गुरुवार, 21 नवंबर 2013

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था ने लगाया बचत खाता कैंप

संवाददाता

नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नई सोच (पं.) संस्था हमेशा से जनता की भलाई के लिए समर्पित रहती है। इसी कड़ी में आज एक कार्य और किया गया। इस बार संस्था की ओर से बचत खाता कैंप लगाया गया। यह कैंप संस्था के केंद्रीय कार्यालय के निकट आयोजित किया गया। इस कैंप में लगभग 100 लोगों के खाते खोले गए। यह कैंप सीलमपुर पोस्ट आफिस के साथ मिलकर लगाया गया था। इस कैंप में सीलमपुर पोस्ट आॅफिस के पोस्टमास्टर श्री राजपाल जी अपने साथ अपनी टीम लाए थे।
कैंप 11 बजे के करीब शुरू हुआ जिस कारण ज्यादा लोगों के खाते नहीं खुल पाए। इस पर पोस्टमास्टर श्री राजपाल जी व आए अन्य अधिकारियों ने रविवार को दोबारा कैंप लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें नहीं मालूम था कि यहां इतने खाते खुल जाएंगे।
संस्था के सरपरस्त अब्दुल खालिक ने कहा कि जब से यह संस्था बनी है तब से लोगों की सेवा में लगी हुई है। इसके सभी सदस्य युवा हैं और अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण रूप से निभाते हैं और इनकी कोशिश रहती है कि इनके पास आया हुआ व्यक्ति निराश होकर न जाए।
संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने कहा कि संस्था लगातार अपनी तरफ से कोशिश करती रहती है कि लोगों की जितनी मदद की जा सकती है करें क्योंकि एक समय था जब हम दूसरों लोगों के पास जाते थे तो वह लोग कहते थे कि अभी समय नहीं कल आना आदि परन्तु संस्था के सदस्य अपने कीमती समय में से लोगों की सेवा के लिए समय निकालकर लोगों की परेशानी दूर करने की पूर्ण कोशिश करते हैं।
संस्था के उपाध्यक्ष मो. रियाज ने कहा कि लोगों को खाता खुलवाने में कभी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है क्योंकि दिल्ली में लोग बचत करते तो हैं परंतु उनके पास बचत खाता नहीं होता जिससे वह अपनी बचत को लंबे समय तक घर में बचाकर नहीं रख पाते हैं। इसलिए सीलमपुर पोस्ट आॅफिस के पोस्टमास्टर श्री राजपाल जी से यहां पर बचत खाता कैंप लगाने के लिए बात की गई तो उन्होने हां कर दी। भरी। हम श्री राजपाल जी के आभारी हैं।
यहां खाता 50 रुपये में खुला जिससे लोगों को यह खाता खुलवाने में कोई परेशानी नहीं आई। बैंक बगैरा के कई नियम होते हैं परन्तु पोस्ट आॅफिस के में सिर्फ दो प्रूफ पर ही खाता खुल गया।
इस मौके पर अब्दुल खालिक, जुबैर आज़म, साबिर हुसैन, डॉ. आर. अंसारी, मो. रियाज, शमीम हैदर, अब्दुल रज्जाक, यामीन, सदरे आलम, आजाद, सज्जाद, मो. सेहराज, मो. नाजिम, इरशाद अहमद, रईस अहमद, मो. मुन्ना अंसारी, आमीर अहमद, कुरबान, अनीस, इलमत, फुरकान, गुलजार अख्तर आदि शामिल थे जिन्होंने फार्म आदि भरे व लोगों की परेशानी कम करने की कोशिश की।

सोमवार, 18 नवंबर 2013

नई पीढ़ी-नई सोच संस्था द्वारा बचत खाता कैंप का आयोजन 21 को

 संवाददाता

नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नईं सोच (पं.) संस्था हमेशा से जनता की भलाई के लिए समर्पित रहती है। इसी कड़ी में एक कार्य और किया जाएगा। इस बार संस्था की ओर से डाक घर द्वारा बचत खाता कैंप का आयोजन 21 नवंबर 2013 को सुबह 10 बजे से किया जाएगा। यह कैंप संस्था के केंद्रीय कार्यालय के निकट आयोजित किया जाएगा।
संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष श्री साबिर हुसैन ने कहा कि संस्था लगातार अपनी तरफ से कोशिश करती रहती है कि लोगों की जितनी मदद की जा सकती है करें क्योंकि एक समय था जब हम दूसरों लोगों के पास जाते थे तो वह लोग कहते थे कि अभी समय नहीं कल आना आदि परन्तु संस्था के सदस्य अपने कीमती समय में से लोगों की सेवा के लिए समय निकालकर लोगों की परेशानी दूर करने की पूर्ण कोशिश करते हैं।
संस्था के उपाध्यक्ष मो. रियाज ने कहा कि लोगों को खाता खुलवाने में कभी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि दिल्ली में लोग बचत करते तो हैं परंतु उनके पास बचत खाता नहीं होता जिससे वह अपनी बचत को लंबे समय तक रख सकें। इसलिए संस्था की एक बैठक हुई जिसमें सभी ने यह निर्णय लिया कि हम डाक घर में जाकर बात करें कि वह हमारे यहां बचत खाता कैंप आयोजित करें क्योंकि डाकघर में सिर्फ 50 रुपये में खाता खुल जाता है। 50 रुपये में कोई भी खाता खुलवा सकते हैं।

गुरुवार, 14 नवंबर 2013

न्यू जाफराबाद में बीएसपी का भाईचारा सम्मेलन का आयोजन

संवाददाता शाहरूख खान
उत्तरी पूर्वी दिल्ली। विधनसभा बाबरपुर के अन्तर्गत न्यू जाफराबाद के समुदाय भवन में बसपा के तत्वाधन में भाईचारा सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अघ्यक्षता ऑल इण्डिया जमीयतुल उलेमा-ए-हिन्द  के महासचिव दिल्ली प्रदेश व जमीयतुल कुरैशी दिल्ली प्रदेश महासचिव, हाजी मौ. यामीन ने कहा कि क्षेत्र में हिन्दू, मुस्लिम, भाईचारा सही बना हुआ है। 

उन्होंने जनता से अपील कि की भाईचारा और ज्यादा बनाए इसमें हमारे देश की मजबूती है। हर इन्सान को चाहिए कि वह जिस सरजमीन पर पैदा हुआ उसकी हिफाजत करें एकता ही अंख्डता है। मुजफ्फर नगर हुए दगों में उत्तर प्रदेश, एवं केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठेहीराते हुए कहा की यूपी सरकार के शासन में जो दंगा हुआ उसमें सरकार की लापरवाही हुई। केन्द्र सरकार चाहती तो 7 सितम्बर को आर्मी लगा कर दगें पर काबू किया जा सकता था। मगर आर्मी 9 सितम्बर को लगाई इससे जाहिर होता है। कि सरकार ने जानबूझकर दंगा नहीं रोकना चाहा।

उन्होने कहा कि बसपा ही ऐसी पार्टी है जो मुस्लिमों, दलितो, गरीबों पर जुल्म नहीं होने देती है। उन्होंने जनता से अपील की कि बसपा पार्टी को भारी मतों से विजयी बना कर विधनसभा में भेजे। मौ. हाजी यामीन एवं आबिद पहलवान अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बसपा में शामिल हुए। कार्यक्रम में हजारों लोगों की संख्या में लोगों कि उपस्थिति देखकर बसपा के लोग गदगद हुए।
हाजी मौ. यामीन समाजसेवा से जुड़े हुए समाजसेवक हैं और जिस लगन और मेहनत से समाजसेवा करते हैं। उसी लगन और मेहनत से बसपा पार्टी के लिए भी काम करेंगे, ऐसी हमें उम्मीद है। भाईचारा सम्मेलन में बसपा के ऑल इण्डिया तेली समाज के अघ्यक्ष शेर खान मलिक ने कहा कि भाजपा, काग्रेस एक सिक्के के दो पहलू है जैसे कहावत है चोर-चोर मौसरे भाई उन्होने दिल्ली को बर्बाद कर रख है।

उन्होने जनता से अपील की कि बसपा को विजयी बनाकर दिल्ली की हालत सुधरने का मौका दें। अत्याचार गुण्डागर्दी से मुक्ति बसपा ही दिला सकती है। इस मौके पर बसपा के उत्तरी पूर्वी लोकसभा प्रभारी चौ. सतीश (इंजीनियर), लोकसभा कोडिनेटर बसपा, हाजी समी सलमानी लोकसभा संयोजक, अब्दुल रहमान, आमिर राजा, रूप चन्द गौतम जिला अघ्यक्ष, मामा नूर हसन, मौ. जाकिर, सुलेमान प्रधान, हाजी आफताब , उपाध्यक्ष हाजी महरदिन, हाजी जुल्फेकार , चौ. बेद, हारून पहलवान, अनवर भाई, बब्बू भाई, रपफीक, मुल्लाजी अली, मकसूद, अमजद, गब्बर पहलवान, पप्ले पूर्व प्रत्याशी नगर निगम, सिकन्दर बख्श इलाही, सफी इलाही, हाजी मुन्ना अंसारी, हाजी याकूब, डा. उमर, सलीम पहलवान, हाजी नवाब, हाजी इफ्तेखार मलिक के अलावा हजारों लोग मौजूद थे।

 

बुधवार, 13 नवंबर 2013

बड़े अफसर जेल भेजे जाएं

श्याम कुमार  

जिस प्रकार कोई भी रेल-दुर्घटना होने पर रेल मन्त्री व रेल अधिकारियों के यह पिटेपिटाए बयान आया करते हैं कि ‘दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा’, उसी प्रकार नगरों में अतिक्रमणों के बारे में प्रशासनिक अधिकारियों के ये वाक्य प्रायः सुनने को मिलते हैं- ‘अतिक्रमणों व अतिक्रमणों के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कदम उठाया जाएगा’। लेकिन अधिकारी इस प्रश्न का उत्तर कभी नहीं देते कि उन्होंने अतिक्रमणकारियों एवं अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार अपने विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध अब तक कब-कब और क्या-क्या दण्डात्मक कार्रवाइयां की हैं? आजादी के बाद अब तक ऐसा ही हो रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय अनेक वर्षों से अतिक्रमणों को पूरी तरह हटाने का बार-बार आदेश व निर्देश जारी कर रहे हैं और कह रहे हैं कि सड़कें, पटरियां (फुटपाथ) एवं गलियां राहगीरों के लिए हैं, न कि दुकानदारी के लिए। लेकिन सम्बन्धित विभाग केवल दिखावे की खानापूरी कर न्यायालय को अतिक्रमण हटाने की भ्रामक एवं मिथ्या सूचना दे देते हैं। अब तो जैसे विभागों व अफसरों को न्यायालय की अवमानना का डर ही नहीं रह गया है। स्थिति यह हो गई है कि जब न्यायालय द्वारा अवमानना में कुछ बड़े अफसरों को जेल नहीं भेजा जाएगा, तब तक अतिक्रमण नहीं हटाए जाएंगे।

अतिक्रमण हटाने के बारे में कभी-कभी अधिकारी बड़े रोचक बयान दे देते हैं। एक अधिकारी ने कहा- ‘अतिक्रमणों को सबकी सहमति से हटाया जाएगा। इस कथन पर यह शेर फिट बैठता है- ‘इस सादगी पे कौन न हो जाएगा फिदा, लड़ते हैं मगर हाथ में तलवार भी नहीं।’ कल यह बयान भी आ सकता है कि चोरों, लुटेरों, अपहर्ताओं, हत्यारों आदि के विरुद्ध उनकी सहमति से कार्रवाई की जाएगी। कुछ समय पूर्व लखनऊ में एक अधिकारी ने बयान दिया था- ‘जमीन के नीचे बनी दुकानों का नागरिकों को बहिष्कार करना चाहिए, क्योंकि वहां उनके जानमाल का खतरा बना रहता है।’ बहुत खूब ! आप अवैध निर्माण हटाने की जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी जनता के गले मढ़ रहे हैं।

अतिक्रमणों ने न केवल लखनऊ को, बल्कि प्रदेश के समस्त नगरों को बुरी तरह अपने शिकंजे में जकड़ लिया है। पटरियों पर तो उनका पूरी तरह कब्जा हो ही चुका है, सड़कंें भी बुरी तरह उनकी गिरफ्त में हैं। सड़कों पर रंेग-रेंगकर यातायात चलता है तथा सर्वत्र जब-तब जाम लगा रहता है। अतिक्रमणों के कारण मार्ग-दुर्घटनाओं की भरमार हो रही है। अतिक्रमणकारियों ने शहरों को नरक बना डाला है और नागरिकों का जीना दूभर हो गया है। अतः अतिक्रमणों के विरुद्ध जब तक कठोरतम कार्रवाई नहीं की जाएगी, उनकी समाप्ति नहीं होगी। अतिक्रमणांे के सबसे बड़े कारण पुलिस विभाग, नगर निगम तथा अन्य स्थानीय निकाय हैं। सर्वविदित है कि अतिक्रमणकारी इन्हें नियमित ‘सुविधा शुल्क’ बांधकर चैन की बंशी बजाते हैं और ये लोग ‘मूंदउ आंख कतउ कोउ नाहीं’ की कहावत चरितार्थ करते हैं।

यदि वास्तव मंे अतिक्रमणों का सफाया करना है तो ये उपाय करने होंगे:- 1. प्रत्येक थानेदार एवं स्थानीय निकाय के अभियन्ताओं को इस बात के लिए प्रत्यक्ष रूप से पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाय कि वे अपने क्षेत्र में कहीं भी लेशमात्र अतिक्रमण न होने दें। इसके लिए वे अपने क्षेत्र में नित्य भ्रमण किया करें। यदि उनके क्षेत्र में कोई भी अतिक्रमण होता है और वह अतिक्रमण तत्काल नहीं हटाया जाता तो थानेदार व अभियन्ताओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। 2. जैसे ही कहीं पर अतिक्रमण हो, उसे उसी समय हटाकर अतिक्रमणकारी के विरुद्ध कारगर दण्डात्मक कार्रवाई की जाय। 3. प्रायः नेतागण भी अपनी नेतागिरी व कमाई के चक्कर में अतिक्रमणों को बढ़ावा देते हैं। अतः अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई में ऐसे नेताओं की बिलकुल न सुनी जाय।

(श्याम कुमार)

सम्पादक, समाचारवार्ता

ईडी-33 वीरसावरकर नगर

(डायमन्डडेरी), उदयगंज, लखनऊ।

मोबाइल-9415002458

ई-मेल : kshyam.journalist@gmail.com

मंगलवार, 12 नवंबर 2013

उत्तर प्रदेश का प्रत्येक नगर व कस्बा में अतिक्रमण-त्रासदी

श्याम कुमार

उत्तर प्रदेश का प्रत्येक नगर व कस्बा अतिक्रमणों एवं अवैध कब्जों से जिस प्रकार बुरी तरह ग्रस्त है, उसके परिणामस्वरूप सर्वत्र सड़क-दुर्घटनाओं की भरमार हो गई है। प्रदेश में नित्य सैकड़ों जानें जा रही हैं। आश्चर्य नहीं कि अतिक्रमणों एवं अवैध कब्जों के कारण प्रदेश को किसी दिन उत्तराखण्ड-जैसी त्रासदी का सामना करना पड़े।

मैं विगत लगभग 50 वर्षों से इस समस्या की ओर प्रदेश के शासन व प्रशासन का ध्यान बार-बार आकृष्ट कर रहा हूं। न्यायालय भी काफी समय से अतिक्रमणों के उन्मूलन का निरन्तर आदेश दे रहे हैं। लेकिन प्रशासन ने भैंस के आगे बीन बजाने वाली कहावत चरितार्थ करने की ठान रखी है। वह केवल दिखावे की कार्रवाई करता है, जिसके परिणामस्वरूप बीमारी लाइलाज होती जा रही है। अदालती चाबुक पड़ने पर किसी दिन कहीं पर अतिक्रमण हटाया भी जाता है तो भ्रष्टाचार में डूबे प्रशासन की कृपा से वहां अगले दिन पुनः पहले-जैसी स्थिति हो जाती है।

भ्रष्टाचार का वरदहस्त पाकर अतिक्रमणों व अवैध कब्जों ने अब कैंसर का रूप धारण कर लिया है। भ्रष्टाचारियों को तो अब अदालतों का भी भय नहीं रह गया है। हाल में एक अधिकारी ने, जो कभी जिला-प्रशासन में रह चुके थे, मुझे लखनऊ के एक थाने के बारे में बताया कि अतिक्रमणों, ठेलों, अवैध कब्जों आदि से उस थाने की नित्य कम से कम एक लाख रुपए की आमदनी है। उन्होंने कहा कि इसी के इर्द-गिर्द आय वाले कुछ और भी थाने हैं।

एक बड़ी समस्या यह है कि नगर निगम व विकास प्राधिकरण अतिक्रमण व अवैध कब्जे हटाने की जिम्मेदारी पुलिस पर डालते हैं और पुलिस इन दोनों विभागों पर। मेरा स्वयं का अनुभव है कि पुलिस महानिदेशक से दरोगा स्तर तक बस यही उत्तर मिलता है। जबकि स्पष्ट अदालती आदेश है कि जहां कहीं भी अतिक्रमण या अवैध कब्जा हटाया जाय, वहां उसके दुबारा न होने की जिम्मेदारी पुलिस की है, विशेश रूप से उस क्षेत्र के थाने की। लेकिन दुबारा अतिक्रमण होने पर अब तक किसी भी पुलिस अधिकारी को नहीं दण्डित किया गया है। नगर निगम व विकास प्राधिकरण की आम शिकायत रहती है कि उनके अभियान में समय पर पुलिस बल नहीं उपलब्ध कराया जाता है।

कुछ समय से यह नई बात देखने में आ रही है कि जब कहीं अतिक्रमण या अवैध कब्जा हटाया जाता है तो अतिक्रमण व अवैध कब्जा करने वाले यह चिल्लाने लगते हैं कि उन्हें हटाने की पहले सूचना क्यों नहीं दी गई? यह विचित्र तर्क है। यदि इस तर्क को मान लिया जाय तो कल चोर-डाकू भी यह आवाज बुलन्द कर सकते हैं कि उन्हें पकड़ने से पहले नोटिस क्यों नहीं दी गई? इसी प्रकार ‘पटरी दुकानदार संघ’ बनाया गया है। पटरियां (फुटपाथ) राहगीरों के चलने के लिए होती हैं, न कि दुकानदारी के लिए। यदि वेश्यावृत्ति के लिए कोई यूनियन बना ली जाय तो क्या वेश्यावृत्ति वैैध हो जाएगी ?

शासन को चाहिए कि प्रदेश के सभी समाचारपत्रों में एक बार बड़े-बड़े अक्षरों में यह विज्ञापन प्रकाशित करा दे कि सभी अतिक्रमणकारी व अवैध कब्जाधारी अपने अतिक्रमण एवं अवैध कब्जे तुरन्त हटा लें तथा इस विज्ञापन में दी गई सूचना को ही स्थाई रूप से नोटिस मान लें। इसकेे बाद कभी भी कहीं भी अतिक्रमण व अवैध कब्जे पूरी तरह हटा दिए जाएंगे तथा उनका सामान भी जब्त कर लिया जाएगा। तय है कि अतिक्रमणों एवं अवैध कब्जों के विरुद्ध वोटों का लालच छोड़कर जब तक कठोरतम कदम नहीं उठाया जाएगा, तब तक इस कैंसर का इलाज नहीं हो सकेगा। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति पुनः अतिक्रमण या अवैध कब्जा करे तो उसके विरुद्ध भी अत्यंत कड़ी दण्डात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

(श्याम कुमार)

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