मौजूद थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार समाज के श्री अब्दुल खालिक ने की। उन्होंने अपने विचार रखे कि आज के समय में सभी को मतदान का पूरा अधिकार है व सही उम्मीदवार चुनने की भी जिम्मेदारी हमारी है और किसी की नहीं। यदि हम गलत उम्मीदवार को चुनकर संसद में भेजते हैं तो उसके लिए हम ही जिम्मेदार है।
संस्था के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी संस्था का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को जागरुक कर मतदान प्रतिशत बढ़ाना है जिससे कि मतदान के दिन मतदाता घर पर छुट्टी का आनंद लेने के बजाय अपने अधिकारों का प्रयोग कर सही उम्मीदवार चुन सके नहीं तो 5 वर्ष तक हमें अपनी भूल का एहसास होता रहेगा कि हमने मतदान क्यों नहीं किया, क्योंकि सही उम्मीदवार चुनने में भाग नहीं लिया तो गलत लोग संसद में पहुंच जाएंगे और यही मतदान प्रतिशत कम होने का कारण भी है जबकि दिल्ली में यह 100 प्रतिशत मतदान होना चाहिए।
श्री अनिल कुमार वाजपेयी ने कहा मैं यहां आम आदमी पार्टी के लिए वोट मांगने नहीं आया हूं बल्कि सही व ईमानदार को चुने। यह हम सभी की जिम्मेदारी है।
श्री इसरत अंसारी ने कहा की सही मतदान से हम सही उम्मीदवार को चुन सकते हैं नहीं तो हम 5 साल तक अपनी भूल का एहसास करते रहते है कि सही समय पर अगर हमने जांच आदि की होती तो यह दिन देखने को नहीं मिलता। यह बात सभी पर लागू होती है। यदि हम वोट डालने नहीं जाते हैं तो गलत व्यक्ति चुनकर आ जाता है। जब गलत व्यक्ति चुनकर आ जाता है तो हम कहते हैं कि यह व्यक्ति गलत है। हमें उसे गलत कहना का अधिकार नहीं क्योंकि अगर हमने अपने मत का प्रयोग सही से किया होता तो सही व्यक्ति चुनकर आ सकता था।

संस्था के कोषाध्यक्ष श्री डॉ. अंसारी ने कहा कि युवा आगे आकर सही मतदान की जानकारी हासिल करें व इससे होने वाले नुकसान से अपने आपको बचाएं व दूसरों को भी बचाने की कोशिश करें। उन्होंने आगे कहा कि हमें सही व ईमानदार को अपना मत देकर संसद भेजना चाहिए ताकि वह हमारी बातों को संसद में रख सके।
संस्था के उपाध्यक्ष श्री मो. रियाज ने कहा कि एक दिन की मुसीबत से बचने के लिए 5 साल की मुसीबत मत पालो, अपनी बात मनवानी है तो वोट जरूर डालो। 
प्रोग्राम के अंत में सभी से मतदान करने की शपथ दिलवाई कि मैं, 10 अपै्रल 2014 दिन सभी काम को छोड़कर  मतदान करने जरुर जाउंगा व अपने साथ औरों को भी मतदान केंद्र लेकर जाउंगा तथा सभी को कार्यक्रम में भाग लेने व समय देने के लिए धन्यवाद दिया तथा कार्यक्रम में सहयोग देने वाले श्री अब्दुल खालिक, श्री जुबैर उर्फ कल्लू, सालिम, नईम, लियाकत, मो. इलियास, मौलाना हुसैन साहब, हाजी जाबिर हुसैन, मो. शुएब, मो. उमर व संस्था के पदाधिकारी-सदस्यों व अन्य जनों का रहा है।






 

 

गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

यह कैसी राजनीतिक भाषा है

अवधेश कुमार

संसदीय लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। हमारी आपकी पूरे देश की नियति इनके हाथों हैं। जाहिर है, नेताओं से उनके महत्वपूर्ण दायित्व के अनुरुप ही गरिमामय, संतुलित और सम्पूर्ण विवेक के साथ अपनी भूमिका निभाने की अपेक्षा की जातीं हैं। लेकिन चुनाव के समय जिस तरह के बयान हमारे नेता दे रहे हैं उनसे पूरे देश को धक्का लग रहा है। यह कहना तो ठीक नहीं होगा कि सारे दलों के सारे नेताओं ने अपने ंबयानों से गरिमा को गिराया है, पर समग्र परिदृश्य शर्मसार अवश्य कर रहा है।  गंदे, असभ्य, घृणा, हिंसा.....सांप्रदायिकता...यानी हर प्रकार की आपराधिक भाषा का प्रयोग अभी तक हमारे सामने आ चुका है। अवाम सन्न है, देश का सोचने समझने वाला समूह चिंतित है, लगातार आलोचनाएं हो रहीं हैं......थू-थू किया जा रहा है, पर लगता है जैसे कुछ नेताओं को राजनीति की सभ्यता, मर्यादा, गरिमा का अहसास ही नहीं हैं। वे मानते हैं कि हम कहीं गैंगवार में कूदे हैं और सामने वाले पर उसी रुप में हमला करना है। यह संयोग है या इस चुनाव की तासीर कि इनमें से ज्यादातर अमर्यादित शब्दों का प्रयोग भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के खिलाफ हुए हैं। 

आइए पहले कुछ बयानों को देखिए। उत्तर प्रदेश में केन्द्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने मोदी को आरएसस का गुंडा तथा राजनाथ सिंह को उनका गुलाम कहा है तो प्रदेश के ंमंत्री आजम खान ने मोदी को कुत्ते के पिल्ले का भाई एवं शाबिर अली को ईमान फरामोश। वहीं मुरादाबाद में बसपा के उम्मीदवार हाजी याकूब कुरैशी ने नरेंद्र मोदी को देश का सबसे बड़ा दुश्मन, सबसे जालिम शख्स, हैवान और दरिंदा कहा। जब उनसे असंसदीय टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कुछ भी असंसदीय नहीं है, संसद में भी ऐसी ही भाषा बोली जाती है। इस तरह के बयान देना कुरैशी के लिए कोई नई बात नहीं है। 2006 में डेनमार्क के कार्टूनिस्ट का सर कलम करने पर कुरैशी ने 51 करोड़ देने का एलान किया था। कैराना से सपा के लोकसभा प्रत्याशी नाहिद हसन ने तो मायावती एवं मोदी दोनों को कुंवारा कहते हुए ऐसी अश्लील टिप्पणी की जिनकी कल्पना तक नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा कि मायावती तीन-तीन बार मोदी की गोद में जाकर बैठ गईं। मत भूलों की दोनों कुंवारे हैं। उन्होंने कहा कि पहले मायावती को उनके बाबा ने हराया था, उसके बाद में उनके पिता से एक बार उनका पाला पड़ा था और अब यदि उनसे उसका पाला पड़ा तो आप खुद ही देख लो। मानो खानदानी दुश्मनी हो। लखनउ के गेस्ट हाउस कांड में उनके पिता मुनव्वर हसन का नाम भी उछला था। सपा के राज्समंत्री चौधरी साहब सिंह ने तो मोदी को बंदर बता दिया। उन्होंने कहा कि बंदर को भगाने के लिए लंगूर की जरूरत होती है। मोदी नाम के इस बंदर को भगाने के लिए अखिलेश लंगूर की जरूरत है। हालांकि अखिलेश को जैसे ही उन्होंने लंगूर बताया, उपस्थित लोग हंसने लगे, उन्हें लगा कि अखिलेश का नाम लंगूर के रुप में लेना शायद उचित नहीं था, पर तब तक जुबान तो फिसल चुकी थी। बसपा के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने तो कहा कि नरेन्द्र मोदी उत्तर प्रदेश पहुंच ही नहीं सकता। यदि आप सब इकट्टा हो जाओ तो रास्ते में ही उसका काम तमाम हो जाएगा। यानी मार डाला जाएगा।  

इन सबमें सबसे ज्यादा सुर्खियों में सहारनपुर से कांग्रेस प्रत्याशी इमरान मसूद का बयान था। एक वीडियो में इमरान कह रहे हैं कि मोदी उत्तर प्रदेश को गुजरात बनाना चाहता है। गुजरात में चार फीसद मुसलमान हैं और इस इलाके में 42 फीसद मुसलमान है,यहां उनकी बोटी-बोटी काट देंगे। यानी मोदी को टुकड़े-टुकड़े काट देंगे मुसलमान। बाद में पुलिस ने मसूद को गिरफ्तार किया एवं देवबंद न्यायालय ने उनको 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब वे जमानत पर बाहर हैं। कांग्रेस ने यह कहते हुए उनका बचाव किया है कि नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो इमरान मसूद का बयान है वो उन्होंने 18 सितंबर 2013 को दिया था। उस समय इमरान मसूद समाजवादी पार्टी में थे। इमरान मसूद ने आठ मार्च 2014 को कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की है। उसका आरोप है कि सपा ने यह वीडियो जारी किया है। इसे मान लें तो प्रश्न है कि छः महीना पहले बोले जाने से वह सही कैसे हो गया?  मामला सामने आने के बाद मसूद ने कहा कि उन्होंने जो अपशब्द कहे उनपर उन्हें खेद है। लेकिन उनका कहने का अर्थ वह नहीं था जो निकाला जा रहा है। मेरे बयान का आशय नरेंद्र मोदी को राजनीतिक सबक सिखाने से है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आम बोलचाल की भाषा में इस तरह कह दिया जाता है। इस सूची में राकांपा प्रमुख शरद पवार का भी नाम आ गया है। हालांकि वह ज्यादा आपत्तिजनक नहीं है। उन्होंने कहा है कि नरेंद्र मोदी का दिमाग खराब हो गया है। इस बार भी हमारी सरकार बनेगी और इसके बाद हम मोदी का अच्छे डॉक्टर से इलाज कराएंगे। ऐसा नहीं है कि इसमें केवल भाजपा इतर पार्टियां ही सुर्खियां पा रहीं हैं। भाजपा के एक सांसद हीरालाल रेगर ने राजस्थान के टोंक में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आ गई तो सोनिया और राहुल के कपड़े उतार कर उन्हें फिर से इटली वापस भेज देंगे। बाद में हीरालाल रेगर ने अपने बयान पर माफी भी मांग ली लेकिन तब तक उनके इस बयान से हंगामा मच चुका था। 

ये तो कुछ बानगियां हैं जो संयोग से कैमरे की पकड़ में आ गईं। न जाने कहां कहां ऐसे अपराधियों की तरह  हिंसा और भय पैदा करने वाले बयान दिए जा रहे होंगे। हमने अपनी राजनीति में एक दूसरे को कुत्ता से लेकर संसद में एक दूसरे का बहनोई और साला कहते सुना है। जब हमारी राजनीति का स्तर इतना गिर गया हो तो फिर शब्दानुशासन, सोच और अभिव्यक्ति में मर्यादा का पालन करने वाले कितने बचेंगे। लेकिन ऐसे बयानों पर नेताओं को जनता की तालियां मिलतीं हैं। इससे पता चलता है कि हमने जनमत को कितना विकृत कर दिया है। जनता के अंदर सकारात्मक सोच, राजनीति और सत्ता के प्रति विवेकशील विचार पैदा करने का दायित्व राजनीतिक दल, सामाजिक-धार्मिक संगठन और मीडिया का है। निस्संदेह, इसमें चूक हुई है और जन मनोविज्ञान विकृत हो रहा है, अन्यथा ऐसे नेताओं को जनता का समर्थन कतई नहीं मिलता और ये नकार दिए जाते। ऐसा हो नहीं रहा है इसलिए ये इस तरह लोकतंत्र में आम राजनीति को इस तरह अपनी हिंसक, अश्लील, आपराधिक बयानों से विकृत करते हुए भी राजनीति में जमे हुए हैं।

संसदीय लोकतंत्र की कल्पना करते हुए यह माना गया था कि नेता और दल मिलकर तंत्र में लोक की महत्ता स्थापित करने की प्रतिबद्धता से काम करेंगे। इसमें चुनावी प्रतिद्वंद्विता को वैसे ही माना गया था जैसे एक ही लक्ष्य के लिए सारे प्रतिस्पर्धी लगे हैं, केवल सोच यह है कि हम जनता की सेवा उनसे बेहतर कर सकेंगे। धीरे-धीरे यह भाव विलुप्त हो गया है और राजनीति का मूल सरोकार सत्ता पाना तथा ज्यादातर नेताओं का सत्ता के माध्यम से अपनी शक्ति और संपदा विस्तार हो गया है। इस सोच के कारण विकृत राजनीति में ऐसे नेताओं की बहुतायत होती जा रही है जो येन केन प्रकारेण केवल चुनाव जीतने के लिए ही आते हैं। इसके लिए चाहे जातिवाद को उभारना हो, संप्रदायवाद को, चाहे धन से किसी को खरीदना हो या भय से दबाव में लाना हो या फिर हर व्यक्ति के अंदर की नकारात्मकता को उभारना हो......वे सारे हथियार आजमा रहे हैं। इसमें स्वयं को सामने वाले से ज्यादा बाहुबली, धनबली, निडर, हिंसक टकराव की हिम्मत रखने वाला........जो भी साबित करना हो वे करते हैं। 

हालांकि इन सबके बावजूद यह निष्कर्ष उचित नहीं होगा कि राजनीति में सब कुछ खत्म हो गया है। ऐसे बयानों की निंदा भी हो रही है इसका विरोध भी हो रहा है। दूसरे, यह भूलें कि प्रतिस्पर्धी राजनीति में विरोधी की तीखी आलोचना, तीखा व्यंग्य आदि राजनीति के लिए अपरिहार्य हैं। ये अलंकार भी हैं। इनको बिल्कुल खत्म नहीं करना चाहिए। जैसे किसी को व्यंग्य में मानसिक असंतुलन का शिकार, गुब्बार फूटना या गुब्बारा बना ही नहीं......ऐसे शब्द प्रयोगों से आपत्ति नहीं होनी चाहिए। फिर यदि कोई भ्रष्ट है, उसने कदाचार किया है तो वहां केवल शब्द प्रयोग आपराधिक न हो, अन्यथा वैसे व्यक्ति या समूह पर हमला बिल्कुल जायज है। ऐसा नहीं होने से ही हमारी राजनीति में पक्ष और विपक्ष का स्वाभाविक भेद मिटने लगा है। हां, आवश्यक और उचित हमला, आलोचना, निंदा तथा असभ्य, हिसंक, अशालीन टिप्पणियों के बीच भेद अवश्य करना होगा।  

अवधेश कुमार, ई.ः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 09811027208


रविवार, 30 मार्च 2014

सावधान: मेट्रो स्टेशन के एस्कलेटर भी सुरक्षित नहीं

-कभी भी कट सकती है आपकी जेब

- जेबतराश भीड़ का पूरा उठाते हैं फायदा

मो. रियाज़

नई दिल्ली। दिल्ली की लाइफ लाइन बन चुकी दिल्ली मेट्रो में अगर आप सफर करने की सोच रहे हैं तो आप अपनी जेब व समान का पूरा ख्याल रखें नहीं तो पता नहीं कब आपकी जेब व समान हाथ साफ हो जाए क्योंकि मेट्रो ट्रेन के अंदर या मेट्रो स्टेशन के प्लैटफॉर्म पर भीड़भाड़ और धक्का मुक्की के बीच जेब कटने की घटनाएं तो आए दिन सुनने को मिलती रहती हैं, लेकिन अब लिफ्ट या एस्कलेटर पर भी जेबकतरों की नजर पड़ गई है। ऐसे में अगर आपने जरा सी लापरवाही बरती, तो एस्केलेटर या लिफ्ट में आपकी जेब कट सकती है। यदि आप इन्हें पकड़ने की कोशिश करेंगे तो यह भीड़ का पूरा फायदा उठाकर आपको चकमा देकर भीड़ के बीच कहीं गुम हो जाएंगे।
इनका एक पूरा ग्रुप होता है जो यात्री को चारों तरफ से घेर लेता है और हाथ साफ करते ही यह सामान अपने दूसरे साथी को दे देते हैं। जिससे यदि यह पकड़े भी जाएं तो इनके पास कुछ नहीं मिलने पर इन्हें छोड़ दिया जाता है।
यह लोग एस्केलेटर के जरिये प्लैटफॉर्म से कोनकोर्स लेवल पर जाते वक्त पैसेंजर के पीछे बिल्कुल सट कर खड़े हो जाते हैं और किसी धारदार चीज से उस यात्री का बैग आदि काट लेते हैं। चूंकि जेबतराशों की तादाद ज्यादा होती है, इसलिए पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि जेब आदि किसने काटी। यह लोग पकड़े जाने का शक होने पर भीड़भाड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो जाते हैं। उसके पास से सर्जिकल ब्लेड होता है जो यह वारदात में इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली के कई अन्य मेट्रो स्टेशनों पर भी जेबतराशी की वारदातों को अंजाम देने के लिए कई ग्रुप सक्रिय हैं। इनको पकड़ना सीआईएसएफ के लिए एक सिरदर्दी है।
http://mohdriyaz9540.blogspot.com/

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musarrat-times.blogspot.com

http://naipeedhi-naisoch.blogspot.com/

http://azadsochfoundationtrust.blogspot.com/