मंगलवार, 8 जुलाई 2014

08-07-14 to 14-07-2014


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सोमवार, 30 जून 2014

कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने व सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की

संवाददाता

 

नई दिल्ली। नई पीढ़ी-नई सोच(पंजी) संस्था के संस्थापक व अध्यक्ष साबिर हुसैन ने रमजान का पाक महीना शुरू होने पर स्थानीय निगम पार्षद श्रीमती तुलसी को एक पत्र लिखकर मांग की है कि रमजान का पाक महीना शुरू हो चुका है व आपका धर्मपुरा वार्ड (वार्ड नं. 233) जो एक घनी आबादी वाला मुस्लिम क्षेत्र है। इसमे अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं तथा इस क्षेत्र में 10 से 15 मस्जिदें व 10 से 15 मदरसे हैं। 

उन्होंने आगे बताया जैसा कि आपको मालूम है कि 29-6-2014 से रमजान का पवित्र महीना शुरू हो गया है व यह (30 दिनों तक) 29-7-2014 तक जारी रहेगा। जिस कारण मस्जिदों व मदरसों के आस-पास शाम के समय में सफाई करवाना अनिवार्य है क्योंकि यहां पर नमाज व रोजा इफ्तार आदि का आयोजन भी किया जाता है।

उन्होंने कहा कि यहां पर (30 दिनों तक) सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का कष्ट करें जिससे रमजान के पूरे महीने सफाई का कार्य सुचारू रूप से चल सके।



गुरुवार, 19 जून 2014

मोदी सरकार और भारत के लिए असाधारण चुनौती

अवधेश कुमार

नरेन्द्र मोदी सरकार के लिए और भारत के लिए विदेश के मोर्चे से यह असाधारण चुनौती है। भारत सरकार ने निर्माण कंपनी में काम करने वाले 40 भारतीयों के अगवा होने की बात मान ली है। इराक संकट का असर भारत में तेल की किल्लत के रूप में सामने आने की चर्चा हम कर रहे थे। भारत जिन देशों से सबसे ज्यादा तेल मंगवाता है उनमें इराक दूसरे नंबर पर है। लेकिन यह ऐसा संकट है जिससे निपटना कठिन है। इराक के मोसुल शहर में एक परियोजना पर काम कर रहे 40 भारतीयों को अगवा किए जाने के पीछे सुन्नी आतंकी संगठन आईएसआईएस  (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड अल-शाम) का हाथ माना जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने 18 जून को यह खबर आने पर पहले तो अपहरण की पुष्टि नहीं की बस यह माना कि इन भारतीयों से संपर्क नहीं किया जा सका है। जाहिर है, वहां से सच की पुष्टि कठिन थी,  लेकिन शाम होते-होते विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपहरण की खबर को सही बताया। आईएसआईएसयह एक छाता संगठन है, जिसके साथ कई सुन्नी संगठन हैं, स्व. सद्दाम हुसैन की बाथ पार्टी के लोग भी हैं। यह ऐसा खतरनाक आतंकवादी संगठन है जिसका केवल संबंध सउदी अरब से माना जाता है, अन्य  बाहरी दुनिया से नहीं। पहले यह अल कायदा का रुप माना जाता था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि शियाओं के खिलाफ इसकी जघन्य हिंसा को देखते हुए अल कायदा ने संबंध विच्छेद कर लिया है। इसने 1700 सैनिकों को नृशंसतापूर्वक मारकर जिस तरह वीडियो और तसवीरें जारी कर दी उससे इनके हिंसक जुनून का पता चलता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश नीति के जानकारों और सुरक्षा सलाहकारों से विचार विमर्श के बाद कुछ कदम उठाए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ए. के. डोभाल इस बचाव मिशन पर लगे हैं। इराक में फंसे भारतीयों को लाने के लिए भारत अपना सुपर हरक्यूलिस विमान तैयार रखा है। भारत सरकार ने इराक में अपने पूर्व राजदूत सुरेश रेड्डी को समझौते के लिए भेजा है। रेड्डी को हाल ही में आसियान का विशेष दूत नियुक्त किया गया है। रेड्डी के इराक में अच्छे संपर्क हैं। लेकिन प्रश्न है कि रेड्डी बातचीत करेंगे तो किनसे? ये 40 तो अपह्त हैं, लेकिन वहां कई हजार भारतीयों के लिए संकट का समय है, जहां आतंकवादियों का वर्चस्व कायम हो गया है। विद्रोहियों के कब्जे वाले तिरकित के एक अस्पताल में भी कार्यरत 46 भारतीय नर्से फंसी हुई हैं। ये नर्से ज्यादातर केरल की हैं। तिकरित टीचिंग अस्पताल की नर्स मेरियन जोस ने एक भारतीय टीवी चैनल से फोन पर बताया हम अस्पताल परिसर में किसी बंधक की तरह हैं। यहां कोई इराकी कर्मचारी नहीं है। एक दिन पहले रेडक्रॉस के लोग आए थे। उन्होंने हमारे सिम रिचार्ज कर दिए। पुलिस सेना और हर कोई यहां से भाग चुका है। रेडक्रॉस ने हमसे कहा है कि अगर हालात ठीक रहे तो वे हमें यहां से निकाल लेंगे अन्यथा हमें यहीं रहना होगा। वहीं तिकरित के मुकाबले बगदाद में काम कर रही नर्सों ने बताया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं और वे सुरक्षित हैं।

सुन्नी संगठन आईएसआईएस लगातार कब्जा करते खून और विध्वंस मचाते बढ़ रहा है। इसके साथ कई सुन्नी संगठन हैं। दरअसल, सुन्नियों की शिकायत है शिया बहुल सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। इनका लक्ष्य सीधा सत्ता पर कब्जा करना है। पता नहीं भारतीयों का अपहरण इनने क्यों किया है? विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि इराक में 30 हजार भारतीय हैं, लेकिन सबसे प्रभावित क्षेत्र में संख्या सवा सौ के ही आसपास हैं। नर्सों के पूरी तरह सरुक्षित रहने का उनने दावा भी किया। उनका कहना है कि अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि उनको वहां से बाहर निकाला जाए.....जैसे ही स्थिति थोड़ी अनुकूल होगी हम उन्हें वहां से निकाल लेंगे, उनकी पूरी व्यवस्था करेंगे। कुल मिलाकर सरकार के प्रतिनिधि के रुप में स्वराज ने लोगों से उन पर विश्वास करने, धैर्य रखने तथा ईश्वर से दुआ करने की अपील की। हालांकि किन अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों से भारत सरकार का सम्पर्क है यह स्पष्ट नहीं किया जाएगा। हम अपने सरकार पर अविश्वास करें इसका कोई कारण नहीं है। विदेश मंत्रालय ने वहां की स्थिति पर नजर रखने और फंसे भारतीयों के विषय में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 24 घंटे काम करने वाले एक कंट्रोल रूम की स्थापना की है। इसलिए तत्काल हम मानकर चल सकते हैं कि सरकार को यह विश्वास है कि वे वहां से उन्हें बाहर निकाल देंगे। सरकार का सुझाव है कि लोग अपने घर में रहें, क्योंकि बाहर निकलने पर खतरा ज्यादा है।

यह सरकार का आकलन है। लेकिन वहां से ऐसी खबरें नहीं आ रहीं हैं जिन्हें पूर्णतया विश्वसनीय मान लिया जाए। 2003 के युद्ध के दौरान खबरें सीधीं आ रहीं थीं, दृश्य भी आ रहे थे.....आज वह स्थिति नहीं है। आतंकवादी समूह किसी नियम से युद्ध नहीं लड़ रहे, बल्कि आतंक, आग एवं खून से अपना विस्तार करते जा रहे हैं। वैसे किसी गुट ने न तो अपहरण की जिम्मेदारी ली है और न ही कोई मांग रखी है। हाल में ही में बगदाद से 210 किलोमीटर दूर स्थित बैजी रिफाइनरी पर मोर्टार और बंदूकों से हमला किया गया। हमले के बाद रिफाइनरी को बंद कर दिया गया। दाअसल, आतंकियों ने तेल के कई डिपो तबाह कर दिए हैं। राजधानी बगदाद से केवल 60 किमी दूर बाकुबा शहर को सुन्नी विद्रोहियों ने अपने कब्जे में ले लिया। इराक की फौज और आईएसआईएस के सुन्नी चरमपंथियों के बीच हफ्ते भर से इराक के पूर्वी और मध्य हिस्से में जंग चल रही है। पहले उन्होंने मोसूल और ताल अफार शहर पर भी कब्जा कर लिया था। सरकार देश के उत्तर में ताल अफार शहर को वापस अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है। ताल अफार सरकार और चरमपंथियों के कब्जे वाले इलाके के बीच एक शहर है। चरमपंथियों ने बगदाद के पश्चिम में फलुजा के पास सेना के एक हेलिकॉप्टर पर हमला कर उसे गिरा दिया और सेना के कई टैंक उड़ा देने का दावा किया।

सच कहें तो आईएसआईएस के लड़ाकों ने देश के उत्तरी इलाके में कब्जा जमा लिया है। अन्य सुन्नी समूहों द्वारा लड़ाकों की भर्ती जारी है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने भी कहा है कि आईएसआईएस के अन्य साथी समूहों ने युद्ध अपराध किए हैं। लेकिन वे कर कुछ नहीं सकते हैं। वैसे इराक सरकार की सेनाएं आईएसआईएस का मुकाबला कर रहीं हैं। किरकुक के पास एक गांव के लोगों द्वारा आतंकियों को खदेड़ने की भी सूचना आई। शिया और तुर्कमान ग्रामीण मिलिशिया ने इनका घंटेभर मुकाबला किया। उधर, दियाला प्रांत की राजधानी बाकुबा के कुछ हिस्सों पर आतंकियों ने कब्जा कर लिया था। सुरक्षा बलों ने पलटवार किया। इसमें 56 सैनिक मारे गए। पर शहर फिर अपने कब्जे में ले लिया। आतंकियों ने यहां एक जेल पर हमला कर ४४ कैदियों की भी हत्या कर दी। बाकुबा बगदाद से सिर्फ 60 किमी दूर है। आतंकियों के खिलाफ बच्चों ने भी हथियार उठाना शुरू कर दिया है। मौके से आ रही तस्वीरों में बच्चों को हथियार उठाए हुए देखा जा सकता है। शिया धर्मगुरु सिस्तानी के आग्रह पर शिया बच्चों ने हथियार उठाए हैं। आतंकी संगठन के भी बच्चे मोर्चे पर हैं। इस प्रकार बहुसंख्यशिया इनसे मोर्चाबंदी आरंभ कर चुके हैं। लेकिन इसका अर्थ सांप्रदायिक संघर्ष है। दूसरी ओर कुर्द मिलिसिया भी हैं। इनने मोसुल शहर को अपने कब्जे में कर लिया था लेकिन स्थानीय कुर्द मिलिसिया ने आइएसआइएस के आतंकियों को खदेड़ कर इस शहर पर अपना कब्जा जमा लिया है। ये तीनों समूह हिंसा और संघर्ष में इतने अराजक हैं कि इनको अनुशासित तक करना संभव नहीं। 

भारत की समस्या यही है कि वह बात किससे करे। अमेरिका स्थित इराक के राजदूत लुकमान फैली ने कहा कि अफगानिस्तान में सिर्फ एक ओसामा बिन लादेन था। इराक में तो एक हजार ओसामा सड़कों पर है। उनसे निपटना आसान नहीं है। आईएसआईएस के पास धन की भी कमी नहीं है। इनकी आय का मुख्य स्रोत जबर्दस्ती वसूली है। इसके अलावा यह संगठन ट्रक चालकों और व्यापारियों से भी पैसा वसूलता है। ये कई बैंक और गोल्ड शॉप लूट चके है। मोसुल पर कब्जा करने के साथ 429 मिलियन डॉलर की लूट की। इसके बाद यह दुनिया का सबसे अमीर आतंकवादी संगठन बन गया है। यूएस आर्मी वॉर कॉलेज के मुताबिक हाल ही में आईएसआईएस ने अपने हर फाइटर को 200 डॉलर प्रतिमाह देना शुरू कर दिया है, ताकि संगठन में अधिक से अधिक आतंकियों को जोड़ा जा सके। 

कुवैत पर हमले के समय कई लाख लोगों को निकाला गया, इराक युद्ध के समय भी निकाला, लेकिन दोनों परिस्थितियों में अंतर है। तब कोई अपहरण नहीं था और इराक की हमलावर सेना या नाटो सेनाओं की भारतीयों से दुश्मनी नहीं थी। तो ऐसे समय काफी धैर्य एवं बुद्धि कुशलता की आवश्यकता है। पूरा देश कामना करेगा कि हमारे लोग वहां से सुरक्षित निकलें। लेकिन यह यूं ही नहीं होगां। भारत को अपनी क्षमता के अनुरुप कुव्वत दिखानी होगी।

अवधेश कुमार, ईः30, गणेश नगर, पांडव नगर कॉम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 09811027208


मंगलवार, 27 मई 2014

नव निर्वाचित सांसद श्री मनोज तिवारी जी का स्वागत


संवाददाता

नई दिल्ली। आज दिनांक 27-5-14 दिन मंगलवार को उत्तर पूर्वी दिल्ली के. भारतीय जनता पार्टी से नव निर्वाचित सांसद श्री मनोज तिवारी की विजय यात्रा निकली। जिसका स्वागत भारत तिब्बत सहयोग मंच यमुना विहार विभाग के कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया। विभाग अध्यक्ष श्री रामानन्द शर्मा ने फूल मालाओं से मनोज तिवारी जी का स्वागत किया। कार्यकर्ताओं ने उत्साहित होकर उनके स्वागत में पटाखे भी चलाए।

अनिल गुप्ता जी एवं राजकुमार  गजवानी और ध्रुव ठाकुर ने फूलै से श्री तिवारी जी का स्वागट किया। तिवारी जी की यात्रा में उनके साथ उत्तर पूर्वी जिला के अध्यक्ष अजय महावर तथा घोण्डा विधान सभा के विधायक श्री साहब सिंह चौधन मौजूद रहे। सांसद श्री तिवारी जी ने विभाग के सभी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया एवं उनके द्वारा चुनाव के दौरान किए गए कार्यों की सराहना की और क्षेत्र में सभी से आपस में मेल जोल रखने की कामना की।




शुक्रवार, 23 मई 2014

केजरीवाल के इस रवैये के लिए शब्द तलाशना मुश्किल

अवधेश कुमार

अरविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी की सुर्खियांे में आने की कला की दाद देनी होगी। जरा ध्यान दीजिए, मामला न्यायालय का है। केजरीवाल ने कई नेताओं के साथ भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष नितीन गडकरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। गडकरी ने अपने खिलाफ जांच का निष्कर्ष आने के बाद न्यायालय में उनके खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया, साक्ष्य दिए...और अब बारी केजरीवाल के जवाब देने की है। पहले केजरीवाल न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए, इसलिए न्यायालय ने उनसे कहा कि आप 10 हजार रुपए का निजी मुचलका भर दीजिए, और इतने की गारंटी दीजिए, क्योंकि यह कानूनी प्रक्रिया है। यह न्यायालय की एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे कोई भी पूरा करता, मुचलका भर कर बाहर रहता और न्यायालय की तिथियों पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखता। इसमें न कहीं गडकरी हैं न भाजपा, लेकिन केजरीवाल और उनके साथियों ने इसे ऐसा बना दिया है मानो गडकरी पर आरोप लगाने के कारण उन्हें तिहाड़ जेल जाना पड़ा है। यह सफेद झूठ है लेकिन दृश्य देखिए वे सड़कों पर उतरे हैं, हंगामा कर रहे हैं....। सच कहा जाए तो यह विरोध केवल न्यायालय के विरुद्ध हो सकता है, जिसने कहा कि अगर आप मुचलका भरने की कानूनी प्रक्रिया पूरी न करेंगे तो आपको जेल जाना होगा। 

मेेरे संज्ञान में भारतीय राजनीति में यह पहला अवसर है जब किसी नेता ने मानहानि के मामले में मुचलका न भरकर उसे इस तरह मुद्दा बनाया हो। वास्तव में अरविन्द केजरीवाल ने न्यायालय में जो कुछ किया..... उनके समर्थक जिस तरह की दलीलंे दे रहे हैं उनको किन शब्दों में व्यक्त किया जाए यह सारे तटस्थ विश्लेषकों के लिए सबसे बड़े उधेड़बुन का विषय हो गया है। अगर इसे एक राजनीतिक महत्वाकांक्षी व्यक्ति का राजनीतिक स्टंट कहें तो भी इसकी व्याख्या नहीं होती। जो लोग यह कह रहे हैं कि अभिनय में माहिर केजरीवाल और उनके साथियों ने दिल्ली में फिर से जनता का ध्यान खींचने के लिए ऐसा किया है तो यह भी इसकी पूरी व्याख्या नहीं करता। इसी तरह यह कहने से भी कि विधायकों के विद्रोह और असंतोष को रोकने के लिए इस अवसर का उनने गलत इस्तेमाल किया है सम्पूर्ण निहितार्थ साफ नहीं होता। अगर यह कहा जाए कि इवेंट मैनेजमेंट की अपनी कला का फिर से दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने इस्तेमाल आरंभ कर दिया है तो यह भी उनकी पूरी कारगुजारी को साफ नहीं करता। इन सबको मिला दिया जाए तो भी उनकी गतिविधियों का पूरा विश्लेषण नहीं होता। 

लेकिन ये सारी बातें इन पर लागू होतीं हैं। सच कहा जाए यह किसी भी राजनीतिक पार्टी और उसके नेता की ऐसी हरकत है जिसमें एक साथ आम राजनीतिक मर्यादा, न्यायालय की गरिमा.....का हनन तो होता ही है, पहली बार कोई पार्टी परोक्ष तौर पर यह आरोप लगा रही है कि सत्ता बदलने के कारण न्यायालय ने केजरीवाल के साथ ऐसा व्यवहार किया है। यानी मामला भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितीन गडकरी का है और नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने जा रही इसलिए न्यायालय ने ऐसा किया है। मनीष सिसोदिया ने कहा कि अच्छे दिन आ गए हैं। ंसंजय सिंह ने भी यही आरोप लगाया। मामला न्यायालय और केजरीवाल के बीच का है और सएमएस किए जा रहे थे कार्यकर्ताआंे को तिहाड़ जेल पहुंचने के लिए। वे पहुंचे और विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं। थोड़े शब्दों में कहा जाए तो एक अत्यंत ही घटिया, आपत्तिजनक और राजनीतिक हित साधने के लिए शर्मनाक धारावाहिक आरंभ हो गया है। हालांकि इस धारावाहिक की पटकथा अब दिल्ली और देश के लोगों के गले उतरेगी इसमें संदेह है। 

जरा न्यायालय की कार्रवाई और तीन पृष्ठ के आदेश की टिप्पणियों को देखिए। मजिस्ट्रेट ने साफ कहा कि बेल बांड जमा कराना एक कानूनी प्रकिया है और ऐसा नहीं कर आप अलग व्यवहार चाह रहे हैं। आपसे उम्मीद की जाती है कि आप एक आम आदमी की तरह व्यवहार करें। अंत मंे अदालत ने फैसला सुनाया कि जमानत नहीं लेने या निजी मुचलका नहीं भरने की स्थिति में केजरीवाल को जेल भेजा जाए। उनके वकीलों प्रशांत भूषण और राहुल मेहरा ने न्यायालय से कहा कि आम आदमी पार्टी  के सिद्धांत के अनुसार केजरीवाल जमानत के लिए मुचलका नहीं भरेंगे। यह बड़ी विचित्र दलील है......हमारी पार्टी का सिद्धांत है कि हम मुचलका नहीं भरेंगे, इसलिए न्यायालय इसके अनुसार कार्रवाई करे, कानून के अनुसार नहीं। मुचलका भरने से इनकार पर न्यायालय ने केजरीवाल से पूछा कि क्या वह ऐसा चाहते हैं कि उनके साथ कुछ विशेष तरह का व्यवहार किया जाए? दरअसल सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट गोमती मनोचा से कहा कि वह यह हलफनामा देने को तैयार हैं कि वह न्यायालय के समक्ष पेश होंगे, लेकिन मुचलका नहीं भरेंगे। इस पर मैजिस्ट्रेट ने कहा,  वह (केजरीवाल) जमानत के लिए बॉन्ड क्यों नहीं भरेंगे? एक प्रक्रिया है और हमें इस मामले में दूसरी प्रक्रिया क्यों अपनानी चाहिए? न्यायालय ने केजरीवाल के लिए अंग्रेजी में जो शब्द प्रयोग किए हैं वे हैं सनक, जबरन अपनी बात पर अड़ना और उसी तरह न्यालयालय पर काम करने का दबाव डालना। न्यायालय ने कहा कि ‘किसी की सनक और झनक में न्यायालय की प्रकिया को हवा में नहीं उड़ा दिया जा सकता। अगर कोई वादी इरादतन कानून की स्थापित प्रक्रिया का उल्लंघन करने पर उतारु है तो न्यायालय उसके सामने मूकदर्शक बना नहीं रह सकता।’ मनीष सिसौदिया कह रहे हैं कि केजरीवाल के खिलाफ चल रहे मानहानि के दूसरे मामलो में बांड भरने को कहा नहीं गया, लेकिन नई सरकार के आते ही ऐसा कहा गया और उन्हें जेल भेज दिया गया। विचित्र तर्क है। अगर किसी एक न्यायालय ने नहीं कहा और दूसरे ने कहा तो इसमें राजनीतक साजिश कहां से आ गई। 

यह साफ तौर पर न्यायालय के खिलाफ विरोध करना है। गडकरी को हम किसी प्रकार का प्रमाण पत्र नहीं दे रहे, लेकिन जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ कुछ भी नहीं निकला।  जिस अंजलि दमानिया के कथन पर अरविन्द केजरीवाल ने नितीन गडकरी पर आरोप लगाया नागपुर की जनता ने उनकी जमानत जब्त करा दी। आपने अपने आरोप से एक व्यक्ति का राजनीतिक जीवन एक प्रकार से खत्म कर देने की कोशिश की। अगर आरोप नहीं लगता तो गडकरी आज भाजपा अध्यक्ष होते। तो भी उस व्यक्ति ने मान्य कानूनी रास्ता पकड़ा। बात सीधी है या तो आप आप साबित करिए या फिर मानहानि की सजा भुगतिए। लेकिन अभी तो केजरीवाल को तिथियों पर उपस्थित होना था जो नहीं हुए तो न्यायालय में मुचलका भरने में समस्या क्या थी?

वस्तुतः आम आदमी पार्टी का काम करने का अभी तक यही तरीका रहा है। यह उसे दिल्ली में अपनी पुनर्वापसी का अवसर दिखा और उसने इसका इस्तेमाल आरंभ कर दिया। अरविन्द एवं आम आदमी पार्टी के सामने अपनी साख की समस्या है। राज्यपाल की चिट्ठी लीक हो गई जिसमें अपने पुराने स्टैण्ड के विपरीत उनने विधानसभा भंग करने में थोड़ा समय लेने का निवेदन किया गया था। इसमें लिखा गया था कि हम जनता से पूछना चाहते हैं कि क्या सरकार पुनः बनानी चाहिए। यानी सरकार बनाने की भी इच्छा थी। हालांकि चिट्ठी लीक होते ही केजरीवाल ने घोषणा किया वे चुनाव में जाना चाहते हैं और जनता से माफी मांगी। विधायकों का बड़ा वर्ग नाराज है। कुछ भाजपा से सौदेबाजी कर रहे हैं। पहले समर्थन देने वाले अब साफ कर चुके हैं कि दोबारा वे ऐसा नहीं करेंगे। तो यही एक मौका था जब पूरे मामले से ध्यान हटाकर फिर से स्वयं को महाक्रांतिकारी और व्यवस्था को नकारने वाले हीरो क रुप में अपने को दिखाएं। आम आदमी पार्टी की चार यूएसपी रही है- इवेट मैनेजमेंट, कमजोर लक्ष्य पर हल्लाबोल, अभिनय और आत्ममप्रचार। इस तरह अपने यूएसपी के अनुसार ही वे काम कर रहे हैं। लेकिन क्या इस प्रकार की अभिनय, आत्मप्रचार और निरर्थक हल्लाबोल की शैली को जनता उबाउ नहीं मानेगी? 

यह तर्क दिया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली की जनता ने नकारा नहीं है। उसे पिछले विधानसभा चुनाव से 4 प्रतिशत मत अधिक मिले हैं। यकीनन मिले हैं, और कांग्रेस का स्थानापन्न उसने किया है। लेकिन लोकसभा चुनाव परिणाम का दूसरा पहलू यह है कि भाजपा का  करीब 14 प्रतिशत प्रतिशत बढ़ा है। विधानसभा चुनाव मेें आम आदमी पार्टी ने 28 सीटंें जीतीं, इस बार केवल 8 सीटों पर बढ़त मिली है। इसके समानांतर भाजपा की बढ़त 61 सीटों पर है। इन दोनों को मिलाकर जब विवेचन करेंगे तब जनमत साफ दिखाई देगा। मान लीजिए, आपको जनमत मिले भी तो क्या ऐसे आचरण का किसी दृष्टिकोण से समर्थन किया जा सकता है? कतई नहीं। राजनीति का यह तरीका देश में ऐसे कई प्रकार के सामाजिक राजनीतिक असंतुलन और अशांति उत्पन्न करेगा जो कि वर्तमान चुनौतियों और संकटों से निपटने में बाधा खड़ी करेगां। इसलिए ऐसी हरकतों का पुरजोर विरोध होना चाहिए। 

अवधेश कुमार, ई.ः30, गणेश नगर, पांडव नगर काॅम्प्लेक्स, दिल्लीः110092, दूर.ः01122483408, 09811027208


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