शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2024

भर्ती परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार युवाओं के साथ घोर अत्याचार

 बंसत कुमार

17-18 फ़रवरी को उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में अनुचित संसाधनों का इस्तेमाल करने के आरोप में 244 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस खबर के खुलासे के बाद समाजवादी पार्टी समेत सभी विपक्षी दलों ने सरकार पर भर्ती परीक्षा में हो रही गड़बड़ी में संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए इस परीक्षा को निरस्त करके दुबारा से भर्ती परीक्षा आयोजित करने की मांग की है। यह सिर्फ एक परीक्षा में धांधली का मामला नहीं है बल्कि विगत कुछ वर्षो में आयोजित होने वाली अधिकांश परीक्षाओं में इस तरह की धांधली सामने आ रही है। इसी कारण से दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान परीक्षाओं में सफल होने के लिए अभ्यर्थियों द्वारा की जा रही धांधली को अफ़सोसजनक बताया। न्यायालय ने आगे कहा कि इस धांधली का परिणाम यह है कि निर्दोष और ईमानदार छात्र अपने साथ के लोगों के अव्यस्थित और अमर्यादित आचरण का शिकार बन रहे हैं। ऐसी स्थिति में राज्य और उनकी एजेंसियों के पास परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है।

न्यायालय की पीठ ने आगे कहा कि यह देखा गया है कि ऐसी परीक्षाएं आयोजित करने वाली एजेंसियों के लिए यह निर्धारित करना और पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है कि कितने छात्र इस तरह के तरीको और अनियमितताओं में शामिल हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली कौशल उद्यमिता विश्वविद्यालय द्वारा अधिसूचित रिक्ति में जूनियर सहायक के पद के लिए कई उम्मीदवारों की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कानून का सुव्यवस्थित सिद्धांत यह है कि चयन प्रक्रिया को दागदार नहीं किया जा सकता। किसी भी प्रकार की परीक्षा आयोजित करते समय चयन प्रक्रिया की पवित्रता बनाये रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। मजे की बात यह है कि इस तरह की गड़बड़ी के लिए देश में एक सॉल्वर गैंग काम कर रहा है जिससे असली अभ्यर्थी के स्थान पर किसी और को बैठाकर प्रश्न पत्र हल कराए जाते हैं। यद्यपि पुलिस एवं प्रशासन दावा कर रही है कि दो दिन चली उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा में धांधली रोकने के कड़े इंतजाम किये गए थे।

पारंपरिक पुलिस के साथ-साथ सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे, जैमर और बायोमैट्रिक संसाधनों का इस्तेमाल कर फर्जी अभ्यर्थियों, पेपर लीक और साल्वर गैंग पर नजर रखी गई। कई जगहों पर छात्राओं के जूड़े तक चेक किये गए। इसके लिए पुलिस के साथ आरएएफ और पीएसी को भी लगाया गया, साथ ही एसटीएफ भी लगातार निगरानी करती रही थी। इसके बावजूद प्रदेश भर में तमाम सालवर और अनुचित संसाधनों का प्रयोग करने वाले अनेक अभ्यर्थी गिरफ्तार किए गए। कहने का अभिप्राय यह है की सरकार की ओर से इतने भारी भरकम इंतजाम के बावजूद फर्जीवाड़ा रोकने में सरकार कामयाब नहीं हो पाई। नकल की कोशिश में लगे लोगों के पास से भारी संख्या में नकल सामग्री, माइक्रोफोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, फर्जी एडमिट कार्ड, फर्जी आधार कार्ड आदि बरामद किए गए। अभ्यर्थियों को नकल कराने के एवज में लाखों रूपए की नगद राशि वसूली गई। कहीं-कही तो सालवर ब्ल्यूटूथ डिवाइस से नकल कराते हुए पकड़े गए।

इस परीक्षा में पेपर लीक का मुद्दा भी बहुत गरमाया हुआ है। सोशल मीडिया के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी इसे खूब उछाला। एक ओर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर इस परीक्षा को निरस्त कर दुबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की। वहीं कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने कहा कि जो युवा रोजगार चाहते हैं वे इसके लिए परीक्षा की तैयारी करते हैं और पेपर देने जाते हैं पर इससे पहले ही पेपर लीक हो जाता है। पेपर लीक हो जाने से लाखों युवा निराश हैं और उनके मन में आक्रोश है। यह पहली बार नहीं हो रहा है, पेपर लीक होने की घटनाएं पूरे देश में वर्षों से हो रही हैं। उत्तर प्रदेश में ये घटनाएं तब भी हो रही थी जब प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव थे। लगभग एक दशक पहले जब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव जी मुख्यमंत्री थे तब सिपाहियों की भर्ती हुई जिसमें रिश्वत लेकर और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे फिर भी इस परीक्षा से चुने हुए अभ्यर्थी ड्यूटी भी जॉइन कर लिए गए पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद उन्हें घर बैठा दिया गया पर उसके बाद मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके न्यायालय के आदेश आने के बाद दुबारा ड्यूटी पर बुला लिया गया। इस प्रकार की घटनाओ से युवा जो रात-दिन एक करके परीक्षा की तैयारी करते हैं उनमें निराशा व्याप्त होती हैं।

यह हाल सिर्फ उत्तर प्रदेश पुलिस का ही नहीं है। देश के अधिकांश भर्ती बोर्डों का यही हाल है, दो वर्ष पूर्व रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती प्रक्रिया हुई और इसमें भारी पैमाने पर सालवर्स के इस्तेमाल होने की खबरे आई और रेल प्रशासन को युवाओ का विरोध झेलना पड़ा। कई जगह गाड़ियां रोकी गई, अगर इसी प्रकार सरकारी नौकरियों में धांधलियां चलती रही तो सरकार पर, न्यायालय और प्रशासन पर से लोगों का भरोसा उठ जायेगा। इस तरह की भर्ती भी हमारी सरकार की सेवाओ की दक्षता पर भी असर डालेंगी। आज हमारे गांवों में रहने वाले मध्यम वर्ग के युवाओं के मन में यह भ्रांति उठने लगी है कि रसूक और पैसे के बगैर सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल है। युवाओं के मन से यह भ्रम निकालने के लिए हमें अपनी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शिता पूर्ण बनाना होगा और तभी हम अपने प्रशासनिक इकाइयों से बेहतर परिणाम की आशा कर सकेंगे। गलत रास्ते से चुनकर आए लोग धनवान बनने के लिए गलत ही करेंगे और हमें यह बात समझ लेना चाहिए। सरकार को भी भर्ती प्रक्रिया को निरंतर चलने वाली सामान्य प्रक्रिया के स्थान पर इवेंट के रूप में आयोजित करने से बचना चाहिए जितने बड़े पैमाने पर भर्ती प्रक्रिया होगी उतना ही गड़बड़ी की आशंका रहेगी।

सभी राजनीतिक दल और विभिन्न सामाजिक संगठन जाति के आधार पर आरक्षण के लिए पक्ष-विपक्ष आपस में टकराते हैं पर सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती प्रक्रिया में चल रही धांधली पर कोई भी आवाज़ नहीं उठाता। यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि विगत कुछ वर्षों में चाहे कोई भी दल सत्ता में हो सरकारी नौकरियों में चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और संदेह से परे नहीं रही है। इन परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर साल्वरों का पकडा जाना इसका प्रमाण है यदि हम सरकारी नौकरी मिलने को पूर्व की भांति योग्यता और मेहनत का परिणाम स्थापित करना चाहते हैं तो हमें इस समस्या का समाधान करना होगा।

अबू धाबी में इतिहास के नए अध्याय का निर्माण

अवधेश कुमार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में अक्षरधाम मंदिर का उद्घाटन निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक घटना है। किसी इस्लामिक देश में संपूर्ण सनातन रीति-रिवाज से मंदिर का निर्माण, पूजन, प्राण प्रतिष्ठा , उद्घाटन और बिना किसी बाधा के सारे कर्मकांडों का पालन होना सामान्य घटना नहीं है। इस मंदिर के निर्माण की कहानी पढ़ने के बाद लगता है कि असंभव संभव हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी को इस मामले में सौभाग्यशाली मानना होगा कि उनके कार्यकाल में ही इसके लिए जमीन मिली, शिलान्यास हुआ और उन्हें ही इसके उद्घाटन का भी अवसर मिला। उद्घाटन के दौरान अपने भाषण में उन्होंने कहा भी कि मैं सौभाग्यशाली हूं कि अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अबू धाबी में अक्षरधाम मंदिर के उद्घाटन का साक्षी बना हूं। 20 अप्रैल, 2019 को महंत स्वामी महाराज और प्रधानमंत्री मोदी ने इसका शिलान्यास किया था और लगभग 5 वर्ष बाद दोनों ने इसका उद्घाटन भी किया। 27 एकड़ में फैला यह मंदिर 108 फीट ऊंचा है जिसकी लंबाई 262 फिट एवं चौड़ाई 180 फिट है। इसमें 18 लाख पत्थर की ईंटें लगी है और 30 हजार मूर्तियां हैं। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नह्यान की उदारता का अभिनंदन करना होगा जिन्होंने न केवल इसकी अनुमति दी बल्कि कुल 27 एकड़ जमीन दी तथा हर तरह का आवश्यक सहयोग भी किया। किंतु यह भी सच है कि प्रधानमंत्री मोदी ने पहल नहीं की होती तो मंदिर का कितने भव्य रूप में सरकार होना संभव नहीं होता।

मंदिर का सपना 1997 में देखा गया था। सच यही है कि मोदी के आने के बाद ही काम आगे बढ़ा। अक्षरधाम मंदिर निर्माण समिति के लोग सरकार से संपर्क करते रहे किंतु ऐसी सफलता नहीं मिली। सन 2015 में प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की पहली संयुक्त अरब अमीरात यात्रा के दौरान उन्होंने सही तरीके से इस विषय को रखा और फिर रास्ता निकलने लगा। 

अक्षरधाम के दुनिया भर में 1200 मंदिर हैं और सबकी अपनी-अपनी विशेषताएं हैं। किंतु अबू धाबी का मंदिर सबसे विशिष्ट और भविष्य की दृष्टि से विश्व में अलग-अलग संस्कृतियों , सभ्यताओं, मजहबों आदि के बीच संबंध तथा शांति की आशा पैदा करने वाला है। यदि संयुक्त अरब अमीरात जैसे पूर्ण इस्लामी शासन के अंदर वैदिक हिंदू रीति से मंदिर का निर्माण और कर्मकांड संभव है तो यह मानने का कोई कारण नहीं कि मजहबी कट्टरपंथ को समन्वयवादी परस्पर सहकार की दिशा में मोड़ा नहीं जा सकता। मुख्य बात है पहल करने और उसके अनुरूप भूमिका निभाने की। हिन्दू या सनातन संस्कृति की विशेषता ही समन्वयवादी है। इसी में वह क्षमता है जो सभी मजहबों, पंथों, संस्कृतियों-सभ्यताओं के अंदर एक ही भाव को महसूस कर सबके बीच समन्वय और सहयोग कायम करने का नेतृत्व कर सकता है। प्रधानमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा भी कि एक ही ईश्वर को, एक ही सत्य को ज्ञानी अलग-अलग तरह से बताते हैं। यह भारत की मूल चेतना का हिस्सा है। हमें विविधता में बैर नहीं लगता, बल्कि विविधता ही विशेषता लगती है। जैसा प्रधानमंत्री ने बताया मंदिर में पग-पग पर विविधता में विश्वास की झलक दिखती है।  दीवारों पर इजिप्ट के धर्म और बाइबिल की कहानियां उकेरी गई हैं तो वॉल ऑफ हारमनी को बोहरा समाज ने बनवाया है तथा लंगर की जिम्मेदारी सिख भाइयों ने ली है। 

वास्तव में इस मंदिर में हर देवी देवता के मंदिर हैं और उनकी लीलाएं पत्थरों पर मूर्तियों से उतारी गई है। पर इसको इस तरह निर्मित किया गया है कि विश्व का कोई भी मजहब व पंथ इसे अपने से अलग न देखे। मंदिर के निर्माण में हर धर्म के व्यक्ति ने योगदान दिया है। इस मंदिर का निर्माणकर्ता बीएपीएस यानी बचासन वासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामी नारायण संस्था हिंदू संस्था है, जमीन इस्लामी सरकार ने दिया, मुख्य आर्किटेक्ट ईसाई, निदेशक जैन , प्रोजेक्ट मैनेजर सिख ,स्ट्रक्चर इंजीनियर बौद्ध तथा कंस्ट्रक्शन कांट्रैक्टर पारसी रहे। मंदिर की सात मीनारें संयुक्त अरब अमीरात की सात अमीरातों का प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति का उल्लेख करते हुए कहा कि सबके सम्मान का यही भाव हिज हाइनेस शेख जायेद के जीवन में दिखता है। उनका विजन है- वी आर ऑल ब्रदर्स।

संयुक्त अरब अमीरात सात अमीरातों के संग से बना है, इसलिए मंदिर के सात शिखर में सात भारतीय देवता विराजमान हैं, मंदिर में सात गर्भ गृह हैं। अगर भारतीय परंपरा के जानवर गाय, हाथी और मोर है तो अरब देश के ऊंट, रेगिस्तान के बकरी, बाज, फलों में अन्ननाश और खजूर को भी दीवारों में उकेरा गया है। 

इस तरह यह मूल रूप से हिंदू मंदिर होने और हिंदुत्व व सनातन की विश्व कल्याणकारी विचार और भूमिका को पूरी तरह प्रभावी तरीके से रखते हुए भी सभी धर्म के प्रति सम्मान की भावना को स्वीकारने व बल देने का स्थल बन सकता है।  आखिर संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति ने सब कुछ समझने के बाद ही इसके लिए स्वीकृति दी होगी। ध्यान रखिए, स्वयं अक्षरधाम संस्था ने दो प्रकार के मॉडल बनाए थे। एक संपूर्ण वैदिक हिंदू रिति का था और दूसरा एक समान भवन की तरह दिखने वाला था जिसमें अंदर देवी- देवताओं की मूर्तियां और अन्य चीजें। दूसरे मॉडल में बाहर हिंदू चिह्न नहीं थे। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि जब यह प्रस्ताव शेख जायेद के पास गया तो उन्होंने कहा कि जो मंदिर बने वह सिर्फ मंदिर न बने, मंदिर जैसा दिखे भी। तो वह यूं ही नहीं हुआ होगा। जिस मजहब में बूतपरस्ती के विरुद्ध इतनी बातें हो वहां उन्हें समझा कर तैयार करना आसान नहीं रहा होगा। निश्चित रूप से हिंदुत्व की व्यापकता, जिसमें पूरे ब्रह्मांड के एक-एक कण के प्रति अपना दायित्व , सबमें एक ही तत्व देखने व सबको सम्मान देने के भाव को सही तरीके से समझाया गया होगा। एक बार अगर उन्हें समझ आ गया कि हिंदुत्व के अंदर किसी दूसरे से घृणा या किसी मजहब को छोटा करने का भाव नहीं है, बल्कि सम्मान का है तो फिर भविष्य में इसका असर केवल विपक्षीय नहीं वैश्विक भी हो सकता है।  प्रधानमंत्री ने आशा प्रकट की किक् मंदिर मानवता के लिए बेहतर भविष्य के लिए बसंत का स्वागत करेगा। वास्तव में अगर हिंदू धर्म का यह मंदिर अपने उद्देश्य के अनुसार पूरी दुनिया के लिए सांप्रदायिक सौहार्द्य और वैश्विक एकता का प्रतीक बनने लगा तो सभ्यताओं और मजहबों के बीच टकराव और संघर्ष की तस्वीर बदलने लगेगी।

तो अबू धाबी में मंदिर के उद्घाटन के साथ इतिहास का वह अध्याय आगे बढ़ा है जो हिंदुत्व और भारत राष्ट्र का मूल लक्ष्य रहा है। यानी सभी धर्मों के अंदर एक ही भाव है और जीव-अजीव सबके अंदर एक ही तत्व, इसलिए हमें सबके कल्याण के रास्ते पर चलना है। अब तक संयुक्त अरब अमीरात अपने बुर्ज खलीफा, शेख जायेद मस्जिद और हाईटेक गगनचुंबी भवनों, मौल और मार्केट के लिए जाना जाता था।  उसमें अब अबू धाबी का मंदिर भी जुड़ गया है। निश्चय ही न केवल संयुक्त अरब अमीरात और खाड़ी के अन्य देशों से बल्कि विश्व भर से लोग वहां आएंगे और हिंदू धर्म ,संस्कृति ,सभ्यता की व्यापकता को देखेंगे, समझेंगे।  विश्व के दूसरे प्रमुख मजहबों के पूजा स्थलों में इस तरह का व्यापक समन्वयवादी साकार स्वरूप नहीं दिखाई पड़ता। इससे भारतीय संस्कृति-सभ्यता के प्रति उनके मन में सम्मान बढ़ेगा। इससे लंबे समय से हर स्तर के विद्रोहियों द्वारा सनातन और हिंदुत्व के साथ भारत एवं यहां की सभ्यता संस्कृति के बारे में फैलाए गए दुष्प्रचारों का खंडन होगा। यही नहीं इस तरह के स्थलों और विचारों के प्रसार के साथ भारत को विश्व कल्याण की दृष्टि से सभ्यताओं , संस्कृतियों और धर्मौ के बीच समन्वय, सौहार्द्र व बंधुत्व का संस्कार कायम करने के लिए नेतृत्वकारी भूमिका स्वयमेव प्राप्त होगी।

अवधेश कुमार, ई-30, गणेश नगर, पांडव नगर कंपलेक्स, दिल्ली- 110092, मोबाइल- 981027208

गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024

स्वामी प्रसाद मौर्य ने लॉन्च किया अपना नया राजनीतिक दल 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी'

-दिल्ली में स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपनी राजनीतिक पार्टी 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी' लॉन्च की

नई दिल्ली। स्वामी प्रसाद मौर्य ने गुरुवार को अपने नए राजनीतिक दल 'राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी' लॉन्च कर दी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी की घोषणा की गई। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थकों ने एक साथ दलितों और पिछड़ों के लिए आवाज उठाने का प्रण लिया।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने तीन दिन पहले समाजवादी पार्टी पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए पार्टी सदस्यता और एमएलसी पद से त्यागपत्र दे दिया था। उनके इस कदम को लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीति के जानकारों के अनुसार, स्वामी के इस कदम से राजनीतिक तौर पर सबसे ज्यादा नुकसान समाजवादी पार्टी को ही होगा।

इस मौके पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि देश बहुत संकट से जूझ रहा है। भारत का संविधान खतरे में है, लोकतंत्र की हत्या हो रही है. एक विशेष जाति के लोगों को पदोन्नति देकर सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं. केंद्र सरकार किसानों पर लाठीचार्ज कर रही है, उनकी गलती क्या है? वे सिर्फ एमएसपी की गारंटी मांग रहे हैं।'

पूर्व सपा नेता ने कहा कि पहले केंद्र ने जीएसटी के नाम पर लोगों का शोषण किया, अब वे ईडी के माध्यम से छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ रही है. ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स का दुरुपयोग किया जा रहा है. विपक्षी नेताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. जहां भी विपक्ष की सरकार है, बीजेपी वहां के नेताओं की आवाज दबा रही है।

उन्होंने कहा कि आरएसएस या बीजेपी से किसी ने भी आजादी की लड़ाई नहीं लड़ी. बीजेपी सरकार सभी सरकारी एजेंसियों और संगठनों को अडानी और अंबानी को बेच रही है और जब सरकारी संगठन निजी हाथों में जाते हैं, तो वहां आरक्षण का मतलब नहीं होता. वे आरक्षण खत्म करना चाहते हैं. बीजेपी राम का नाम लेकर देश भर में अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है. वे रामभक्त नहीं हैं, वे सिर्फ लोगों को वास्तविक मुद्दों से भटकाना चाहते हैं।

बता दें कि इसी साल 13 फरवरी को स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी में महासचिव पद छोड़ दिया था और हाईकमान पर भेदभाव का आरोप लगाया था. वह 20 साल बसपा में बड़े पदों पर रहे और मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. इसके बाद 2017 के चुनाव से पहले स्वामी ने पाला बदल लिया था और बीजेपी में शामिल हो गए थे. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी तो स्वामी को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हालांकि, 5 साल बाद ही उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया और 2022 के चुनाव से पहले सपा में शामिल हो गए थे. अब उन्होंने सपा भी छोड़कर अपनी अलग पार्टी का गठन किया है।

बुधवार, 21 फ़रवरी 2024

बिहार की जनता के बारे में कौन सोच रहा है

अभिषेक गुप्ता
बिहार मे नितिश कुमार ने एक बार फिर बहुमत हासिल कर लिया। पाला बदलने के बाद भी उनका मुख्यमंत्री का पद बच गया। उनकी घरवापसी हो गई और भाजपा के साथ मिलकर फिर से उन्होंने बिहार में सरकार बना ली। महागठबंधन से नितिश कुमार के अलग होने के कारण क्या रहे यह समय बताएगा। यह सवाल उनसे कोई पूछता भी नहीं। इससे पहले नितिश कुमार एनडीए से क्यों अलग हुए इसका भी ठोस कारण आजतक नहीं पता चला। एनडीए से पहले दो बार अलग होने के कारण क्या है, इस पर तमाम चर्चाएं होती रही, लेकिन खुलकर कुछ नहीं पता चला। बिहार में पिछले तीस सालों में तमाम राजनीतिक उठापटक होते रहे है। इन तमाम उठापटक के बीच बिहार में एक सवाल यही उठता रहा है कि आखिर बिहार की जनता इस उठापटक में कहां है। राजनीतिक दल और सरकार उनके बारे में कितना सोच रहे है। तमाम राजनीतिक उठापटक और सरकार के गिरने बचाने के खेल के बीच जनता तो गायब है। जनता के मुद्दे गायब है। बिहार के तमाम मुद्दे वहीं के वहीं है। गरीबी बढी है, बेरोजगारी बढी है, देश भर में मजदूरों की आपूर्ति का बड़ा केंद्र आज भी बिहार ही है।
निशिचत तौर पर इस उठापटक के बीच नितिश कुमार ने अपना जनसमर्थन खोया है और उनके व्यक्तिव पर सवाल उठा है। आम जनता भी बार-बार पाला बदलने के उनके इस रवैये से नाराज है। ग्रामीण इलाकों में नितिश कुमार ने जनसमर्थन खोया है। जो नितिश कुमार किसी जमाने में सुशासन बाबू जाने जाते थे उन्होंने अपनी सरकार बचाने के लिए बाहुबालियों का सहारा लिया। उन्होंने अपनी सरकार बचाने के लिए अनंत सिंह, आनंद मोहन और प्रहलाद यादव का सहारा लिया। ये बाहुबाली किसी जमाने में नितिश कुमार को फूटी आंख नहीं सुहाते थे। अनंत सिंह जेल में है। उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक है। उन्होंने राजद का पाला बदल सता का दामन थामा। नितिश कुमार की सरकार बचायी। आनंद मोहन जेल से छूटे है। उनके बेटे चेतन आनंद विधायक है। आनंद मोहन के बाहुबल को नितिश हमेशा चुनौती देते रहे। लेकिन उन्होंने आखिर अपनी सरकार बचाने के लिए आनंद मोहन का सहारा लिया, उनके बेटे का वोट उन्हें मिला। चेतन आनंद जो राजद के विधायक थे वे सरकार के साथ चले गए।
निश्चित तौर पर इस सारे घटनाक्रम के दौरान सबसे ज्यादा मजबूत होकर राजद के नेता तेजस्वी यादव उभरे है। नितिश कुमार के साथ गठबंधन के दौरान उन्होंने अच्छा काम किया और लालू यादव के जंगल राज की परछाई से निकलने की कोशिश की। उनका ए टू जेड की राजनीति अब बिहार में प्रभाव दिखा रही है। विधानसभा मे नितिश कुमार के विश्वास मत के दौरान तेजस्वी यादव ने काफी शानदार भाषण दिया और इसकी सराहना उनके विरोधी भी कर रहे है। उन्होने अपने भाषण के दौरान कोई उग्रता नहीं दिखायी। उन्होंने काफी शालीनता से सता पक्ष को जवाब दिया और यही जवाब सता पक्ष को निरुतर कर गया। तेजस्वी ने कहा कि क्रेडिट लेने पर सवाल उठाया जा रहा है। तेजस्वी ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने जो क्रेडिट लिया वो जायज था। बिहार में गठबंधन की सरकार ने जो काम किया उसका क्रेडिट सिर्फ मुख्यमंत्री नहीं ले सकते है। क्योकि जिन विभागों ने काम किया था वो उनका विभाग था, मंत्री उनके थे। तेजस्वी ने अपने भाषण के दौरान तंज कसा कि क्या मोदीजी गारंटी लेंगे कि यह सरकार फिर से पलटी नहीं मारेगी।
हालांकि तमाम उठापठक के बीच अहम चिंता यह है कि राजनेता सत्ता प्राप्त करने के लिए लड़ाई ल़ड़ रहे है। लेकिन राज्य आज भी देश के गरीब राज्यों में गिना जाता है। किसी जमाने में बंगाल का हिस्सा रहा यह राज्य आज भी बदहाली की स्थिति में है। ब्रिटिश राज के दौरान बिहार अलग राज्य न होकर बंगाल का हिस्सा था और लंबी मांग के बाद ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली दरबार में बिहार (आज के ओडिशा और झारखंड) को बंगाल से विभाजित कर एक राज्य बनाने की घोषणा की थी। 22 मार्च 1912 को बिहार को बंगाल से अलग कर एक नया प्रांत बनाया गया था और बाद में 1935 में ओडिशा (उस वक़्त उड़ीसा) को बिहार से अलग एक नए प्रांत का दर्ज़ा दिया गया। इसके बाद फिर 15 नवंबर 2000 को बिहार के दक्षिण हिस्से को अलग कर झारखंड के तौर पर एक नया राज्य बनाया गया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि उड़ीसा और झारखंड जैसे राज्य बिहार से आगे निकलने की कोशिश में है, लेकिन बिहार को लेकर गंभीर चिंता यहां के राजनेताओं ने नही की। 
आज 21 वीं सदी में भी बिहार की हालत बदहाल है। राज्य में लगभग 1 करोड़ खेती से जुड़े है जो राज्य के लगभग 8 प्रतिशत है। वहीं 2 करोड़ के करीब लोग श्रमिक है। राज्य के 63.74 फीसदी यानी करीब 29.7 लाख परिवार रोजाना 333 रुपये से कम यानी 10,000 रुपये मासिक से कम पर गुजारा करते हैं। वहीं 34.13 फीसदी या एक तिहाई से अधिक लोग रोजाना 200 रुपये या उससे कम पर गुजर बसर करते हैं। ये आंकड़े बताते है कि राज्य के नेताओं और शासनतंत्र ने राज्य के विकास के लिए कोई खास काम नहीं किया। दिलचस्प बात यह है कि इन आंकड़ों के बाद भ  राज्य के तमाम नेता बड़े बड़े दावे करते है। बिहार की इस बदहाली के लिए तमाम राजनीतिक दल और इसके नेता जिम्मेवार है। हाल ही मे विश्वासमत के दौरान यह दिखा किस तरह से विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई, पैसे के लेनदेने के आरोप लगे और अब तो इस मामले में गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ये तमाम घटनाएं यह दिखाती है को बिहार का एक तबका खासा अमीर हो गया, जबकि एक बड़ा तबका खासा गरीब है। इसके लिए राज्य के तमाम नेताओं को आत्ममंथन कर राज्य के विकास के लिए काम करना होगा।
(राजनीतिक विश्लेषक एवं स्तंभकार)

उत्तरखंड के कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किया राइजिंग इंडिया डेवलपमेंट एक्सपो का उद्घाटन

नई दिल्ली। मंत्री ने बेहतर स्वास्थ्य के लिए मण्डया/बाजरा अपनाने पर जोर दिया तथा आजादी के 100वें वर्ष मानी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। यह दृष्टिकोण नार्थिक विकास, सामाजिक प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता और सुशासन सहित विकास के विभित्र पहलुओं को शामिल करता है। आज माननीय मंत्री जी ने इंडिया एक्सपी सेंटर एवं मार्ट ग्रेटर नोएडा दिल्ली एनसीआर में राइजिंग इंडिया डेवलपमेंट एक्सपो का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी 22 में 24 फरवरी 2024 तक प्रदर्शित रहेगी। अपने उद्घाटन भाषण में मंत्री ने लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए बाजरा अपनाने की सलाह दी, वह प्रदर्शनी में प्रदर्शित मशीनरी और उपकरणों ने बहुत प्रभावित हुए।

उपरोक्त एक्सपो का आयोजन पिक्सी एक्सपो मीडिया एवं ग्लोबल मिडिया ग्रुप द्वारा इंडिया एक्सपो सेंटर एवं मार्ट, ग्रेटर नोएडा में किया जा रहा है। सी में जधिक संगठन जपने उत्पादों, भविष्य की रणनीति जऔर परिवर्तनकारी पहल के साथ भाग ले रहे हैं जो हमारे राष्ट्र की प्रगति को आगे बड़ा रहे हैं क्योंकि हम अगले कुछ वर्षों में एक विकसित अर्थव्यवस्था की ओर यात्रा कर रहे हैं। यह एक्सपो प्रभावशाली सरकारी योजनाओं को प्रदर्शित करने और भारत के भविष्य को आकार देने के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करता है। इस मेगा इवेंट में लगभग 30 एमएसएमई, 15 राज्य सरकार के बागवानी बोर्ड और अन्य उद्योगों के 60 मे अधिक निजी प्रमुख कम्पनीयां भाग ले रहे हैं। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद सीएसआईआर कई नबीन उत्पाद प्रदर्शित करेगा जो किसानों के निए उपयोगी होंगे बऔर खेती की प्रक्रिया की आगान बनाएंगे।

पृथ्वी विज्ञान हमारे रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, मौसम विज्ञानी मौसम का अध्ययन करते हैं और खतरनाक तुफानों पर नजर रखते हैं। जलविज्ञानी पानी का अध्ययन करते हैं और बाड़ की चेतावनी देते हैं। भूकंपविज्ञानी भूकंपों का अध्ययन करते हैं और यह अनुमान लगाने की कोशिश करते हैं कि वे कहाँ टकराएँगे। यह भविष्यवाणी जब किसानों को कई तरह में मदद कर रही है।
बाजरा, उपभोक्ताओं, किमानों और पर्यावरण को लाभ पहुंचाता है। वे स्वस्थ आहार का एक अच्छा स्रोत हैं एवं वे कृषकों और जलवायु को लाभ पहुँचाते हैं कम पानी वाले होते हैं और नियमित रूप से खेती करने में सक्षम होते हैं।

सरकार की योजना देश-विदेश में कई कार्यक्रम आयोजित करने की है बाजरा और अन्य पोषक अनाजों को लोकप्रिय बनाने के लिए। इसके अलावा, सभी राज्य सहित भारत सरकार के मंत्रालय/विभाग सरकारों के समन्वय से पोषक अनाजों को बढ़ावा देंगे। संयुक्त राष्ट्र के जादेश पर भारत में 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष पोपित किया। भारत सरकार की पहन गहन बाजरा संवर्धन के माध्यम से पोषण सुरक्षा के लिए सरकार में बाजरा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं जैसे कि घरेलू और वैश्विक मांग पैदा करना और पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना। बाजरा के पोषण मूल्य को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने बाजरा को भी पोषक तत्व के रूप में अधिसूचित किया है।

बाजरा मूल्य श्रृंखला में हजारों स्टार्टअप काम कर रहे हैं भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान ने 250 स्टार्टअप शुरू किए हैं। बाजरा के महत्व पर जोर देते हुए नाथों साधनहीन किसानों के लिए भोजन और पाउडर की आपूर्ति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाजरा पारंपरिक भोजन है एशिया और अफ्रीका में 59 करोड लोग। बाजरा ही एकमात्र ऐसी फसल है जो भविष्य में भोजन, चारा, ईंधन, कुपोषण, जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का गमाधान करेगी। बाजरा विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कैल्जियम, से भरपूर होता है नौह पोटेमियम, मैग्रीशियम, जस्ता और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले बाजरा होते हैं गेहूं से एलर्जीध्क्षसहिष्णु बच्चों के लिए उपयुक्त हैं। बाजरा उगाने के कई फायदे हैं: न्यूनतम वर्षा आधारित फसल होना उर्वरकों का उपयोगय कोई कीटनाशक नहीं क्योंकि वे कीटों के हमले के प्रति कम संवेदनशील होते हैंप बाजरे के बीजों को वर्षों तक भंडारित किया जा सकता है, जिससे सुखे में भी फायदा होता है।

माननीय मंत्री जी ने सुझाब दिया कि किसानों को आमन्दनी बड़ानें के लिए पारम्परिक खेती से जैविक खेती एवं बागवानी की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिये। इस सम्बन्ध में सरकार के विभिन्न स्किमों को किसानों तक पहुचानें के लिए इस तरह के आयोजन लगातार होते रेहने चाहिए इस सम्बन्ध में आयोजकों के सफल प्रयास के लिए मंत्री जी ने ग्लोबल मिडिया के मी.ई.ओ श्री चालिन्द्र कुमार जी एवं उनकी पुरी टिम को धन्यवाद दिया।

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